एमपी सरकार ने राज्य सूचना आयोग में आलोक नागर और राजेश भट्ट को सूचना आयुक्त नियुक्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की बैठक में लिए गए इस निर्णय को राज्यपाल ने मंजूरी दे दी है।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। पारदर्शिता और सूचना के अधिकार (RTI) को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से सरकार ने दो नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति का निर्णय लिया है। इस पद के लिए आलोक नागर (पूर्व रजिस्ट्रार, फर्म एवं सोसायटी) और राजेश भट्ट (पूर्व कार्यक्रम प्रभारी, आकाशवाणी) के नामों का चयन किया गया है।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इन नियुक्तियों का महत्वपूर्ण निर्णय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया। लोकतंत्र की स्वस्थ परंपरा का पालन करते हुए, पक्ष और विपक्ष के बीच हुई इस चर्चा में दोनों नामों पर सर्वसम्मति बनी। राज्यपाल की ओर से भी इन नियुक्तियों को औपचारिक मंजूरी मिल चुकी है।
गैर-प्रशासनिक पृष्ठभूमि: इस बार की नियुक्तियों की सबसे रोचक बात यह है कि सरकार ने किसी पूर्व आईएएस (IAS) अधिकारी या सक्रिय मुख्यधारा के पत्रकार के बजाय विशिष्ट कार्यक्षेत्रों के अनुभवी विशेषज्ञों को प्राथमिकता दी है।
लंबित मामलों का समाधान: वर्तमान में मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा केवल तीन सूचना आयुक्त कार्यरत हैं। नए सदस्यों के आने से आयोग में लंबित हजारों मामलों की सुनवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
रिक्तियों की स्थिति: सरकार ने पूर्व में तीन पदों के लिए विज्ञापन जारी किया था, लेकिन फिलहाल केवल दो पदों पर ही सहमति बनी है। तीसरे पद को अभी होल्ड पर रखा गया है, जिसे भविष्य में भरा जा सकता है।
राज्य सरकार का लक्ष्य मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा छह अन्य सूचना आयुक्तों के पदों को भरना है। आलोक नागर और राजेश भट्ट के कार्यभार संभालते ही आयोग की सदस्य संख्या में वृद्धि होगी, जिससे आम जनता की अपीलों का निराकरण समय सीमा के भीतर हो सकेगा।

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