सतना जिले के सितपुरा-छींदा मार्ग की दुर्दशा के विरोध में ग्रामीणों ने सड़क पर ही धान की रोपाई कर अनोखा प्रदर्शन किया। राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के क्षेत्र में यह विरोध सरकार की विकास नीतियों पर बड़ा सवाल है। कांग्रेस का समर्थन, छात्रों की सुरक्षा, और मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
सतना जिले के ग्रामीणों ने आखिरकार सरकार से हार मानकर सड़क पर खेती शुरू कर दी है। रविवार को सितपुरा-छींंदा मार्ग पर किसानों ने सोहावल ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के मार्गदर्शन एवं सितपुरा मंडलम के नेतृत्व में सितपुरा-छींदा मार्ग पर अनोखा विरोध प्रदर्शन किया गया। खराब सड़क और प्रशासन की लापरवाही के विरोध में किसानों, ग्रामीणों और कांग्रेस नेता व कार्यकर्ताओं ने सड़क पर धान की रोपाई कर सरकार को जगाने का प्रयास किया। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव राजभान सिंह ‘राज ’तकरीबन 8 गांव के ग्रामीणों का यह विरोध प्रदर्शन महज नाराजगी नहीं, बल्कि विकास की झूठी परत को उधेड़ता एक कड़वा सत्य है। चौंकाने वाली बात यह है कि यह इलाका मध्यप्रदेश सरकार की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र में आता है, फिर भी हालत बद से बदतर है। ‘राज ’ ने कहा कि राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र में ही जब सड़कों की यह दुर्दशा है, तो शेष क्षेत्रों की कल्पना ही भयावह है। सवाल यह नहीं कि सड़क टूटी है - सवाल यह है कि इस मसले पर प्रशासन की नीयत क्यों फूटी है?
दलदल बन चुकी सड़क, छात्रों-राहगीरों की जिंदगी खतरे में
जिस सड़क पर धान रोपी गई है वह सड़क सतना जिले के बरहा , बचवई, हरदुआ, छींदा, खम्हरिया, पटना, बड़ी खम्हरिया, रजरवार, महाकोना जैसे एक दर्जन से अधिक गांवों को सतना-नागौद स्थित सितपुरा से जोड़ती है। प्रदर्शन के दौरान उप सरपंच बचवई आरवेंद्र सिंह गांधी ने बताया कि तकरीबन एक दर्जन गांवों के 500 से अधिक छात्र रोजाना स्कूल आते-जाते हैं, लेकिन बीते कुछ हफ्तों की बारिश ने इस सड़क को दलदल में तब्दील कर दिया है, जिसमें गिरकर छात्र व राहगीर घायल हो रहे हैं। प्रदर्शन कारियों ने कहा कि सितपुरा-छींदा मार्ग की हालत इतनी खराब है कि राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन चुप बैठा है। जगह-जगह गड्ढों और कीचड़ से भरे इस मार्ग पर अब आवाजाही खतरे से खाली नहीं है । ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में पिछले पांच वर्षों से लगातार आवाज उठाई जा रही है लेकिन न तो क्षेत्र की विधायक ने कोई सुध ली ,न जिला प्रशासन और प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अधिकारियों ने कोई कारगर कदम उठाया जो कि दुर्भाग्य पूर्ण है।
खदानें, क्रशर और टूटी सड़क-विकास का विरोधाभास
इस मार्ग से कई क्रशर और पत्थर खदानें भी जुड़ी हैं। यहां से निकलने वाले भारी-भरकम ट्रक और ओवरलोड गाड़ियां सड़क को लगातार खोखला करती रही हैं, लेकिन सड़क की मरम्मत पर एक पैसा भी नहीं खर्च किया गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार को खदानों से मोटी रॉयल्टी मिलती और क्रशर से टैक्स , लेकिन गांववालों को मिल रही है टूटी सड़क, धूल और जानलेवा गड्ढे। गर्मी में धूल का गुबार और बरसात में गड्ढे और दलदली सड़क का सामना राहगीरो को रना पड़ता है। धूल, गड्ढे, और प्रदूषण ग्रामीणों की नियति बन चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार सिर्फ राजस्व कमाने में रुचि दिखाती है, जनता की मूलभूत सुविधा-सड़क-उसकी प्राथमिकता में नहीं है।
इन्होंने रोपी धान
प्रदर्शन के दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव राजभान सिंह राज,महिला कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीमती गीता सिंह,सोहावल ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सिंह,महिला कांग्रेस की प्रदेश सचिव प्रभा जित्तू बागरी एवं वंदना देवराज बागरी, युवक कांग्रेस रैगांव विधानसभा अध्यक्ष शिवम सिंह परिहार ,सितपुरा मंडलम अध्यक्ष बिटलु सिंह, बचवई उप सरपंच आरवेंद्र सिंह ‘गांधी’, प्रवीण बागरी बेटा, भोलू सिंह भूलनी, लकी सिंह, धर्मेंद्र रजक, अनुराग गर्ग, सुशील चौधरी, रानी बुनकर, रावेंद्र सिंह, राजबहादुर बागरी ,धन्नू सिंह, गुड्डू सिंह, रामू सिंह, उज्जवल नन्हे सिंह ,पंकज द्विवेदी, लल्ला महराज, बादल सिंह, दद्दू , रामफल चौधरी, कमलेश दाहिया, रज्जन पाल,संतोष कोरी , राजमन सिंह, यशवर्द्धन सिंह, अभिषेक सिंह, नरेंद्र सिंह, छत्रजीत सिंह के अलावा भारी तादाद में ग्रामीण और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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