सतना वन विभाग की रेस्क्यू सम्मान सूची में उस व्यक्ति को चुना गया है जिसे शायद ही किसी ने रेस्क्यू करते देखा हो, जबकि असली रेस्क्यू टीम के नाम नदारद हैं। क्या यह सिफारिश और रसूख का खेल है? पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
वन विभाग द्वारा घोषित वन्य प्राणी रेस्क्यू सम्मान की सूची को लेकर इस समय भारी विवाद और असंतोष की स्थिति बन गई है। खासकर सतना जिले में इस सम्मान की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जिले की रेस्क्यू टीम के असली योद्धाओं को पूरी तरह नजरअंदाज कर, ऐसे व्यक्ति को सम्मानित करने का फैसला किया गया है, जिसका रेस्क्यू आॅपरेशनों से नाम-मात्र का जुड़ाव रहा है।
सवालों के घेरे में रामसुरेश का चयन
मप्र टाइगर फाउंडेशन समिति कार्यालय प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय द्वारा जारी सूची में टाइगर फाउंडेशन समिति के सचिव शुभरंजन सेन ने जानकारी दी हैं कि सतना के नागौद रेंज में पदस्थ वन रक्षक रामसुरेश वर्मा और पन्ना से रामलाल प्रजापति के नाम को वन्य प्राणी रेस्क्यू सम्मान के लिए चयनित किया गया है। इस मामले में विभागीय सूत्रों का दावा है कि रामसुरेश वर्मा शायद ही कभी किसी वन्य प्राणी रेस्क्यू आॅपरेशन का हिस्सा बने हों। मौजूदा समय पर नागौद रेंज में पदस्थ रामसुरेश की तैनाती अक्सर विभाग के न्यायालयीन कामों में रहती है। न तो उन्होंने टाइगर रेस्क्यू में कोई भूमिका निभाई है और न ही सांप, तेंदुआ या भालू जैसे खतरनाक प्राणियों की घटनाओं में उनकी मौजूदगी देखी गई है।
टाइगर रेस्क्यू जैसी घटनाओं में नाम मात्र की हाजिरी
ज्ञात हो कि सतना जिले में पिछले वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल रेस्क्यू आॅपरेशन हुए हैं । जैसे जंगल से भटककर गांव में घुसे टाइगर, भालू के हमले की घटनाएं, अजगर, कोबरा जैसे विषैले सर्पों की रिहायशी इलाकों में मौजूदगी , इन सभी में रेस्क्यू टीम के नियमित और साहसी सदस्य लगातार सक्रिय रहे। लेकिन रामसुरेश वर्मा इन अभियानों में शायद ही कभी नजर आए हों। अब सवाल विभागीय अधिकारियों पर भी उठ रहे हैं कि क्या उन्होंने जानबूझकर योग्य लोगों के नामों की अनदेखी की? या फिर वे भी किसी आंतरिक दबाव या सिफारिशी पर्ची के चलते ऐसे नाम भेजने को मजबूर थे, जिनकी फील्ड से कोई साख नहीं है? अगर ऐसा है तो यह केवल रेस्क्यू टीम के साथ अन्याय नहीं बल्कि पूरे वन्य संरक्षण तंत्र की गरिमा के साथ खिलवाड़ है।
असली रेस्क्यू टीम को किया गया दरकिनार
विभाग द्वारा सम्मान के लिए जारी सूची को लेकर विभाग में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। वन विभाग के इस निर्णय को लेकर अंदरखाने से जो बातें निकलकर आ रही हैं, वह यह कि विभागीय उच्चाधिकारियों द्वारा ‘अपनों को उपकृत करने’ और ‘सिफारिशी नामों, को ही आगे बढ़ाने की परंपरा अब सम्मान जैसे महत्वपूर्ण विषय में भी घुसपैठ कर चुकी है। सवाल यह है कि क्या फील्ड में काम करने वालों की कोई अहमियत नहीं बची? क्या पुरस्कारों का चयन अब केवल कागजी रिपोर्टों और नजदीकी संबंधों के आधार पर होगा? सवाल इसलिए क्योंकि स्थानीय वन क्षेत्र की वास्तविक रेस्क्यू टीम, जो लगभग 95 फीसदी रेस्क्यू आॅपरेशन को अंजाम देती है, उनमे से किसी का काम नहीं है। जान जोखिम में डालकर जंगलों से लेकर रिहायशी इलाकों तक में वन्य प्राणियों को सुरक्षित बचाने और आम जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करने का काम रेस्क्यू प्रभारी नरेंद्र पयासी के नेतृत्व में दिलीप निगम, ब्रजेश मिश्रा, तथा उड़नदस्ता टीम से ब्रजलाल बर्मा व मुकेश पांडे लंबे अरसे से करते आ रहे हैं, लेकिन इसमें उन रेस्क़यू योद्धाओं में किसी एक का भी नाम न होना सूची को कटघरे में खड़ा कर रहा है।


