डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने भारत और चीन में ChatGPT के उपयोग पर आपत्ति जताई है। जानें क्यों नवारो इसे अमेरिकी संसाधनों का नुकसान बता रहे हैं।

डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो
वाशिंगटन/नई दिल्ली: स्टार समाचार वेब
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ChatGPT जैसी तकनीकों के वैश्विक उपयोग को लेकर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। नवारो ने इस बात पर आपत्ति जताई है कि अमेरिकी संसाधनों से विकसित और संचालित इन आधुनिक तकनीकों का लाभ भारत और चीन जैसे देश उठा रहे हैं, जबकि इसका आर्थिक बोझ अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर पड़ रहा है।
एक अमेरिकी न्यूज़ चैनल को दिए साक्षात्कार में नवारो ने हैरानी जताते हुए कहा कि यह तर्क से परे है कि अमेरिकी नागरिकों के टैक्स का पैसा विदेशी बाजारों को लाभ पहुँचाने के लिए इस्तेमाल हो रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि जब AI प्लेटफॉर्म और ChatGPT जैसी सेवाएं अमेरिका में बनी हैं और अमेरिकी संसाधनों व बिजली की भारी खपत से चल रही हैं, तो इनका मुफ़्त या रियायती लाभ भारत जैसे देशों को क्यों मिल रहा है।
नवारो के मुताबिक, ChatGPT का बुनियादी ढांचा और सर्वर अमेरिकी जमीन पर हैं, लेकिन इसके सबसे बड़े उपयोगकर्ता आधार में भारत और चीन शामिल हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका इन तकनीकों के विकास में निवेश करता है और बड़े जोखिम उठाता है, लेकिन अंततः इसका आर्थिक और रणनीतिक लाभ दूसरे देशों की झोली में चला जाता है। नवारो इसे अमेरिकी संसाधनों की "चोरी" या "दुरुपयोग" के रूप में देख रहे हैं।
पीटर नवारो के इन सुझावों ने तकनीकी जगत में चिंता बढ़ा दी है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप का ध्यान इस ओर खींचते हुए सुझाव दिया है कि ऐसी सेवाओं के समर्थन पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए। जानकारों का मानना है कि यदि ट्रंप प्रशासन इन सुझावों पर अमल करता है, तो भविष्य में AI सेवाओं के उपयोग पर भारी शुल्क या भौगोलिक प्रतिबंध (Geo-blocking) जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, जिससे भारत जैसे बड़े बाजार प्रभावित हो सकते हैं।
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