भारत ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक मील का पत्थर पार कर लिया है। अब देश अपनी नेविगेशन जरूरतों के लिए विदेशी प्रणालियों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहेगा। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे लॉन्च पैड से जीएसएलवी-एफ18 रॉकेट ने शुक्रवार रात 11:51 बजे उड़ान भरी।
आपरेशन सिंदूर में अपनी अचूक सटीकता और मारक क्षमता का लोहा मनवाने वाली स्वदेशी 155 एमएम धनुष तोप अब और अधिक घातक रूप में सामने आने वाली है। जबलपुर स्थित गन कैरिज फैक्ट्री धनुष तोप के नए और अत्याधुनिक 52 कैलिबर वर्जन पर तेजी से काम कर रही है।
भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ी सफलता अर्जित की है। स्वदेशी रूप से विकसित ग्लाइड वेपन सिस्टम टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज आग्मेंटेशन (तारा) का पहला सफल परीक्षण उड़ान किया गया है। वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि पर डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना और परियोजना से जुड़े उद्योग साझेदारों को बधाई दी।















