रीवा के गांधी स्मृति चिकित्सालय में गायनी ओटी में ऑपरेशन के दौरान आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। अधूरे ऑपरेशन में महिला को तो बचा लिया गया, लेकिन नवजात को ओटी में ही छोड़ दिया गया, जिससे वह आग में जल गया। एक्सपायरी फायर उपकरण और शॉर्ट सर्किट ने अस्पताल की गंभीर लापरवाही उजागर की है।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
गांधी स्मृति चिकित्सालय में बड़ी लापरवाही सामने आई है। गायनी ओटी में महिला का आपरेशन चल रहा था। तभी आग लग गई। आग से बचाने महिला को अधूरे आपरेशन के दौरान ही एमरजेंसी ओटी ले गए। वहीं पेट सिला गया लेकिन नवजात वहीं बार्नर में छूट गया। आग में बच्चा जल गया। जब अस्पताल की टीम आग बुझाने पहुंची तो बार्नर में बच्चा जला हुआ पड़ा था। मामले को छुपाने बच्चे को परिजनों के सुपुर्द भी नहीं किया गया। खुद ही अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी ली गई।
श्याम शाह मेडिकल कॉलेज से संबद्ध गांधी स्मृति चिकित्सालय के गायनी विभाग में रविवार की दोपहर बड़ा हादसा हो गया। इस हादसे ने अस्पताल की लापरवाही को उजागर कर दिया है। इस हादसे ने सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था की ही पोल नहीं खोली मानवता को भी शर्मशार किया है। हादसे के दौरान गर्भवती महिला को तो बचा लिया गया लेकिन नवजात को ओटी में ही जलने के लिए छोड़ दिया गया। किसी को भी नवजात को बाहर निकालने की सुध नहीं आई। जब वापस अस्पताल के कर्मचारी आग बुझाने पहुंचे तो नवजात शिशु जला हुआ बार्नर पर पड़ा था। इसके बाद मामले को दबा दिया गया। नवजात के जले शव को परिजनों के सुपुर्द भी नहीं किया गया। परिजनों को समझा बुझा शव को खुद प्रबंधन ने अपने अंडर में ले लिया।
वार्डों में भरा धुंआ, मची भगदड़, वार्ड खाली
जैसे ही ओटी में आग लगी पूरे अस्पताल में भगदड़ मच गई। चारों तरफ सिर्फ धुंआ ही धुंआ था। ओटी के ठीक ऊपर ही शिशु रोग विभाग था। यहां बच्चे भर्ती थी। सभी बच्चों को अन्यत्र शिफ्ट कराया गया। परिजन जो भी अस्पताल में थे। वह अपने मरीज को लेकर भागने लगे थे। चंद मिनटों में ही पूरा अस्पताल खाली हो गया था। आउटसोर्स कर्मचारियों ने जान जोखिम में डाल कर आग बुझाने की कोशिश की।
एमरजेंसी में खाली कराए गए थे सर्जरी के बेड
हादसे के बाद पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया था। एमरजेंसी के तौर पर एसजीएमएच के सर्जरी विभाग के 10 बेड खाली कराए गए थे। आगजनी के कारण शिशु रोग विभाग के वार्डों को भी खाली कराया गया था। वहां के मरीजों की स्थिति को देखते हुए सर्जरी विभाग के वार्डों को खाली कराया गया था।
यह सब कुछ ओटी में जल गया, करोड़ों का हुआ नुकसान
गायनी ओटी में आपरेटिंग टेबिल, एनेस्थीसिया मशीन, मॉनीटरिंग उपकरण जैसे ईसीजी, पल्स आॅक्सीमीटर जैसे कई आपरेशन के उपकरण जल गए। करोड़ों रुपए का नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है। अब गायनी विभाग की सभी ओटी एमरजेंसी और सर्जरी विभाग की ओटी में की जाएगी।
