रीवा बायपास के बीहर नदी पुल में गंभीर दरारें, 50 साल की उम्र वाला पुल 20 साल में ही क्षतिग्रस्त। निर्माण गुणवत्ता पर सवाल, मार्ग बंद, यातायात प्रभावित, मरम्मत में लंबा समय लगने की आशंका।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
बायपास में बीहर नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त हो गया। पुल 50 साल के लिए बना था लेकिन 20 साल भी नहीं चला। तीन गर्डर डैमेज हुए हंै। पियर कैप में 20 से 25 एमएम का कै्रक आ गया है। इसे सुधारने की प्रक्रिया अभी शुरू भी नहीं हुई है। मार्ग बंद कर दिया गया है। पुल में आई दरार ने गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षतिग्रस्त पुल तय समय सीमा में सुधरना भी मुश्किल है।
आपको बता दें कि वर्ष 2005 में रतहरा से चोरहटा बायपास का निर्माण किया गया था। इस बायपास का निर्माण पाथ इंडिया कंपनी ने कराया था। बीहर नदी पर पुल भी बनाया गया था। किसी भी नदी पर बने पुल की लाइफ 50 साल मानी जाती है लेकिन यह पुल 20 सालों में ही दम तोड़ दिया। पुल कई हिस्सों में दरार आ गई। तीन गर्डर में दरार आई है। पियर कैप क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इसके कारण मार्ग को फिलहाल बंद कर दिया गया है। एमपीआरडीसी ने हालांकि इसकी जानकारी प्रशासन को 30 मार्च को ही उपलब्ध करा दी थी। एक्शन लेने में प्रशासन ने वक्त लिया। अब अचानक से पुल के उपयोग पर रोक लगा दी गई। वाहनों को डायवर्ट किया गया है। इसके कारण चारों तरफ जाम जैसे हालात बन गए हैं। शहर भी सुरक्षित नहीं रह गया है। रात होते ही भारी वाहनों का रेला शुरू हो जाता है। यह हालात फिलहाल लंबे समय तक बने रहेंगे। 30 अप्रैल तक भले ही प्रशासन ने मार्ग डायवर्ट कर दिया है लेकिन इतने कम समय में पुल का सुधार कर पाना मुश्किल है।
पुल के क्षतिग्रस्त होने के कई कारण आ रहे सामने
20 साल पुराना पुल अचानक से क्षतिग्रस्त हो गया। इसके पीछे विशेषज्ञ कई कारण बता रहे हैं। पास ही नया पुल बन रहा है। पुल का बेस डालने के लिए पास में ही गहरी खुदाई की गई थी। इसक कारण जमीन बैठने से भी पुराने पुल में दरार आ सकता है। इसके अलावा पुल के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया जाना भी विशेषज्ञ बता रहे हैं। पुल के पियर कैप निर्माण में 20 एमएम सरिया का उपयोग 60 से 70 फीसदी होना चाहिए लेकिन इसकी जगह पर 10 एमएम का अधिक उपयोग किया जाता है। इसके कारण भी पुल क्षतिग्रस्त होना बताया जा रहा है।
तीन गार्डर को सुधारने में लगेगा लंबा समय
पुल में जो बीम का रोल अदा करता है उसे गार्डर करते हैं। इसी पर पुल की रोड डाली जाती है। यह तीन जगह पर डैमेज हुआ है। ऐसे में इसे किस तरह से सुधारा जाता है। यह अभी तय नहीं हो पाया है। वहीं पिलर पर एक स्ट्रक्चर गार्डर को सम्हालने के लिए न्बनाया जाता है। उसे पियर कैप कहते हैं। वह भी क्रैक हुआ है। अब इन कै्रक को कैसे जोड़ा जाएगा। यह एमपीआरडीसी को ही तय करना है। कैमिकल से कै्रक जोड़कर ठीक करते हैं या फिर कोई और विकल्प तलाशते हैं। यह टेंडर प्रक्रिया के बाद ही पता चलेगा। फिलहाल एमपीआरडीसी की कार्रवाई सुस्त है।


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