नीट पेपर लीक विवाद पर सरकार का बड़ा एक्शन, NTA के 47 अफसर बर्खास्त। जानिए छात्रों की मांगें, राजनीतिक बवाल और 10 साल की सजा वाले नए सख्त कानून की पूरी डिटेल।

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
देशभर के लाखों छात्रों के विरोध-प्रदर्शन, संसद से लेकर सड़क तक गूंजी आवाज और बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार ने आखिरकार एक बड़ा कदम उठाया है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के 47 अधिकारियों को एक साथ बर्खास्त कर दिया गया है। इससे एक दिन पहले उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी को भी उनके पद से हटा दिया गया था। सरकार का दावा है कि इस बड़ी कार्रवाई का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है, लेकिन सवाल यह है कि क्या महज अधिकारियों के तबादले और बर्खास्तगी से छात्रों का टूटा हुआ भरोसा वापस लौट पाएगा?
नीट पेपर लीक विवाद के बाद सरकार NTA की पूरी कार्यप्रणाली को दुरुस्त करने में जुट गई है। संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, NTA में स्वीकृत पदों के मुकाबले भारी संख्या में संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के जरिए परीक्षाएं कराई जा रही थीं, जिससे सिस्टम में खामियों की गुंजाइश बढ़ गई थी। व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अगले तीन साल के लिए चार नए महाप्रबंधकों की नियुक्ति की जाएगी। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के 'प्रतिभा सेतु पोर्टल' के माध्यम से 16 युवा पेशेवरों को भी इस व्यवस्था से जोड़ा जाएगा ताकि परीक्षा संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही न हो। सूत्रों के मुताबिक, बर्खास्त किए गए कई अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी और आपराधिक कार्रवाई की तैयारी भी चल रही है।
सरकारी कार्रवाई के बावजूद देश के युवाओं और छात्र संगठनों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर अपनी प्रमुख मांगें रखीं। उनकी सबसे पहली और बड़ी मांग शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। इसके साथ ही प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर दर्ज फर्जी एफआईआर को तुरंत वापस लेने और कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग की गई है। सरकार ने कुछ मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया है, लेकिन इस्तीफे के मुद्दे पर विचार के लिए एक दिन का समय मांगा है।
यह पूरा मामला अब पूरी तरह से राजनीतिक रंग ले चुका है, जिससे देश के कई हिस्से सुलग उठे हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस द्वारा पैलेट गन के इस्तेमाल का गंभीर आरोप लगाया है। मुंबई, पटना, अहमदाबाद, चेन्नई और जयपुर समेत देश के कई प्रमुख शहरों में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किए। पश्चिम बंगाल में तो पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच तीखी झड़प हुई, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा। बिहार विधानसभा से लेकर विभिन्न राज्यों की सड़कों तक राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्म है।
इस पूरे विवाद पर लगाम कसने के लिए केंद्र सरकार अब एक बेहद कड़े कानूनी प्रावधान की तैयारी में है।
कैबिनेट की मंजूरी: केंद्रीय कैबिनेट ने सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक से जुड़े मामलों के लिए एक सख्त संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिसे 27 जुलाई को संसद में पेश किया जाएगा।
सजा और जुर्माना: इस नए प्रस्तावित कानून के तहत पेपर लीक के दोषियों को कम से कम 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
फास्ट ट्रैक सुनवाई: मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए होगी और अदालत को अधिकतम तीन महीने के भीतर फैसला सुनाना होगा।
आज सवाल सिर्फ 47 अधिकारियों की बर्खास्तगी या एक नए विधेयक का नहीं है, बल्कि उस अमूल्य भरोसे का है जिसके सहारे देश के करोड़ों युवा अपने भविष्य के सपने बुनते हैं। सरकार ने सख्त कदम उठाने की शुरुआत जरूर कर दी है, लेकिन असली परीक्षा अब सरकार की कार्यप्रणाली की होगी। क्या ये नए नियम और कानून पेपर लीक के इस काले कारोबार की कमर तोड़ पाएंगे, या फिर नाकामी की स्थिति में छात्रों का यह गुस्सा आने वाले दिनों में और भी बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन का रूप ले लेगा? यह आने वाला वक्त ही तय करेगा।
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