मझगवां और सरभंगा जंगलों में बाघों की मजबूत मौजूदगी के बीच कंजर्वेशन रिजर्व को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सरभंगा में बाघ होने के बावजूद प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
यूं तो मझगवां के जंगलों में बाघों की फुल फैमिली है। वह यदा-कदा नहीं आसानी से दिख जाते हैं। एक बार फिर बाघ की चहलकदमी देखने में आई जिसके बाद से सरभंगा कंजर्वेशन रिजर्व की मांग को बल मिलता दिख रहा है। जानकारी के मुताबिक सरभंग मुनि आश्रम के सीसीटीवी कैमरे में बुधवार की रात 9 बजे कैद हुआ है। इसके बाद यह गुरूवार को वायरल हुआ। इसके बाद से सरभंगा कंजर्वेशन रिजर्व की मुहिम सामने आने लगी।
पन्ना के कल्दा के लिए
सरभंगा को अभ्यारण्य या कंजर्वेशन रिजर्व बनाने की प्रक्रिया जनप्रतिनिधियों की सहमति न मिलने से आगे नहीं बढ़ सकी। वहीं पन्ना के कल्दा वनक्षेत्र से जुड़ी उचेहरा की परसमनिया पहाड़ी को मिलाकर मां शारदा कंजर्वेशन रिजर्व को आगे बढ़ाया जा रहा है। वन विभाग का दावा है कि इससे बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व और पन्ना के बीच वन्यजीवों के आवागमन का वैकल्पिक मार्ग बनेगा, साथ ही जैव विविधता संरक्षण और केंद्र-राज्य से वित्तीय सहायता के अवसर भी मिलेंगे।
मैहर से मजबूत सतना
सतना वन मंडल की मझगवां रेंज 18 से 20 दिसंबर 2025 के बीच हुए सर्वे में बाघ के 21, तेंदुए के 76, भालू के 63 और हाइना के 7 बीटों में अप्रत्यक्ष साक्ष्य दर्ज किए गए। वहीं मैहर रेंज में 21 से 23 दिसंबर 2025 तक हुए प्रत्यक्ष दर्शन हुए। तीन दिनों में सांभर 9, नीलगाय 11, चीतल 2, बार्किंग डियर 3, जंगली सूअर 9, मोर 9, लंगूर 3 और सेही 1 बीट में दर्ज किए गए।
तीस से भी अधिक बाघ
सरभंगा वनक्षेत्र बाघों की मजबूत मौजूदगी के लिए जाना जाता है। वन विभाग के आंकलन के अनुसार यहां 30 से अधिक बाघ सक्रिय हैं। इसके बावजूद सरभंगा को कंजर्वेशन रिजर्व घोषित करने का प्रस्ताव अब तक स्वीकृत नहीं हो पाया है। इसके अलावा मां शारदा कंजर्वेशन रिजर्व बनाने का भी प्रस्ताव बनाया जा चुका है। यह वो एरिया है जहां बाघ तो इक्का दुक्का है लेकिन अन्य वन्य प्राणी की संख्या ठीक-ठाक है।
दोनों कन्जर्वेशन रिजर्व केन बेतवा प्रोजेक्ट को लेकर तैयार करने के प्रस्ताव है। यह वन्य प्राणियों के लिए माइग्रेशन के समय हैबिटाट तैयार करने के लिए है। फिलहाल कोई अपटेड नहीं है। जैसे ही आएगा आप से बात करेंगे।
मयंक चांदीवाल, वनमंडलाधिकारी, सतना

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