देश के पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी से मैदानी राज्यों में गलन बढ़ गई है। जम्मू-कश्मीर की सोनमर्ग टनल के पास तेज बर्फबारी शुरू हो गई है। हिमाचल में के लाहौल स्पीति में मंगलवार शाम से ही बर्फबारी शुरू है। यहां तापमान -10 डिग्री तक जाने की चेतावनी जारी की गई है।
भोपाल में बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विद्यार्थियों को उपाधियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए। जानें कैसे माता-पिता और गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 'विकसित भारत' की नींव रखेगी।
राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बरकतउल्ला विश्वविद्यालय भोपाल के दीक्षांत समारोह का कुशाभाउ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। इस अवसर पर प्रदेश उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार भी मौजूद रहे।
थर्ड डिग्री अमित सेंगर की खास रिपोर्ट – साहब के सात एकड़ से ज्यादा के फार्म हाउस का सौदा, खाकी अफसरों के जमीन निवेश के सपने, अनुशासनहीनता और फील्ड की चर्चाएं, खाकी-खादी का तालमेल बिगड़ना और गाड़ी के धंधे का खेल। अंदर की सच्चाई जानिए विस्तार से।
अमित सेंगर के कॉलम थर्ड डिग्री में आज पढ़ें-कैसे दफ्तर से गायब होकर घर में आराम फरमा रही मोहर्तमा की पोल खुली, हाइवे थाने के दाग फिर उभरे, साहब की खुशहाली ने सबको चौंकाया और नए साहब की ट्वेंटी-ट्वेंटी पारी बनी चर्चा का विषय। सत्ता, सिस्टम और साहब के अंदाज़ की रोचक दास्तान।
रीवा संभाग के पुलिस महकमे में इन दिनों सोशल मीडिया शेरनी-टाइगर की जुगलबंदी, प्रमोशन की उम्मीदें, तबादलों की बेचैनी और रसूखदार थानेदारों की सिफारिशों का दौर चर्चा में है। पढ़िए अमित सेंगर का 'थर्ड डिग्री' कॉलम - व्यंग्य में लिपटी हकीकत।
गंगेव और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बिना डिग्री और चिकित्सा योग्यता के ये लोग मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिससे गंभीर बीमारियों में भी जान का खतरा बढ़ गया है। क्लीनिक, मेडिकल दुकानों की मिलीभगत और कमीशन के लालच में मरीजों को मंहगी व अनावश्यक दवाएं दी जा रही हैं। आश्चर्य की बात है कि स्वास्थ्य विभाग इस पूरे मामले में कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है।
“थर्ड डिग्री” नामक यह विशेष रिपोर्ट विंध्य क्षेत्र के प्रशासनिक अफसरों की महत्वाकांक्षाओं, छवि निर्माण की कोशिशों, और नेताओं के आगे झुकने की विवशता को उजागर करती है। अमित सेंगर की यह लेखनी सत्ता और सिस्टम की परतें उघाड़ती है।
पुलिस विभाग की अंदरूनी राजनीति, संबंधों का असंतुलन, पसंद-नापसंद से उपजी तकरार, और अफसरों की संवादहीनता की हकीकत को बारीकी से उजागर करता अमित सेंगर का व्यंग्यात्मक विश्लेषण। थानों से लेकर अफसरों की केबिन तक फैली चुप्पियों और शिकायतों का दिलचस्प दस्तावेज़।
उर्जाधानी से लेकर हीरानगरी तक, मनचाही पोस्टिंग पाने की जद्दोजहद, कथा-पाठ से लेकर खाकी और सत्ता की गठजोड़ तक की कहानी। सावन की हरियाली में सूखा अनुभव करते वो चेहरे जो कल तक सिस्टम पर राज कर रहे थे, आज किनारे हो गए हैं। ईमानदार अफसरों की तैनाती से क्यों टूट रही है खाकी की ललक, जानिए अमित सिंह सेंगर के तीखे विश्लेषण में।






