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

आहत जनता को राहत...निचले स्तर पर आई थोक महंगाई

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
हनुमान जयंती 2026 के अवसर पर आज मध्य प्रदेश के भोपाल में यातायात प्रभावित रहेगा. शाम 4 बजे से ट्रैफिक पूरी तरह से प्रभावित रहेगा. मध्य प्रदेश ट्रैफिक पुलिस ने भोपाल के लिए रूट डायवर्जन प्लान जारी किया है. घर से निकलने से पहले डायवर्टेड रूट के बारे में जरूर जान लें.
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण किया। सिंहस्थ-2028 के लिए क्राउड मैनेजमेंट और सुशासन को लेकर MP-UP के बीच नई रणनीति तैयार।
रीवा-छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस एक्सप्रेस को नियमित करने की मंजूरी मिल गई है। चार साल से एक्सटेंशन पर चल रही ट्रेन जल्द नियमित होगी, जिससे यात्रियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
रीवा के लोही गांव में वृद्ध महिला की बेरहमी से हत्या कर सिर काटकर ले जाया गया। पुलिस ने सर्च में सिर बरामद किया, मामले की जांच जारी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।
रीवा में अमहिया रोड चौड़ीकरण से पहले प्रशासन सख्त हुआ। करीब 200 दुकानें प्रभावित हैं। दुकानदारों को स्वयं अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए गए, अन्यथा बुलडोजर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
सिंगरौली के मुहेर गांव में नल-जल योजना विफल होने से ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। जल संकट गहराने से बीमारियों का खतरा बढ़ा, प्रशासन की अनदेखी पर लोगों में भारी आक्रोश है।
सिंगरौली के मुहेर गांव में नल-जल योजना विफल होने से ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। जल संकट गहराने से बीमारियों का खतरा बढ़ा, प्रशासन की अनदेखी पर लोगों में भारी आक्रोश है।
रामनगर सीएचसी में ब्लड स्टोरेज सेंटर का लाइसेंस खत्म होने से मरीजों को सतना तक 70 किमी जाना पड़ रहा है। संसाधनों की कमी से सुविधा शुरू नहीं हो सकी, जिससे गंभीर मरीजों को परेशानी हो रही है।
सतना के उचेहरा में मजदूरी मांगने पर अधेड़ की बेरहमी से हत्या कर दी गई। आरोप है कि पहले शराब पिलाई गई और फिर पीट-पीटकर घायल किया गया, जिसकी अस्पताल में मौत हो गई।
रीवा संभाग में गेहूं उत्पादन 4.19 लाख एमटी अनुमानित है। सतना और रीवा आगे हैं, जबकि मऊगंज और सिंगरौली पीछे। पंजीकृत किसानों में से केवल आधे ही समर्थन मूल्य पर उपज बेच पाएंगे।