संसद के विशेष सत्र के दूसरे दिन लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक हुई। राहुल गांधी के भाषण ने सदन का माहौल गरमाया।

राहुल गांधी की खास बातें..
विधेयक पर कटाक्ष: यह कानून नारी शक्ति के लिए नहीं, बल्कि उनके सशक्तिकरण के नाम पर महज एक औपचारिकता है।
राजनीतिक मंशा: इस कदम का असली उद्देश्य देश के राजनीतिक समीकरणों और चुनावी परिदृश्य को अपने पक्ष में मोड़ना है।
महिलाओं की भूमिका: राष्ट्र की प्रगति और वैचारिक नींव को मजबूती देने वाली सबसे बड़ी शक्ति हमारे देश की महिलाएं ही हैं।
जीवन का अनुभव: हम सभी के व्यक्तित्व निर्माण और सीख में महिलाओं का योगदान अतुलनीय रहा है।
व्यक्तिगत अनुभव और जुड़ाव: भले ही प्रधानमंत्री और मेरे जीवन में पत्नी का इनपुट नहीं है, लेकिन मां और बहन के रूप में हमें महिलाओं का मार्गदर्शन और स्नेह निरंतर मिलता रहा है।
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
संसद के विशेष सत्र का दूसरा दिन भी सियासी गहमागहमी और शोर-शराबे की भेंट चढ़ता नजर आया। सदन में जब महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण संशोधनों पर बहस शुरू हुई, तो सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।
सदन में चर्चा के दौरान जैसे ही नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महिला आरक्षण विधेयक में संशोधनों को लेकर अपनी बात रखनी शुरू की, सत्ता पक्ष के सदस्यों ने टोका-टाकी शुरू कर दी। राहुल गांधी महिलाओं की भागीदारी और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दों को विधेयक से जोड़ने की वकालत कर रहे थे, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया।
विपक्ष का मुख्य तर्क यह रहा कि आरक्षण को लागू करने में देरी क्यों की जा रही है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में मांग की कि इस कानून को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और इसमें ओबीसी (OBC) महिलाओं के लिए अलग से कोटा सुनिश्चित हो। उनके इन बयानों के बाद सदन में काफी देर तक नारेबाजी और हंगामा चलता रहा।
हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही में कई बार व्यवधान उत्पन्न हुआ। लोकसभा अध्यक्ष ने बार-बार सदस्यों से शांत रहने और लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने की अपील की, लेकिन दोनों पक्षों के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप ने सदन का तापमान बढ़ाए रखा।

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