सिंगरौली में ट्रेलर व हाइवा के कहर से सड़क हादसे बढ़े। प्रशासन और RTO की लापरवाही से जनता का गुस्सा उबाल पर। दोपहिया चालकों पर ही कार्रवाई क्यों?

सिर्फ दो पहिया वाहनों पर कार्यवाही, बड़े वाहनों पर दरियादिली
सिंगरौली, स्टार समाचार वेब
जिले में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। कभी सरई तो कभी माड़ा क्षेत्र के गडाखाड़ की सुलगता ज्वाला थमने का नाम नहीं ले रहा है। वही दो दिन पूर्व कोतवाली क्षेत्र के परसौना में दूध विक्रय करने जा रहे अधेड़ की सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। मामला शांत नहीं पड़ा की बीते बुधवार को कचनी में एक ट्रक ने युवक को कुचलकर घर का चिराग बुझा दिया। आखिर कब तक इस तरह की घटनाएं होती रहेगी और सिंगरौली के लोग मौत के नींद सोते रहेंगे। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर ना तो प्रशासन गंभीर है और नहीं जिले के जनप्रतिनिधि। यही वजह है कि जनता का आक्रोश दिनों दिन बढ़ रहा है। इधर बता दे की आरटीओ एवं यातायात पुलिस द्वारा दो पहिया वाहनो पर ही क्यों कार्रवाई की जाती है। आखिर तेज रफ्तार ट्रेलर,हाइवा और नशे की हालत में बड़ी गाड़ियो को चलाने वाले ड्राइवरों के खिलाफ आरटीओ एवं यातायात पुलिस क्यो नही कार्यवाही करती। क्या सिर्फ दो पहिया और आटो वाले ही यातायात पुलिस को चेकिंग के लिए दिखाई देते है।
दो पहिया वाहनों पर ही क्यों होती है कार्रवाई
जिले में ताण्डव मचा रहे र्ट्रेलर एवं हाईवा से लगातार हो रहे मौत हो लेकर अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि आरटीओ एवं यातायात पुलिस द्वारा दो पहिया वाहनो पर कार्रवाही की जाती है आखिर हर दिन जब जहां इच्छा हुई खड़े होकर चेकिंग करने लगते है, चेकिंग के नाम पर वाहन रोककर वसूली करते हैं। यह सिलसिला कब थमेगा। इस मनमानी को कोई नहीं रोक रहा है। जबकि बड़े वाहन कार-बस सब धडल्ले से चल रहे है इन पर कहीं कोई रोक-टोक नहीं करता।
हाईवा, ट्रेलरों पर कब लगेगी लगाम
लोगो ने प्रशासन को कोसते हुए कहा कि जिले की सड़को पर यमराज रूपी तेज रफ्तार चल रहे इन हाईवा,ट्रेलरो पर प्रशासन द्वारा कब लगाम कसा जायेगा। ऐसे में ऐसा प्रतीत होता है कि जिले में आए दिन हो रहे दुर्घटनाओं को लेकर जिला प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा,जिसके कारण आए दिन लोग अपनी जान से हाथ धोते नजर आ रहे हैं। लेकिन इस ओर प्रशासन गंभीर नही है।
जनता के दर्द को समझने वाला कोई नहीं
सिंगरौली की जनता के दर्द को समझने वाला इस जिले न तो प्रशासन है और न ही कोई जनप्रतिनिधि । जिला प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों को जनता के इस दर्द से सीख लेना चाहिए। लेकिन आए दिन हो रही दर्दनाक मौत देने वाले ऐसे हाइवा के मालिकों पर जिला प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही तो दूर अंकुश तक लगा पाना मुश्किल साबित हो रहा है और वहीं जनप्रतिनिधियों को भी जनता के दर्द से कोई लेना-देना नही है।
निर्देशों पर नहीं होता है अमल
अमिलिया घाटी की सड़क के चौड़ीकरण और ढलान को कम करने के लिए पहले भी कई बार अधिकारियों द्वारा निर्देशित किया जा चुका है लेकिन सड़क सुरक्षा समिति में निर्णय होने के बावजूद अमिलिया घाटी की सड़क में सुधार नहीं किया जा सका है। इसकी मुख्य वजह बजट और अधिकारियों की इच्छा शक्ति में कमी माना जा सकता है।
सड़क सुरक्षा समिति की बैठक सिर्फ हवा-हवाई
सड़क दुर्घटनाओं का सबब बनने वाले अन्य दूसरे ब्लैक स्पॉट की तकनीकी खामी को भी दूर करने को कहा था। मगर कवायद केवल संकेतक लगाने तक सीमित रह गया है। सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के मद्देनजर सड़क सुरक्षा समिति द्वारा लिए गए हैं। जिले में सड़क दुर्घटनाओं की मुख्य वजह बने ब्लैक स्पॉट को दुरुस्त करने की कवायद अब तक केवल खानापूर्ति तक सीमित है। नतीजा दुर्घटनाओं का सिलसिला बदस्तूर जारी है। ज्यादातर सड़क दुर्घटनाओं के लिए वही समस्याएं जिम्मेदार हैंं जिनके समाधान के लिए सड़क सुरक्षा समिति ने कई बार निर्देश जारी किया गया है। ज्यादातर सड़क दुर्घटनाएं चिह्नित ब्लैक स्पॉट पर ही हुई हैं।

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