नर्मदापुरम वन विभाग में पदस्थ डिप्टी रेंजर हरगोविंद मिश्रा को रिटायरमेंट के दिन ही ₹18 लाख के गबन के आरोप में बर्खास्त कर दिया गया। जानें 5 साल पुराने इस मामले की पूरी जानकारी और विभागीय जांच के खुलासे।

नर्मदापुरम : स्टार समाचार वेब.
नर्मदापुरम वन विभाग में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहाँ डिप्टी रेंजर हरगोविंद मिश्रा को उनके रिटायरमेंट के ठीक दिन ही सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। यह कठोर कार्रवाई पाँच साल पुराने एक गंभीर मामले में की गई है, जिसमें उन पर करीब ₹18 लाख के सरकारी धन के गबन का आरोप था। विभागीय जाँच में आरोप सही पाए जाने के बाद यह फैसला लिया गया।
क्या था मामला?
डिप्टी रेंजर हरगोविंद मिश्रा पर आरोप था कि जब वे 2019 में बानापुरा में पदस्थ थे, तब उन्होंने "इकोसिस्टम इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट" के तहत एक भ्रमण कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएँ कीं। इस परियोजना के तहत समितियों के 150 लोगों को महाराष्ट्र के रालेगढ़ सिद्धि में भ्रमण पर ले जाना था।
शिकायतकर्ता मधुकर चतुर्वेदी के अनुसार, मिश्रा ने इस भ्रमण कार्यक्रम में लोगों के ठहरने और खाने-पीने में ₹18 लाख रुपये खर्च होना बताया और फर्जी बिल लगाए। आरोप है कि सभी लोगों को शिरडी के सिंहगढ़ होटल में रात्रि रुकना बताया गया, जबकि यह सब फर्जीवाड़ा था। मिश्रा ने कथित तौर पर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों के खातों में पैसे ट्रांसफर कराकर इस सरकारी राशि का दुरुपयोग किया था।
विभागीय जाँच और कार्रवाई
इस मामले में नर्मदापुरम और हरदा में 2022 से जाँच चल रही थी। हरदा से जाँच पूरी होने के बाद विभागीय जाँच भी हुई, जिसका जवाब 26 जून को नर्मदापुरम सीसीएफ (मुख्य वन संरक्षक) कार्यालय को मिला। जाँच में हरगोविंद मिश्रा पर लगाए गए चारों आरोप सही पाए गए।
इसके बाद, सीसीएफ नर्मदापुरम अशोक कुमार चौहान ने तत्काल कार्रवाई करते हुए डिप्टी रेंजर हरगोविंद मिश्रा को बर्खास्त करने का आदेश जारी किया। सीसीएफ चौहान ने बताया कि हरगोविंद मिश्रा वनक्षेत्रपाल के प्रभार में थे और उन्होंने शासकीय राशि का गबन किया।
तत्कालीन डीएफओ पर भी आरोप
इस पूरे मामले में तत्कालीन डीएफओ (मंडलाधिकारी) अजय पांडे पर भी आरोप हैं, जिनकी विभागीय जाँच अभी भी जारी है। यह देखना बाकी है कि उनकी जाँच में क्या सामने आता है।

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