कांग्रेस पार्टी में अध्यक्ष पद की घोषणा के बाद बगावत तेज़ हो गई है। पहले मुस्लिम नेताओं ने विरोध जताया और अब विंध्य के ब्राम्हण नेताओं ने रीवा में चिंतन बैठक कर अपनी नाराज़गी जताई। नेताओं ने ऐलान किया है कि वह राहुल गांधी से मिलकर राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग करेंगे। यह विरोध कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ा सकता है।
मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर कांग्रेस के भीतर कलह की गूंज सुनाई दे रही है। 2020 में सरकार गिरने को लेकर पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और कमलनाथ के बयानों पर भाजपा नेताओं ने तंज कसा है। दरअसल, दिग्विजय सिंह और कममलनाथ की बयानबाजी पर भाजपा सक्रिय हो गई है।
दिग्विजय से जब पूछा गया कि कहा जाता है कि आपकी वजह से कमलनाथ सरकार गिरी... इस पर उन्होंने कहा- ये प्रचारित किया गया कि मेरी और सिंधिया की लड़ाई की वजह से कांग्रेस सरकार गिर गई। लेकिन सच्चाई ये नहीं है। मैंने चेताया था कि ऐसी घटना हो सकती है।
मध्यप्रदेश सरकार द्वारा राजस्व अधिकारियों के कार्य विभाजन के फैसले के खिलाफ बगावत शुरू हो गई है। रीवा सहित 9 जिलों में अधिकारियों ने 6 अगस्त से विभागीय कार्यों का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। वे सिर्फ आपदा प्रबंधन तक सीमित रहेंगे। पढ़ें क्या हैं उनकी मांगें और अगला कदम।
















