पाकिस्तान के बलूचिस्तान में क्वेटा के पास गैस पाइपलाइन को बम से उड़ाने की घटना ने देश में ऊर्जा संकट को गहरा दिया है। जानें कैसे उग्रवादी संगठनों ने गैस बुनियादी ढांचे को एक रणनीतिक हथियार बना लिया है।

बलूचिस्तान में क्वेटा के पास गैस पाइपलाइन को बम से उड़ाया।
पाकिस्तार। स्टार समाचार वेब
पाकिस्तान पहले से ही बदहाल अर्थव्यवस्था और भारी महंगाई की मार झेल रहा है, लेकिन अब वहां की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा प्रहार किया जा रहा है। बलूचिस्तान के क्वेटा क्षेत्र के पास अज्ञात उग्रवादियों ने मुख्य गैस पाइपलाइन को बम से उड़ाकर पूरे क्षेत्र की सप्लाई ठप कर दी है। यह हमला केवल बुनियादी ढांचे का नुकसान नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी 'ऊर्जा युद्धनीति' का हिस्सा है।
बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान की प्राकृतिक गैस का मुख्य स्रोत है, वहां के स्थानीय निवासी ही अब गैस की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। पाइपलाइन के नष्ट होने से क्वेटा और आसपास के शहरों में चूल्हे जलना बंद हो गए हैं। साथ ही LPG की कीमतों में अचानक उछाल आया है क्योंकि पाइपलाइन गैस न मिलने पर लोग सिलेंडरों की ओर भाग रहे हैं। ठंड के मौसम में हीटिंग की समस्या ने मानवीय संकट खड़ा कर दिया है।
कहा जा रहा है कि उग्रवादी संगठन अब पारंपरिक हमलों के बजाय 'इकोनॉमिक टेररिज्म' (आर्थिक आतंकवाद) पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
रणनीतिक दबाव: पाइपलाइन को नुकसान पहुंचाकर सरकार को रक्षा बजट डाइवर्ट करने और मरम्मत पर भारी खर्च करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
जनता का असंतोष: जब लोगों को बुनियादी सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो उनका गुस्सा सीधे तौर पर राज्य और सेना के खिलाफ फूटता है, जो उग्रवादियों का प्राथमिक लक्ष्य है।
बलूचिस्तान में सक्रिय अलगाववादी समूह लंबे समय से यह आरोप लगाते रहे हैं कि केंद्र सरकार उनके संसाधनों का दोहन करती है लेकिन बदले में उन्हें कुछ नहीं मिलता। इस पाइपलाइन विस्फोट को उसी 'संसाधन राष्ट्रवाद' (Resource Nationalism) से जोड़कर देखा जा रहा है।
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से बेलआउट पैकेज की शर्तों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहा है। ऊर्जा सप्लाई बाधित होने से औद्योगिक उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ता है।
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के लिए हजारों किलोमीटर लंबी पाइपलाइनों की सुरक्षा करना एक बड़ी चुनौती बन गई है। दुर्गम पहाड़ी इलाका और स्थानीय स्तर पर उग्रवादियों को मिलने वाला समर्थन इस समस्या को और जटिल बनाता है। पाकिस्तान में गैस पाइपलाइन का महज एक 'सप्लाई लाइन' से 'हथियार' में बदल जाना इस बात का संकेत है कि देश के भीतर गृह युद्ध जैसी स्थितियां अब आर्थिक और ऊर्जा संसाधनों के इर्द-गिर्द सिमट रही हैं। यदि इसे समय रहते नियंत्रित नहीं किया गया, तो पाकिस्तान की ऊर्जा प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो सकती है।

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