रीवा जिले के मऊगंज स्थित बहुती वाटरफॉल में प्रवेश शुल्क और वाहन पार्किंग के नाम पर स्थानीय सरहंगों द्वारा सैलानियों से अवैध वसूली की जा रही है। विरोध करने पर अभद्रता और मारपीट तक की नौबत आती है। वायरल वीडियो के बाद पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन टेंडर के नाम पर चल रही इस वसूली ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रीवा जिले का टोंस वॉटरफॉल बीते पांच सालों से पर्यटकों के लिए बंद पड़ा है। लाखों रुपये खर्च कर बनाया गया पर्यटन केन्द्र अब जर्जर हालत में है। वन विभाग की लापरवाही और सुरक्षा इंतजामों की कमी के कारण इस लोकप्रिय स्थल को दोबारा चालू नहीं किया जा सका है।
मार्तण्ड सिंह जूदेव चिड़ियाघर, जो विंध्य की शान और सफेद शेर का घर है, 10 वर्षों में भी सालाना 3.5 लाख पर्यटक नहीं जुटा सका। खराब ट्रांसपोर्टेशन, सीमित ब्रांडिंग और प्रशासनिक उदासीनता इसकी मुख्य वजह हैं। खर्च ज्यादा और आमदनी कम बनी चुनौती।
रीवा में पहली बार आयोजित हो रहे रीजनल टूरिज्म कॉन्क्लेव का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे। फिल्मी कलाकारों और एयरलाइंस कंपनियों के डेलीगेट्स की मौजूदगी में पर्यटन और वायुसेवा के नए अवसर तलाशे जाएंगे।
रीवा में दो दिवसीय पर्यटन कान्क्लेव के आयोजन से विंध्य क्षेत्र के जलप्रपातों और प्राकृतिक स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की तैयारी है। पुरवा, चचाई, क्योटी और बहुती जैसे जलप्रपातों को टूरिज्म कॉरिडोर से जोड़ा जाएगा। होटल, ट्रैवल और एयरलाइन निवेशकों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री खुद इस योजना की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे।
रीवा में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए 25 से 27 जुलाई तक तीन दिवसीय कॉन्क्लेव का आयोजन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के शुभारंभ से शुरू होने वाले इस आयोजन में देशभर के उद्योगपति शामिल होंगे और जलप्रपात व धार्मिक स्थलों के विकास पर मंथन होगा।


















