सतना में 3600 एकड़ कृषि भूमि डालमिया सीमेंट को लीज पर देने के प्रस्ताव पर प्रशासन और किसान नेताओं की बैठक हुई। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि किसानों की सहमति बिना जमीन नहीं दी जाएगी और प्रक्रिया भू-अधिग्रहण कानून 2013 के तहत होगी।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
रामपुर बघेलान और अमरपाटन क्षेत्र की लगभग 3600 एकड़ कृषि भूमि को डालमिया सीमेंट (भारत) को 40 वर्ष की लीज पर देने के प्रस्ताव को लेकर चल रहे विवाद के बीच गुरुवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में प्रशासन और किसान नेताओं के बीच महत्वपूर्ण बैठक हुई।
बैठक में जिला कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस, अपर कलेक्टर विकास सिंह और जिला खनिज अधिकारी एच.पी. सिंह ने किसान प्रतिनिधियों के साथ विस्तार से चर्चा की और उनकी शंकाओं का समाधान किया। यह बैठक 10 मार्च को भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) द्वारा कलेक्ट्रेट पर किए गए प्रदर्शन के बाद हुई, जिसमें प्रशासन की ओर से 12 मार्च को द्विपक्षीय वार्ता कराने का आश्वासन दिया गया था।
उसी के तहत दोपहर करीब 2 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में यह बैठक आयोजित की गई। बैठक में भारतीय किसान यूनियन की ओर से प्रदेश अध्यक्ष जगदीश सिंह, प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष महेंद्र सिंह, संगठन मंत्री द्वारिका प्रसाद तिवारी, प्रदेश प्रवक्ता दिलीप सिंह, जिलाध्यक्ष इन्द्रजीत पाठक, जिला उपाध्यक्ष चिंतामणि कुशवाह, युवा जिलाध्यक्ष संतोष सिंह, रामपुर ब्लॉक अध्यक्ष सुखदेव सिंह, संभाग सचिव राजेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में किसान प्रतिनिधि मौजूद रहे।
जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलेगा प्रतिनिधि मंडल
भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारियों ने बताया कि इस मुद्दे को लेकर संगठन का प्रतिनिधि मंडल जल्द ही प्रदेश के मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री से भी मुलाकात करेगा, ताकि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान निकाला जा सके। गौरतलब है कि रामपुर बघेलान और अमरपाटन क्षेत्र के पगरा, झिरिया, जमुना, बैरिहा, पटरहाई, जनार्दनपुर, बिगौड़ी, सन्नेही और शिगटी सहित कई गांवों की करीब 3600 एकड़ कृषि भूमि को डालमिया सीमेंट को लीज पर देने के प्रस्ताव को लेकर पिछले एक महीने से किसान पंचायतों, धरना-प्रदर्शनों और रैलियों के माध्यम से विरोध दर्ज करा रहे हैं। फिलहाल कलेक्ट्रेट में हुई इस वार्ता के बाद किसानों को प्रशासन से सकारात्मक संकेत मिले हैं, हालांकि इस पूरे मामले पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
वार्षिक प्रतिकर किसानों के हितों के खिलाफ
बैठक के दौरान किसान नेताओं ने प्रशासन के सामने स्पष्ट रूप से कहा कि 2016 के नियमों के तहत वार्षिक प्रतिकर पर जमीन देने की प्रक्रिया किसानों के हितों के खिलाफ है और इससे हजारों किसानों की आजीविका प्रभावित होगी। किसान प्रतिनिधियों ने यह भी कहा कि यदि भूमि ली ही जाती है तो वह भू-अधिग्रहण कानून 2013 के प्रावधानों के तहत ही होनी चाहिए, जिसमें बाजार मूल्य के चार गुना मुआवजे का प्रावधान है। किसानों ने यह भी सवाल उठाया कि 40 वर्ष की लीज और खनन गतिविधियों के बाद भूमि की वास्तविक स्थिति क्या होगी और क्या उसे फिर से खेती योग्य बनाया जा सकेगा।
भू-अधिग्रहण कानून 2013 के तहत जनसुनवाई
जिला कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने बैठक में कहा कि किसानों की सहमति के बिना 2016 के नियमों के तहत वार्षिक प्रतिकर पर जमीन नहीं दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया होती है तो वह भू-अधिग्रहण कानून 2013 के तहत जनसुनवाई और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही की जाएगी। कलेक्टर ने यह भी आश्वस्त किया कि प्रशासन किसानों के हितों की पूरी तरह रक्षा करेगा और उनके साथ किसी प्रकार की अन्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं होने दी जाएगी।
वार्ता से संतुष्ट दिखे किसान प्रतिनिधि
बैठक के बाद किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रशासन द्वारा किसानों की बात गंभीरता से सुनी गई है और उनकी शंकाओं का समाधान करने का प्रयास किया गया है।


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