प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में ईरान-पश्चिम तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा पर बड़ा बयान दिया है। जानें उन्होंने वैश्विक तेल आपूर्ति और शांति के लिए क्या कहा।
By: Ajay Tiwari
Mar 23, 20263:09 PM
संसद के निचले सदन, लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भारत का पक्ष स्पष्ट रूप से रखा। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के संदर्भ में पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में किसी भी प्रकार की रुकावट विश्व अर्थव्यवस्था के लिए "अस्वीकार्य" है।
प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक कच्चे तेल और गैस आपूर्ति की जीवन रेखा है। यदि यहाँ किसी भी तरह का सैन्य हस्तक्षेप या गतिरोध उत्पन्न होता है, तो इसका सीधा असर न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ेगा, बल्कि पूरी दुनिया में महंगाई और आर्थिक अस्थिरता का संकट खड़ा हो जाएगा।
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उन्होंने वैश्विक समुदायों से अपील की कि वे कूटनीति के माध्यम से विवादों को सुलझाएं।उन्होंने कहा कि युद्ध या संघर्ष किसी भी समस्या का समाधान नहीं हैं। भारत हमेशा 'संवाद और शांति' (Dialogue and Peace) के पक्ष में खड़ा रहा है। प्रधानमंत्री के अनुसार, वैश्विक सप्लाई चेन पहले से ही कई चुनौतियों से जूझ रही है। ऐसे में एक और समुद्री मार्ग का बाधित होना मानवता के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत इस संकट को टालने के लिए एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में मध्यस्थता और कूटनीतिक प्रयासों में अपनी भूमिका निभाता रहेगा।
प्रधानमंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। भारत का यह कड़ा संदेश दुनिया को यह बताने के लिए पर्याप्त है कि वह अपने हितों और वैश्विक शांति के लिए किसी भी मंच पर बोलने से हिचकिचाएगा नहीं।