मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी शुरू होते ही हंगामा। पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार पर रणनीतिक घोटाले का आरोप लगाया। जानें खंडवा, सागर और रायसेन के उपार्जन केंद्रों का हाल

एमपी में गेहूं खरीदी शुरू कांग्रेस का प्रदर्शन
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के चार संभागों में गुरूवार यानी 9 अप्रैल से गेहूं उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, लेकिन इसके साथ ही प्रदेश की सियासत में उबाल आ गया है। खरीदी में हुई देरी के लिए सरकार जहां इजराइल-ईरान युद्ध जैसे वैश्विक कारणों का हवाला दे रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे किसानों के साथ बड़ा 'रणनीतिक घोटाला' करार दिया है। राजधानी भोपाल से लेकर खंडवा और रतलाम तक कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उग्र प्रदर्शन किया। खंडवा में स्थिति तब तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बैरिकेडिंग तोड़कर कलेक्ट्रेट में प्रवेश किया।
पीसीसी चीफ ने सरकार को घेरा
पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि बारदाने की कमी का कृत्रिम बहाना बनाकर खरीदी टाली गई, ताकि किसान मजबूरी में अपनी फसल खुले बाजार में कम दामों पर बेच दें। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश का लगभग 25% गेहूं पहले ही 1600 से 2000 रुपये प्रति क्विंटल के कम दाम पर बिक चुका है, जबकि सरकार ने 2700 रुपये का वादा किया था। सागर में मंडी बंद होने की सूचना पर पटवारी ने सीधे कलेक्टर को फोन लगाकर फटकार लगाई और किसानों की बदहाली पर जवाब मांगा।
जमीन स्तर पर अव्यवस्था की शिकायतें
दूसरी ओर, जमीनी स्तर पर अव्यवस्थाओं की खबरें भी सामने आ रही हैं। रायसेन जैसे जिलों में उपार्जन केंद्रों पर न तो छांव का इंतजाम है और न ही बारदाने पहुंचे हैं, जिससे किसान चिलचिलाती धूप में परेशान हो रहे हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार किसानों को 2700 रुपये का भाव देने के लिए प्रतिबद्ध है और केंद्रों पर उनका स्वागत तिलक लगाकर किया जा रहा है। सरकार ने प्रशासनिक अधिकारियों को व्यवस्थाओं पर पैनी नजर रखने के निर्देश दिए हैं, लेकिन कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि वह आने वाले दिनों में उज्जैन सहित पूरे प्रदेश में उपवास और आंदोलन के जरिए इस लड़ाई को तेज करेगी।

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