पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने मंत्रियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। जानें पेट्रोलियम, बिजली और खाड़ी देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर सरकार का क्या है प्लान
By: Ajay Tiwari
Mar 22, 20266:19 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
प्रधानमंत्री मोदी ने कैबिनेट मंत्रियों और संबंधित विभागों के शीर्ष अधिकारियों के साथ पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात पर गहन चर्चा की। बैठक में मुख्य रूप से पेट्रोलियम, बिजली और विदेशी मुद्रा भंडार जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण किया गया। 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उपजे तनाव ने भारत की चिंताएं बढ़ा दी हैं, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है।
LPG और क्रूड ऑयल की निगरानी:
पीएम ने पेट्रोलियम मंत्रालय को निर्देश दिया है कि कच्चे तेल और एलपीजी की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कमी न होने पाए। वैकल्पिक मार्गों और रूस व अमेरिका जैसे देशों से तेल आयात बढ़ाने पर भी विचार किया गया।
बिजली और कोयला भंडार:
युद्ध की स्थिति में यदि गैस की कीमतें बढ़ती हैं, तो बिजली उत्पादन प्रभावित न हो, इसके लिए कोयला आधारित पावर प्लांट्स को 'अलर्ट मोड' पर रहने को कहा गया है।
फंसे भारतीयों की सुरक्षा:
खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर विदेश मंत्रालय को हर पल की अपडेट रखने और जरूरत पड़ने पर 'रेस्क्यू प्लान' तैयार रखने के निर्देश दिए गए हैं।
आर्थिक स्थिरता:
बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में उछाल से होने वाले राजकोषीय घाटे और मुद्रास्फीति (महंगाई) को नियंत्रित करने की योजना पेश की।
सरकार का संदेश:
केंद्र सरकार ने कहा कि वे घबराएं नहीं। किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। देश में पर्याप्त तेल और गैस का भंडार है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं।