रीवा एयरपोर्ट रनवे विस्तार के लिए 140 एकड़ भूमि अधिग्रहण प्रस्तावित, 830 किसान प्रभावित होंगे। चोरहटा और उमरी गांवों में जमीन चिन्हांकन पूरा, कैबिनेट स्वीकृति के बाद प्रक्रिया शुरू होगी, जमीन खरीद-बिक्री भी तेज।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
रीवा एयरपोर्ट के रनवे विस्तार के लिए जमीन अधिग्रहण की पहले चरण की प्रक्रिया पूरी हो गई है। जमीनों का चिन्हांकन और खसरा की जानकारी जुटाने के बाद प्रस्ताव भोपाल भेज दिया गया है। दो गांव के 830 किसानों की जमीन फंस रही। 140 एकड़ भूमि अधिग्रहित की जाएगी। अब कैबिनेट में स्वीकृति के बाद अधिग्रहण प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
आपको बता दें कि रीवा में एयरपोर्ट की शुरुआत हो गई है। वर्तमान समय में 1800 मीटर लंबा रनवे बना हुआ है। इस रनवे में छोटे विमान यानि एटीआर 78 आसानी से उतर रहे हैं। अब इन विमानों की सफलता के बाद डिप्टी सीएम के प्रयास से केन्द्रीय उड्डयन मंत्री ने इसके विस्तार को हरी झंडी दे दी है। रीवा एयरपोर्ट का रनवे लंबा कर 2300 मीटर का किया जाना है। सीएम ने भी हरी झंडी दिखा दी थी। सीएम और केन्द्रीय मंत्री की घोषणा के बाद जमीन अधिग्रहण की प्रारंभिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई। शुरुआती दौर में 2300 मीटर के दायरे में आने वाली जमीन, घर, मकान और दुकान को चिन्हित किया गया।
सीमांकन और चिन्हांकन की कार्रवाई की गई। सभी जमीनों के खसरा नंबर और भू स्वामियों के नाम एकत्र किए गए। किस खसरा नंबर की कितनी जमीन फंस रही है। यह सारी जानकारी जुटाने के बाद रिपोर्ट कलेक्टर के सामने प्रस्तुत की गई। कलेक्टर ने अगली प्रक्रिया के लिए जानकारी मप्र शासन को भेज दी है। अब कैबिनेट से स्वीकृति मिलने का इंतजार किया जा रहा है।
खसरा नंबर प्रकाशन के बाद अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू होगी
हवाई अड्डा के रनवे विस्तार में दो गांव की जमीन फंस रही है। इसमें चोरहटा और उमरी गांव शामिल हैं। चोरहटा की अधिक जमीन फंस रही है। प्रस्ताव बनाकर भोपाल भेजा गया है। अब यही प्रस्ताव कैबिनेट की बैठक में स्वीकृति के लिए रखा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद रनवे विस्तार में फंस रही जमीनों का प्रकाशन किया जाएगा। प्रकाशन के बाद ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होगी।
सबसे अधिक चोरहटा के फंस रहे किसान
रनवे विस्तार में सबसे अधिक जमीन और किसान चोरहटा के फंस रहे हैं। चोरहटा की करीब 90 एकड़ जमीन रनवे में जाएगी। 560 किसान और भूस्वामी प्रभावित होंगे। इसमें एकड़ वाली कृषि भूमि कम है लेकिन डायवर्सन लैंड अधिक है। छोटे रकबा की संख्या ज्यादा होने से मुआवजा भी अधिक बनेगा। इसी तरह उमरी में 50 एकड़ जमीन फंस रही है। 270 भूस्वामी और किसान फंस रहे हैं। यहां भी चोरहटा जैसे ही हालात है।
तेजी से जमीन की खरीदी और बिक्री हो रही
जब चोरहटा हवाई अड्डा का निर्माण होना था तो कलेक्टर ने जमीनों की खरीदी, बिक्री पर रोक लगा दी थी। वर्ष 2016 से यह रोक लगाई गई थी और तब तक लगी थी जब तक जमीनों का अधिग्रहण नहीं हो गया। इसके बाद भी जमीन के डायवर्सन और खरीदी, बिक्री में बड़ा खेल हुआ। बड़ी जमीनों को पटवारियों ने मिलकर छोटे छोटे बटांकन में बदल दिया। जमीन खेती से व्यावसायिक भूमि और आवास में डायवर्ट कर दी गई। इसके कारण शासन को करोड़ों रुपए की चपत लगी। यही हालात अब वर्तमान समय में भी बन गए हैं। जमीनों की खरीदी बिक्री पर किसी तरह की रोक नहीं लगी है। यही वजह है कि चोरहटा और उमरी सहित आसपास के गांवों में भी जमीनों की खरीद फरोख्त तेज हो गई है। डायवर्सन के भी आवेदन पहुंच रहे हैं।
पिछले 4 महीनों में तीन गुना तक पहुंच गई रजिस्ट्री
जब से हवाई अड्डा के विस्तार की घोषणा की गई है। तब से चोरहटा और उमरी में जमीनों की खरीदी बिक्री ने जोर पकड़ लिया है। दलाल सक्रिय हो गए हैं। जमीन फंसने का ठेका ले रहे हैं। मुआवजा राशि भी दिलाने का झांसा दिया जा रहा है। इसी लालच में फंस कर लोग जमीन खरीद रहे हैं। प्रशासन ने भी जमीनों की खरीदी बिक्री पर रोक नहीं लगाई है। ऐसे में जो जमीनें फंस रही हैं। उनकी खरीदी बिक्री हुई और बड़े रकबे छोटे हुए तो फिर पिछली बार की तरह की करोेड़ों रुपए अतिरिक्त मुआवजा के रूप में सरकार को वजन करना होगा।


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