पन्ना शहर में जल निगम की पाइप लाइन परियोजना में भारी अनियमितता उजागर। बिना मानक खुदाई के पाइप डालकर मिट्टी से ढांक दिया गया। विभागीय निगरानी नदारद, ठेकेदार की मनमानी चरम पर। नागरिकों में रोष।

जल निगम के अधिकारियों और ठेकेदार की मनमानी जारी
पन्ना, स्टार समाचार वेब
शहर में पेयजल आपूर्ति सुधारने के उद्देश्य से जल निगम द्वारा बिछाई जा रही पाइप लाइन का कार्य अब नागरिकों के लिए मुसीबत बनता जा रहा है। यह योजना पुराने पन्ना क्षेत्र में निमार्णाधीन पानी टंकी से जुड़े इलाकों को पानी पहुंचाने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन पाइप लाइन बिछाने में न तो गुणवत्ता का ध्यान रखा जा रहा है, न ही तय तकनीकी मानकों का पालन किया जा रहा है। पेयजल परियोजनाओं के लिए एचडीपीई पाइप लाइन बिछाने के लिए भारतीय मानकों के अनुसार कम से कम 1 मीटर गहराई की खुदाई अनिवार्य होती है। इसका उद्देश्य पाइप को टूट-फूट, सतही दबाव, मौसमीय प्रभाव और संभावित रिसाव से बचाना होता है। लेकिन पन्ना में ठेकेदार ने खुदाई की जगह सिर्फ 1 फुट से भी कम गहराई पर पाइप डालकर ऊपर से मिट्टी डाल दी है। इससे पाइप लाइन की स्थायित्व और सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं। इतना ही नहीं बीडी कॉलोनी जैसे इलाकों में जहां सड़क किनारे पर्याप्त खाली जगह मौजूद थी, वहां भी ठेकेदार ने सीमेंट कंक्रीट सड़कों को अनावश्यक रूप से खोद डाला। नागरिकों ने जब इस पर आपत्ति जताई, तो उन्हें अनसुना कर दिया गया। ठेकेदार के कर्मचारियों ने खुदाई से इनकार करते हुए कहा कि पत्थर की परत होने के कारण जितनी खुदाई हो पा रही है, उतनी में ही पाइप बिछाई जाएगी। जबकि शासन के निर्देश के अनुसार हार्ड रॉक की खुदाई के लिए हेमर मशीनों का प्रयोग आवश्यक होता है।
बिना निगरानी, केवल ठेकेदार की मनमानी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि न तो कोई विभागीय इंजीनियर मौके पर मौजूद रहता है, न ही जल निगम के अधिकारी निगरानी करते दिखते हैं। श्रमिकों के भरोसे पूरा प्रोजेक्ट चल रहा है। इससे न केवल करोड़ों की योजना पर संकट मंडरा रहा है, बल्कि भविष्य में यह पाइप लाइन नागरिकों के लिए और भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है। यदि यही स्थिति बनी रही, तो कुछ ही वर्षों में यह पाइप लाइन खराब हो सकती है, जिससे न केवल शासन को दोबारा खर्च उठाना पड़ेगा बल्कि नागरिकों को जल संकट झेलना पड़ सकता है। पेयजल की यह महत्त्वपूर्ण परियोजना ठेकेदार की लापरवाही और जल निगम की निष्क्रियता के कारण प्रारंभिक चरण में ही असफल होती दिख रही है।
वहां पर पूरी तरह से चट्टान है बड़ी पोकलेन मशीन चल रही है यह प्रेशर वाली लाइन नहीं है सीमेंट कंक्रीट डालकर उसको सही कर दिया जाएगा।
रोहित सिंह, कांट्रेक्ट इंजीनियर

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