रीवा और मऊगंज जिलों की 149 स्कूलों को पूरी या आंशिक रूप से जमींदोज किया जाएगा, जबकि 439 स्कूलों की हालत मरम्मत योग्य बताई गई है। ये भवन पंचायतों द्वारा 2005–2008 में बनवाए गए थे, लेकिन घटिया निर्माण के चलते 20 साल भी नहीं टिक पाए। अब छात्र जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

हाईलाइट्स
रीवा, स्टार समाचार वेब
रीवा और मऊगंज जिला की 149 स्कूलें जर्जर हैं। इनमें से 77 पूरी तरह से जमींदोज की जाएंगी। शेष 72 स्कूलों का जर्जर हिस्सा जमींदोज होगा। इसके अलावा 439 स्कूलें ऐसी हैं, जिन्हें मरम्मत की दरकार है। इन स्कूलों के मरम्मत का प्रस्ताव केन्द्र के पास भेज दिया गया है। केन्द्र से बजट आने के बाद ही सुधार हो पाएगा।
आपको बता दें की शासन के निर्देश पर रीवा और मऊगंज की जर्जर स्कूलों की लिस्ट तैयार की गई थी। इनमें उन स्कूलों को चिन्हित किया गया था। जो गिराने योग्य थी। ऐसी स्कूलों की संख्या काफी लंबी है। वैसे तो अधिकांश स्कूलें ही बच्चों के बैठने लायक नहीं है। इन स्कूलों पर सालों से मरम्मत के नाम पर एक रुपए भी खर्च नहीं किए गए। जो स्कूलें गिरनी हैं, उनकी गुणवत्ता ही खराब थी। इन भवनों का निर्माण पंचायतों ने कराया था। काम इतना घटिया हुआ कि 20 साल भी स्कूल भवनें टिक नहीं पाई। अब 77 स्कूलें पूरी तरह से मिट्टी में मिल जाएंगी। वहीं 72 स्कूलों का जर्जर हिस्सा धराशाई किया जाएगा। यह संख्या हालांकि यहीं पर नहीं रुकती। खराब स्कूलों की जब डाइस कोड में जानकारी मांग गई तो रीवा और मऊगंज से 439 स्कूलें निकल कर सामने आई हैं। यह भी बैठने लायक नहीं है। भवन जर्जर तो नहीं है लेकिन उपयोग लायक भी नहीं रह गई हैं। इन्हें मरम्मत की दरकार है। जिला शिक्षा केन्द्र से इन जर्जर भवनों की जानकारी मप्र शासन के माध्यम से केन्द्र सरकार के पास भेज दी गई है। अब केन्द्र से बजट मिलने के बाद ही इनका सुधार कार्य किया जाएगा। तब तक यूं ही छात्र खुद को रिस्क लेकर ही शिक्षा अर्जित करेंगे।
20 साल भी नहीं टिक पाई स्कूल बिल्डिंग
हद तो यह है कि प्रायमरी और माध्यमिक स्कूल भवनों के निर्माण में लाखों रुपए खर्च किए गए। ग्राम पंचायतें निर्माण एजेंसियां थी। स्कूलों के निर्माण में इतनी गड़बड़ी की गई कि अब वज गिराने लायक हो गई है। दो जिलों की 77 स्कूल भवनें पूरी तरह से जर्जर हो गई हैं। वहीं 72 स्कूलों का कुछ हिस्सा जर्जर हालत हैं। यानि कुल 149 स्कूलों को धरसाई करने की तैयारी है। इन स्कूलों का निर्माण पंचायतों ने 2005 से 2008 के बीच में कराया था। इन स्कूलों का निर्माण पंचायतों ने घटिया कराया लेकिन इंजीनियरों ने निरीक्षण नहीं किया। जिला शिक्षा केद्र को हैंडओव्हर कर दी गई। अब इसी की सजा छात्रों को भुगतानी पड़ रही है।
जिपं सीईओ के पास भेजी गई है फाइल
जर्जर स्कूलों को चिन्हित कर लिया गया है। सभी की लिस्ट बनाकर कलेक्टर के पास भेज दिया गया था। कलेक्टर कार्यालय से फाइल सीईओ जिला पंचायत के पास गई है। उनके अनुमोदन के बाद जर्जर भवनों को तोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी। इन भवनों को ग्राम पंचायत ही जमींदोज करेंगे। सीईओ के अनुमोदन के बाद यह जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायतों को ही दे दी जाएगी।
77 स्कूलों के छात्र दूसरे विभागों के भवन में किए गए शिफ्ट
रीवा और मऊगंज जिला की 77 स्कूलें गिरने की कगार पर हैं। इन स्कूलों को खाली करा दिया गया है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों को किसी दूसरे भवन में शिफ्ट किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के पास दूसरा भवन नहीं था। ऐसे में इन छात्रों को महिला बाल विकास विभाग, जल संसाधन विभाग, राजस्व विभाग के भवनों में शिफ्ट किया गया है। जब शासन से नए भवन के निर्माण का बजट आएगा। इसके बाद ही यह छात्र अपने स्कूल के भवन में शिफ्ट हो पाएंगे।
सभी स्कूलें ग्राम पंचायतों ने बनाई, अब संचालन लायक नहीं
जितनी भी स्कूलें जर्जर हालत में हैं। इनकी निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायतें ही थी। पालक शिक्षक संघ से स्कूल निर्माण का अनुमोदन होने के बाद निर्माण की जिम्मेदारी पंचायतों को दी गई थी। पंचायतों ने इतना घटिया काम किया कि अब सरकारी स्कूलें बैठने लगाक नहीं रह गई हैं। कहीं स्कूलों की फर्श उधड़ गई है तो कहीं दीवार से पानी टपक रहा है। कहीं दीवार में दरार आ गई है। ऐसे रीवा और मऊगंज में 439 स्कूलें हैं। जिनकी हालत बदतर हो गई है। इन्हें मरम्मत की दरकार है।

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