12.45 बजे लगी आग, डेढ़ घंटे बुझाने में लगे
जीएमएच के गायनी की ओटी में दोपहर करीब 12.45 बजे आग लगी। शार्ट सर्किट से लगी आग ने चंद मिनटों में ऐसा विकराल रूप धारण किया कि पूरी ओटी ही धधकने लगी। इसकी जानकारी तुरंत फायर ब्रिगेड को दी गई। नगर निगम से पहले दो गाड़ियां पहुंची। इसके बाद दो गाड़ियां और पहुंचीं। डेढ़ घंटे तक आग पर काबू पाने में कर्मचारियों ने पसीना बहाया।
सारे अग्निशमन यंत्र थे एक्सपायरी
जीएमएच प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई। अस्पताल में जितने भी अग्निशमन यंत्र लगे थे। सभी एक्सपायरी डेट के थे। उन्हें रिफिल कराया ही नहीं गया था। सितंबर में ही सभी अग्निशमन यंत्र एक्सपायरी हो गए थे। अब तक कई अस्पतालों में हादसे हो गए। बार-बार फायर सेफ्टी को लेकर अलर्ट जारी किया जाता है। इसके बाद भी इस तरह की लापरवाही ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्क्रब रूम से भड़की आग
ओटी रूम में स्क्रब रूम से आग भड़की। स्क्रब रूम की हालत पहले से ही खराब थी। यहां पर तार कटे फटे थे। कभी केबिलें बदली नहीं गई। यही केबिल आगजनी का कारण बनी। स्क्रब रूम में डॉक्टर और स्टाफ कपड़े चेंज करते हैं। हाथ वगैरह धोते हैं। इसके बाद ही ओटी में प्रवेश करते हैं। इसी जगह पर शार्ट सर्किट से आग भड़की और पूरी ओटी ही तबाह कर दी।
सिर्फ 4 फीसदी हीमोग्लोबिन था
आगजनी के दौरान जिस महिला का आपरेशन चल रहा था उसका नाम कंचन साकेत पति रामसखा बताया जा रहा है। वह जिला सतना ग्राम धनुआ अहिरगांव की रहने वाली है। महिला को गंभीर हालत में जीएमएच के गायनी विभाग में भर्ती किया गया था। इसी महिला का ओटी में आपरेशन चल रहा था। इसी दौरान ही हादसा हुआ। महिला के पेट में ही बच्चे की मौत हो गई थी। बच्चा मरा हुआ पैदा हुआ। इसी की वजह से बच्चे को साथ ले जाने की किसी ने जेहमत नहीं उठाई।
आॅक्सीजन सिलेंडर होने वाला था ब्लास्ट
जिस दौरान ओटी में आग लगी। ओटी कक्ष में दो आक्सीजन सिलेंडर भी रखे थे। महिला को तो हटा लिया गया लेकिन ओटी कक्ष में लगी आग के बीच सिलेंडर तप रहे थे। सिर्फ पांच मिनट की और देरी होती तो पूरा अस्पताल ही सिलेंडर ब्लास्ट में उड़ जाता। गनीमत रही कि मौके पर स्टाफ पहुंचा और सिलेंडर को बाहर निकालने में सफल रहा।
मामले में जानकारी ली गई है। बताया गया है कि महिला हाई रिस्क जोन में थी। पेट में ही बच्चे की मौत हो गई थी। इसके बाद ही हादसा हुआ। मामले की जांच कराई जाएगी।
बीएस जामोद, कमिश्नर, रीवा संभाग
प्रारंभिक रूप से पता चला है कि शार्ट सर्किट से आग लगी है। हमारे पास प्रारंभिक एनओसी है। हमारे यहां से बांकी एनओसी के लिए अप्लाई किया गया। ओटी के अंदर धुंआ हुआ है। कोई जला वगैरह नहीं है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। यह एक हादसा है। पता करेंगे किस लेबल का हादसा है।
डॉ सुनील अग्रवाल, डीन, श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा

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