सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी क्रीमी लेयर पर बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि माता-पिता की केवल सैलरी के आधार पर आरक्षण नहीं छीना जा सकता। पदों और सामाजिक स्थिति को देखना भी अनिवार्य
By: Ajay Tiwari
Mar 12, 20263:00 PM
हाइलाइट्स
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
सुप्रीम कोर्ट ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के आरक्षण के लाभ और 'क्रीमी लेयर' (Creamy Layer) के निर्धारण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि किसी अभ्यर्थी के क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल उसके माता-पिता या अभिभावकों की सैलरी (वेतन) के आधार पर नहीं किया जा सकता।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आर महादेवन की खंडपीठ ने केंद्र सरकार द्वारा दायर की गई अपील को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि आरक्षण के दायरे से बाहर (क्रीमी लेयर में) रखने के लिए केवल आर्थिक आधार (सैलरी) को ही एकमात्र पैमाना मानना तर्कसंगत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में जोर देकर कहा कि क्रीमी लेयर दर्जे का निर्धारण करते समय यह गौर करना अनिवार्य है कि माता किस प्रशासनिक यसा आधिकारिक पद पर तैनात हैं। समाज और सेवा में उनकी वर्तमान स्थिति क्या है। वार्षिक आय के बजाय उनके व्यावसायिक कद और जिम्मेदारियों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इस फैसले के बाद अब सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के समय ओबीसी आरक्षण के क्रीमी लेयर का निर्धारण अधिक व्यापक तरीके से होगा। यह उन अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत हो सकती है जिनके माता-पिता की सैलरी तो अधिक है, लेकिन वे सामाजिक या आधिकारिक रूप से 'उच्च पदों' (जैसे क्लास-1 या क्लास-2 ऑफिसर) पर नहीं हैं।
अदालत का यह रुख सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को और अधिक मजबूती प्रदान करता है, जिससे आरक्षण का लाभ उन लोगों तक पहुंचे जो वास्तव में इसके पात्र हैं।