मध्य प्रदेश में ओबीसी (OBC) आरक्षण को 14% से बढ़ाकर 27% करने का मामला एक बार फिर गरमा गया है। सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इस संवेदनशील विषय पर एक अहम आदेश जारी किया।
सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी क्रीमी लेयर पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि माता-पिता की केवल सैलरी के आधार पर आरक्षण नहीं छीना जा सकता। पदों और सामाजिक स्थिति को देखना भी अनिवार्य
मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण लागू करने से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामला एमपी हाईकोर्ट को ट्रांसफर करते हुए अंतिम निर्णय लेने को कहा है।
ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। गुरुवार को भी केस की सुनवाई हुई। इस दौरान सरकार की ओर से एडिशनल सालिसिटर जनरल केएम नटराज, स्टैंडिंग काउंसिल मृणाल एलकर, हरमीत सिंह रूपराह, अतिरिक्त महाधिवक्ता धीरेंद्र सिंह परमार और शासकीय अधिवक्ता राजन चौरसिया उपस्थित रहे।
मध्य प्रदेश ओबीसी आरक्षण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में राज्य सरकार का कोई भी वकील मौजूद नहीं रहा। कोर्ट ने इस रवैये पर खेद जताया है। अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को होगी।
मध्य प्रदेश OBC 27% आरक्षण केस में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई, अगली तारीख नवंबर के पहले हफ्ते में। जानें हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश, 87:13 फॉर्मूला की स्थिति और कमलनाथ का सरकार पर आरोप।
मध्यप्रदेश में OBC के लिए 27% आरक्षण लागू करने की मांग पर कल (गुरुवार) सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी। 2019 के कानून पर जस्टिस नरसिम्हा की पीठ करेगी फैसला। जानें क्या है पूरा मामला और इसका राष्ट्रीय महत्व।
मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण लागू न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी। राज्य सरकार को 4 जुलाई तक जवाब देने का निर्देश। लाखों उम्मीदवारों को 6 साल से है इंतजार।

















