रीवा-इतवारी एक्सप्रेस की एसी बोगियों में यात्रियों को गंदे तकिये और चादर दिए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। मरीजों व उनके परिजन संक्रमण के खतरे से चिंतित हैं। रेलवे की यह लापरवाही स्वास्थ्य और स्वच्छता दोनों के लिए गंभीर सवाल खड़े करती है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
यात्रियों को बेहतर सुविधाएं देने के दावे करने वाला भारतीय रेलवे एक बार फिर सवालों के घेरे में है। रीवा-इतवारी एक्सप्रेस की एसी बोगियों में इन दिनों यात्रियों को गंदे चादर और तकिये मुहैया कराए जाने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। इससे न केवल मुसाफिरों में नाराजगी है, बल्कि स्वास्थ्य को लेकर भी गंभीर चिंता जताई जा रही है, खासकर उन मरीजों के लिए जो इस ट्रेन से नागपुर जैसे चिकित्सा केंद्रों तक का सफर करते हैं। रीेवा-इतवारी एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन में बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी, विशेषकर स्वच्छता के मुद्दे पर, यात्रियों के लिए चिंता का विषय है। रेलवे को जल्द से जल्द इस दिशा में कदम उठाते हुए यात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित यात्रा का भरोसा दिलाना होगा।
मरीजों के परिजन फिक्रमंद
यह ट्रेन विंध्य क्षेत्र के मरीजों के लिए जीवन रेखा मानी जाती है, क्योंकि नागपुर में अत्याधुनिक अस्पताल और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता है। हर दिन कई मरीज व उनके परिजन इस ट्रेन से सफर करते हैं, जिनके लिए सफर के दौरान स्वच्छता और आराम अनिवार्य है। परंतु, रेलवे की लापरवाही अब इन यात्राओं को अस्वस्थ और कष्टप्रद बना रही है। हाल ही में सतना से नागपुर तक यात्रा करने वाले एक यात्री अनंत ने बताया कि मैंने जब एसी कोच में चढ़कर चादर ली तो उसमें से बदबू आ रही थी और तकिया पूरी तरह से दागदार था। जब मैंने मौके पर रेल स्टाफ से इसकी शिकायत की तो उन्होंने सिर्फ कंधे उचका दिए। अनंत की यह शिकायत अकेली नहीं है। कई यात्रियों ने इसी तरह के अनुभव साझा किए हैं। एक यात्री ने बताया कि वह अपने पिता के इलाज के लिए रीवा से नागपुर जा रहा था ं। पिताजी पहले से ही बीमार हैं, और हमें इस बात की चिंता थी कि गंदे तकिए और चादर से उन्हें संक्रमण न हो जाए। हमने खुद की चादर का इस्तेमाल करना बेहतर समझा। ऐसी लापरवाही बीमार यात्रियों के लिए घातक हो सकती है। नाराज यात्रियों ने कहा कि स्वच्छता केवल सुविधा नहीं, जरूरत है , खासकर जब हम बीमार मरीजों के साथ यात्रा कर रहे हों। रेलवे को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए।
यात्रियों ने कहा-व्यवस्था दुरुस्त करे रेलवे
इतवारी एक्सप्रेस जैसी लंबी दूरी की ट्रेनों में साफ-सुथरी लिनेन (चादर, तकिया, कंबल) यात्रियों को देना रेलवे की जिम्मेदारी है। लेकिन वर्तमान स्थिति देख कर लगता है कि इन नियमों का पालन केवल कागजों तक ही सीमित है। रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार, एसी बोगियों में प्रत्येक यात्रा के बाद लिनेन की धुलाई और स्वच्छता सुनिश्चित की जानी चाहिए। मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। यात्रियों का कहना है कि कई बार उपयोग किए हुए चादर व तकिये अगली यात्रा में भी बिना साफ किए दे दिए जाते हैं। यात्रियों ने मांग की है कि संबंधित ट्रेन में सफाई कर्मचारियों की तैनाती हो, लिनेन की गुणवत्ता की जांच हो और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

आहत जनता को राहत...निचले स्तर पर आई थोक महंगाई

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
भोपाल में मॉडल और एक्ट्रेस ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में कोर्ट ने पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. जानिए कोर्ट में दोनों पक्षों के वकीलों ने क्या दलीलें दीं.
मध्यप्रदेश में सरकारी भर्ती परीक्षाओं के लिए वन टाइम फीस (OTF) लागू करने की मांग को लेकर युवा कांग्रेस 17 जून से ग्वालियर से 'रन फॉर ओटीएफ' आंदोलन शुरू करने जा रही है। जानिए क्या है राजस्थान मॉडल और क्यों उठ रही है यह मांग।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में स्वास्थ्य विभाग और सेवांकुर भारत के बीच 5 वर्षीय MOU हुआ। इसका उद्देश्य प्रदेश को सेवा-प्रधान स्वास्थ्य नेतृत्व का मॉडल राज्य बनाना और समाज के प्रति समर्पित डॉक्टरों की नई पीढ़ी तैयार करना है।
मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के 20 जिलों की 5254 ग्राम पंचायतों में कार्यरत करीब 5000 पेसा मोबिलाइजर्स की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं। जानिए क्या है इसकी वजह।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज यानी सोमवार को निगम-मंडलों के नवनियुक्त पदाधिकारियों के उन्मुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम का अटल बिहारी वाजपेई सुशासन संस्थान में दीप-प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस विशेष प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पदाधिकारियों को उनके प्रशासनिक दायित्वों, वित्तीय प्रबंधन और शासन की नीतियों के प्रति मार्गदर्शन प्रदान करना था।
उत्तर भारत में इन दिनों गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है। देश के कई राज्य भीषण गर्मी से तप रहे हैं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा से लेकर राजस्थान और महाराष्ट्र के कई जिलों में लोगों का गर्मी से बुरा हाल रहा। यूपी का बांदा 46.7 के साथ और एमपी का राजगढ़ जिला 45 डिग्री के साथ सबसे गर्म शहर रहा।
भोजशाला मामले में MP के पूर्व CM दिग्विजय सिंह ने हाईकोर्ट के फैसले को अस्पष्ट बताते हुए कहा कि ASI को मंदिर के सबूत नहीं मिले। वहीं भोज उत्सव समिति ने दिग्विजय सरकार पर पूजा प्रतिबंधित करने का आरोप लगाया है। पढ़ें पूरी खबर।
भोपाल में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा सुसाइड केस में नया मोड़। मायके वालों ने शव लेने से किया इनकार, दिल्ली AIIMS में दोबारा पोस्टमार्टम की मांग को लेकर सीएम हाउस के सामने किया प्रदर्शन।
मध्यप्रदेश के ग्वालियर जिले के डबरा के जंगीपुरा रोड स्थित मदरसा रोड पर देर रात एक इलेक्ट्रॉनिक दुकान और मकान में भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि दुकान में रखे इलेक्ट्रॉनिक सामान और एसी रिपेयरिंग के सिलेंडरों में धमाके होने लगे। धमाकों से पूरे इलाके में दहशत फैल गई।
मध्य प्रदेश की मोहन सरकार ने प्रदेश के अफसर और कर्मचारियों के अवकाश नियमों में बड़ा बदलाव किया है। दरअसल, वित्त विभाग द्वारा मप्र सिविल सेवा अवकाश नियम 2025 के तहत अवकाश मंजूरी के अधिकारों को विभाजित कर दिया है।