रीवा के कुसमैदा घाट पर टमस नदी में अवैध रेत उत्खनन से पर्यावरण और जलस्तर पर संकट गहराया है। ग्रामीणों ने नवागत कलेक्टर से निष्पक्ष जांच, सख्त कार्रवाई और नदी संरक्षण की मांग की है।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
नदियां सिर्फ पानी का बहाव नहीं होतीं, वे किसी भी क्षेत्र की सभ्यता, संस्कृति और जीवन रेखा होती हैं। लेकिन जब रक्षक ही मौन हो जाएं, तो ये जीवनदायिनी खुद अपनी जिंदगी की भीख मांगने लगती हैं। कुछ ऐसा ही दर्द इन दिनों रीवा जिले के जवा तहसील अंतर्गत आने वाले ग्राम कुसमैदा में टमस नदी झेल रही है। टमस नदी का सीना हर दिन अवैध उत्खनन से छलनी किया जा रहा है और प्रशासनिक अमला गहरी नींद में सोया हुआ है।
दिन के उजाले में जो नदी शांत और गंभीर दिखती है, रात ढलते ही वहां की तस्वीरें डरावनी हो जाती हैं। ग्रामीणों के मुताबिक जैसे ही सूरज ढलता है, टमस नदी के कुसमैदा घाट पर ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट गूंजने लगती है। अंधेरे का फायदा उठाकर रेत माफिया सैकड़ों ट्रैक्टरों से बालू का अवैध उत्खनन और परिवहन शुरू कर देते हैं। सुबह की पहली किरण पड़ने तक नदी के आंचल से भारी मात्रा में रेत गायब हो चुकी होती है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह सब कुछ खुलेआम हो रहा है, लेकिन खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन को जैसे कुछ दिखाई ही नहीं देता। बिना किसी रसूख और संरक्षण के प्रतिदिन इतना बड़ा खेल होना मुमकिन ही नहीं है।
एक तरफ सरकार नदियों और जल स्रोतों को बचाने के लिए करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा रही है, तो दूसरी तरफ कुसमैदा में माफिया खुलेआम टमस नदी का वजूद मिटाने पर तुले हैं। बेतहाशा रेत निकालने से नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है। रेत का यह अवैध धंधा पर्यावरण को ऐसे जख्म दे रहा है, जिनकी भरपाई नामुमकिन है नदी में रेत कम होने से पानी रोकने की क्षमता खत्म हो रही है। वहीं आसपास के गांवों का वाटर लेवल लगातार नीचे जाने के साथ नदी के किनारे धंस रहे हैं, जिससे किसानों की जमीनों पर संकट मंडरा रहा है। प्रकृति के साथ हो रहे इस खिलवाड़ के साथ-साथ शासन को भी हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का चूना लगाया जा रहा है। बिना रॉयल्टी और बिना अनुमति के रेत की यह चोरी सीधे सरकारी खजाने पर डाका है।
नवागत कलेक्टर से उम्मीद की किरण
इस अंधकार के बीच जिले में नए कलेक्टर के आगमन ने ग्रामीणों और पर्यावरण प्रेमियों के दिलों में उम्मीद का एक दीया जलाया है। क्षेत्र के लोगों को विश्वास है कि नए मुखिया के रहते माफियाओं की मनमानी ज्यादा दिन नहीं चलेगी। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि कुसमैदा क्षेत्र में चल रहे अवैध उत्खनन की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच हो। नदी घाटों का औचक निरीक्षण कर हकीकत देखी जाए। इस अवैध कारोबार में शामिल सफेदपोशों और अधिकारियों की भूमिका उजागर कर कठोर कार्रवाई की जाए।
कब टूटेगी प्रशासन की चुप्पी
टमस नदी का यह दर्द सिर्फ एक नदी का नहीं, बल्कि उस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का है जो इस पर निर्भर है। ग्रामीणों ने अपनी बात प्रशासन के सामने रख दी है। अब देखना यह है कि टमस नदी को रेत माफियाओं के चंगुल से छुड़ाने के लिए नवागत कलेक्टर कितनी सख्ती दिखाते हैं। क्या टमस को उसका पुराना स्वरूप वापस मिलेगा या वह माफियाओं के लालच की भेंट चढ़ जाएगी यह सवाल फिलहाल हवा में तैर रहा है।


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