सितपुरा क्षेत्र में रिलायंस बायो फ्यूल संयंत्र की जहरीली दुर्गंध से सांस लेना मुश्किल, ग्रामीणों का आंदोलन का अल्टीमेटम।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के बायो फ्यूल एनर्जी संयंत्र से उठती तीव्र और जहरीली दुर्गंध ने सतना जिले के सितपुरा क्षेत्र को एक गंभीर जनस्वास्थ्य संकट के मुहाने पर ला खड़ा किया है। बीते एक सप्ताह से खदान टोला बम्हौर, सितपुरा, बचवई, छींदा, खम्हरिया, लालपुर, बरहा और बम्हौर स्टैंड टोला सहित कई गांवों में लोग खुली हवा में सांस लेने को तरस रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि हालात ऐसे हैं मानो पूरा इलाका किसी खुले सेप्टिक टैंक में बदल गया हो। सवाल यह है कि लगातार पर्यावरणीय क्षति के बाद भी प्रशासन की यह चुप्पी क्या महज लापरवाही है या फिर एक शातिर अनदेखी? संयंत्र के आसपास के गांवों की हवा में घुलती यह बदबू केवल दुर्गंध नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता का प्रतीक बन चुकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन समय रहते ठोस कार्रवाई करता है या फिर हालात किसी बड़े हादसे का रूप लेने के बाद ही नींद से जागेगा।
सूर्यास्त के बाद सांस लेना भी मुश्किल
ग्रामीणों के अनुसार दिनभर बदबू बनी रहती है, लेकिन शाम ढलते ही इसकी तीव्रता कई गुना बढ़ जाती है। बचवई और बम्हौर के रहवासियों का कहना है कि रात में भोजन करना, घर के बाहर बैठना या खिड़कियां खोलना तक संभव नहीं रह गया है। बच्चों, बुजुर्गों और दमा के मरीजों को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही है। कई लोग आंखों में जलन, सिरदर्द और गले में खराश की शिकायत कर रहे हैं। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, त्वचा रोग और श्वसन संक्रमण जैसी प्रदूषणजनित बीमारियां फैल सकती हैं। उड़ते कणों और जहरीली गैसों से संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। यह केवल दुर्गंध की समस्या नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
अगस्त-सितंबर की चेतावनी भी बेअसर
गौरतलब है कि अगस्त- सितंबर में संयंत्र से प्रवाहित प्रदूषित अवशिष्ट मलबे और गंदे पानी के कारण पास के एक तालाब में 25 से 30 टन मछलियों की मौत हो गई थी। यदि उस समय संयंत्र प्रबंधन ने प्रदूषण रोकने के पुख्ता और स्थायी उपाय किए होते, तो आज यह नौबत शायद न आती। ग्रामीणों ने तब भी प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संयंत्र के जनरल मैनेजर अर्पित सिंह बघेल के अलावा अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिले। आज वही लापरवाही हवा को जहरीला बना चुकी है।
ग्रामीणों की चेतावनी, गांव का बच्चा- बच्चा सड़क पर उतरने को तैयार
बचवई के उप सरपंच गांधी सिंह अमरेंद्र सहित कई ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण तंत्र मूकदर्शक बना हुआ है। ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि एक-दो दिन में स्थिति नहीं सुधरी तो बिना किसी और चेतावनी के संयंत्र के मुख्य द्वार पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। पंच रानी कोरी का कहना है कि यह लड़ाई अब स्वच्छ हवा, सुरक्षित जल और जीवन के अधिकार की है, अगर प्रशासन अब भी नहीं जागा तो गांव का बच्चा-बच्चा सड़क पर उतरेगा।
पूरा प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। कोई यह देखने वाला नहीं है कि कई गांव के रहवासी नरक जैसा जीवन जी रहे हैं। ध्यान दिया जाय नहीं तो सड़क पर उतरकर हम विरोध जताएंगे।
बादल सिंह, निवासी बरहा
बम्हौर स्टैंड के आसपास हमारा सांस लेना भी मुश्किल बना हुआ है। क्या यही जैविक उर्जा है जिसे रिलायंस जैसी नामी कंपनी बना रही है। प्रशासन को ध्यान देना चाहिए।
निधि जायसवाल, निवासी बम्हौर स्टैंड टोला
बारिश में भी ऐसा ही हाल था जब प्रदूषित मलबा बहकर आसपास के खेतों को प्रदूषित कर दिया था। तालाब की मछलियां मरने से चारों ओर दुर्गंध थी। अब हवा में भी दुर्गंध संयंत्र प्रबंधन भर रहा है।
धर्मेंद्र कुमार प्रजापति, बम्हौर खदान टोला
संयंत्र की दुर्गंध लालपुर तक आ रही है। रात होते ही सांस लेने में भी कठिनाई हो रही है। बुजुर्गों को तो बहुत परेशानी है। क्या प्रशासन को यहां प्रदूषण से मौत का इंतजार है, तभी कदम उठाए जाएंगे।
अमन बागरी, निवासी लालपुर
मेरी सितपुरा में दुकान है जहां दुर्गंध से जीना हराम है। इसका असर यहां धंधे पर भी हो रहा है। आसपास की दुकानों पर तो वाहन चालक दुर्गंध के कारण रुकना भी पसंद नहीं करते।
पंकज, सितपुरा
यह कैसी दादागिरी है कि लोगों को सांस तक नहीं लेने दिया जा रहा। यह बायो फ्यूल एनर्जी संयंत्र नहीं बल्कि पाल्यूशन प्रोडक्शन प्लांट है जिसने यहां संक्रामक व प्रदूषण जनित बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है।
भूपेंद्र सिंह, बिटलू, निवासी सितपुरा
रिलायंस संयंत्र को प्रशासन क्या तब तक अभयदान देता रहेगा जब तक कि आसपास के गांव के वाशिंदों के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला शुरू नहीं हो जाता? यही हाल रहा तो हम आंदोलन कर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराएंगे।
निखिल बागरी, बचवई
अब बर्दाश्त के बाहर हो रहा है। हम सब प्रदूषण की गहरी चपेट में है। ऐसा लगता है कि अधिकारियों ने संयत्र प्रबंधन के सामने घुटने टेक दिए हैं। ऐसे में अब हम अपनी लड़ाई स्वयं लड़ेंगे।
अनुराग गर्ग, छींदा
प्रदूषण संबंधी पहले की शिकायतों को यदि संयंत्र प्रबंधन और प्रशासन ने गंभीरता से लिया होता तो कई गांव की आबादी मुसीबत में नहीं होती। संयत्र की व्यवस्था को दुरुस्त करें या फिर इसे यहां से हटाएं।
नन्हे सिंह परिहार, बरहा
हैरानी है कि एक औद्योगिक उपक्रम लगातार हम ग्रामीणों की जान को मुसीबत में डाल रहा है और सभी चुप हैं। क्या कोई भी उद्योग जनता की जान से ज्यादा महत्वूपर्ण है। हम घुटघुटकर सांसे ले रहे हैं।
मनीष जायसवाल, बम्हौर स्टैंड टोला
जब तक कोई बड़ी अनहोनी नहीं होगी, तब तक क्या कार्रवाई नहीं होगी? यहां के हालात भयावह हैं जहां की गंध से भरी हवा में लोगों का सांस लेना मुश्किल बना हुआ है। हमे हमारे ही गांव में क्या शुद्ध हवा तक मुहैया नहीं होगी?
दीपेंद्र सिंह परिहार, बरहा
निश्चित तौर पर यह गंभीर मामला है जिसकी जांच करा त्वरित कार्रवाई कराई जाएगी। किसी भी औद्योगिक उपक्रम को प्रदूषण फैलाने की इजाजत नहीं है। जहां तक रिलायंस संयंत्र का सवाल है तो प्रदूषण का एक मामला एनजीटी में भी है।
सुधांशु तिवारी, जिला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी
प्रशासन से सीधे सवाल


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