मैहर कलेक्टर कार्यालय में कर्मचारियों की कमी दूर करने सतना से तीन लिपिक भेजे गए। मूल पदस्थापना सतना में रखते हुए अंतर-जिला कार्य व्यवस्था के अधिकार और नियमों को लेकर प्रशासनिक सवाल उठ रहे हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
मैहर कलेक्टर कार्यालय में लिपिकीय कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए सतना कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ तीन कर्मचारियों को मैहर भेजने का रीवा संभागायुक्त कार्यालय का आदेश प्रशासनिक अधिकार और स्थानांतरण व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रहा है। 18 सितंबर 2026 को जारी आदेश के तहत सहायक वर्ग-2 सुनील निगम तथा सहायक वर्ग-3 अनिल रजक और मिथिलेश कुमार यादव को ‘आगामी आदेश तक अस्थाई रूप से कलेक्टर कार्यालय जिला मैहर में कार्य करने’ के लिए आदेशित किया गया है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारियों की मूल पदस्थापना, वरिष्ठता और वेतन व्यवस्था सतना में ही रहेगी। यानी कागज पर कर्मचारी सतना के और काम मैहर में। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसे स्थानांतरण नहीं माना जा रहा है तो फिर एक जिले के कर्मचारियों को दूसरे जिले में कार्य करने के लिए भेजने का अधिकार किस नियम के तहत प्रयोग किया गया?
मैहर कलेक्टर की मांग पर संभागायुक्त ने दिया आदेश
आदेश के अनुसार मैहर कलेक्टर ने 10 अगस्त 2026 को पत्र भेजकर मैहर कलेक्टर कार्यालय में लिपिकीय संवर्ग के कर्मचारियों की कमी को देखते हुए सतना कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ लिपिकीय कर्मचारियों की सेवाएं उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद रीवा संभागायुक्त कार्यालय ने प्रशासकीय कार्यसुविधा और शासकीय कार्य के सुचारू संचालन का हवाला देते हुए तीन कर्मचारियों को मैहर में काम करने के लिए भेज दिया। लेकिन आदेश में उस नियम, शासनादेश अथवा प्रत्यायोजित अधिकार का उल्लेख नहीं है, जिसके आधार पर संभागायुक्त को सतना में पदस्थ कर्मचारियों को मैहर में कार्य कराने की शक्ति प्राप्त होती है।
स्थानांतरण नीति में प्रभारी मंत्री की भूमिका स्पष्ट
मध्यप्रदेश की स्थानांतरण नीति में जिला संवर्ग के कर्मचारियों तथा राज्य संवर्ग के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के भीतर स्थानांतरण के लिए जिला कलेक्टर के माध्यम से प्रभारी मंत्री के अनुमोदन की व्यवस्था है। स्थानांतरण आदेश विभागीय जिला अधिकारी के स्तर से जारी किए जाने का भी प्रावधान है। 2026 की नीति को लेकर सरकार के आधिकारिक विवरण में भी जिला एवं राज्य संवर्ग के तृतीय-चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के जिले के भीतर स्थानांतरण में प्रभारी मंत्री के अनुमोदन की व्यवस्था बताई गई है।
सरकार ने नकारी नहीं अंतर-जिला कार्य व्यवस्था
मध्यप्रदेश विधानसभा में सरकार के पूर्व उत्तरों से यह सामने आया है कि प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर कर्मचारियों को एक जिले से दूसरे जिले में कार्य करने के लिए भेजे जाने की व्यवस्था व्यवहार में रही है। लेकिन इससे यह स्वत: सिद्ध नहीं होता कि हर संभागायुक्त को प्रत्येक जिला संवर्ग के कर्मचारी को दूसरे जिले में भेजने का अधिकार प्राप्त है। यही अंतर इस मामले को महत्वपूर्ण बनाता है।
तो क्या प्रभारी मंत्री या शासन की स्वीकृति आवश्यक नहीं ?
यहीं से इस मामले में एक और सवाल पैदा होता है—क्या इन तीन कर्मचारियों को सतना से मैहर भेजने की प्रक्रिया में जिला स्तर पर प्रभारी मंत्री की कोई भूमिका थी? यदि नहीं, तो इसका आधार क्या है? और यदि प्रभारी मंत्री की स्वीकृति आवश्यक नहीं थी, तो किस नियम के तहत यह अंतर-जिला व्यवस्था की गई? हालांकि यह भी महत्वपूर्ण है कि सतना से मैहर की व्यवस्था अंतर-जिला है, इसलिए जिले के भीतर स्थानांतरण पर लागू प्रभारी मंत्री की स्वीकृति वाले प्रावधान को सीधे इस आदेश पर लागू मान लेना भी उचित नहीं होगा। असली मुद्दा यह है कि इस तरह की अंतर-जिला अस्थायी कार्य व्यवस्था के लिए अलग से कौन-सा सक्षम प्राधिकारी निर्धारित है।
स्थानांतरण प्रतिबंध के बाद सितंबर में आदेश क्यों?
एक और सवाल आदेश की तारीख को लेकर है। सामान्य स्थानांतरण नीति में निर्धारित अवधि के बाहर स्थानांतरण पर प्रतिबंध रहता है और विशेष परिस्थितियों में अलग प्रक्रिया का प्रावधान होता है। ?18 सितंबर का यह आदेश इसलिए और महत्वपूर्ण हो जाता है कि इसे स्थानांतरण न बताकर ‘अस्थाई रूप से कार्य करने’ का आदेश कहा गया है। यदि यह वास्तव में स्थानांतरण नहीं है तो फिर इस व्यवस्था का विधिक स्वरूप क्या है कि संलग्नीकरण, प्रतिनियुक्ति, अस्थायी कार्य व्यवस्था या कोई अन्य प्रशासनिक व्यवस्था?
सवाल सिर्फ तीन कर्मचारियों का नहीं, अधिकार-सीमा का
मामला सुनील निगम, अनिल रजक और मिथिलेश कुमार यादव तक सीमित नहीं है। यदि संभागायुक्त को ऐसे मामलों में अंतर-जिला अस्थायी कार्य व्यवस्था करने का अधिकार है तो संबंधित शासनादेश या प्रत्यायोजन आदेश सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि ऐसा कोई स्पष्ट अधिकार है, तो यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वह अधिकार किस संवर्ग के कर्मचारियों पर और कितनी अवधि तक लागू होता है। वहीं यदि इसे स्थानांतरण नहीं माना जा रहा है तो कर्मचारियों की मूल पदस्थापना सतना में रखते हुए उन्हें अनिश्चित अवधि तक दूसरे जिले में काम कराने की सीमा भी स्पष्ट होनी चाहिए।
आदेश को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं
सबसे बड़ा सवाल यही है कि सतना के जिला संवर्ग के कर्मचारियों की सेवा मैहर को उपलब्ध कराने का फैसला किस वैधानिक अधिकार के तहत हुआ? और इस प्रक्रिया में जिला प्रभारी मंत्री की भूमिका को क्यों नकारा गया? क्या स्थानांतरण के पूर्व प्रभारी मंत्री की अनुमति ली गई? प्रशासन यदि यह स्पष्ट कर दे कि किस नियम के तहत संभागायुक्त को यह अधिकार मिला है, तो उठ रहे सवालों का समाधान हो सकता है। फिलहाल आदेश में अधिकार का वह आधार दर्ज नहीं होने से प्रशासनिक हलकों में इस आदेश को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

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