विंध्य क्षेत्र से निगम मंडल, आयोग व प्राधिकरणों में नियुक्ति की दौड़ तेज। सतना, रीवा, सिंगरौली, सीधी व अनूपपुर के दावेदार नेताओं के नाम चर्चा में। संगठन के नए समीकरणों के बीच सत्ता सुख की जुगत शुरू।

विंध्य से भी कई नेताओं के नाम चर्चा में
सतना, स्टार समाचार वेब
संगठन में प्रदेश स्तर पर हुए बदलाव के बाद अब निगम मंडल, आयोग एवं प्राधिकरणों में नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। नियुक्ति का रास्ता खुलते ही इनमें स्थान पाने के लिए विंध्य के नेताओं ने भी हाथ-पांव मारने शुरू कर दिए हैं। पीछे के रास्ते सत्ता सुख पाने को आतुर नेता अपने- अपने जोर- जुगाड़ के जरिए संगठन के नए मुखिया व सीएम के पास तक अपनी-अपनी दावेदारी पहुंचाने की जुगत में हैं। अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं व नेताओं को उपकृत करने वाली नियुक्तियां पार्टी का प्रदेश नेतृत्व कब तक करेगा यह तो अभी तय नहीं है लेकिन इन नियुक्तियों की आहट पाते ही दावेदारों के नाम सामने आने लगे हैं। इसके लिए कोई संघ की अपनी पृष्ठभूमि को आगे ला रहा है, तो कोई पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा व समर्पण को आगे कर रहा है। अब देखना यह है कि सांसद, विधायक बनने से चूके व संगठन में पद पाने से महरूम रह गए विंध्य के किन नेताओं को पीछे के दरवाजे से सत्ता सुख मिलता है।
विंध्य के नेताओं को पर्दे के पीछे से सत्तारूढ़ होने का मौका हमेशा ही मिला है। यहां के नेताओं को पार्टी कभी निगम मंडल में तो कभी आयोग या फिर प्राधिकरण में जगह देकर उनकी निष्ठा और समर्पण का सम्मान करती रही है। पिछले कार्यकाल में भी कई नेता उपकृत थे, ऐसे में माना जा रहा है कि जब आने वाले समय में नियुक्तियां होंगी तो विंध्य को पर्याप्त महत्व मिलेगा यहां के पार्टी नेताओं को इस बात का भरोसा है, वैसे विंध्य ने भी पिछले कुछ चुनावों से भाजपा को दिल खोलकर अपना समर्थन दिया है। ऐसे में यदि पार्टी विंध्य के नेताओं को संगठन व सत्ता में महत्व देती है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।
कोई सीएम का करीबी तो किसी को मिल सकता है प्रभारी मंत्री का साथ
सतना से निगम मंडल व आयोग में किसे स्थान मिल सकता है इस बात को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। सार्वजनिक स्थानों से लेकर पार्टी फोरम तक ये नाम चर्चा का विषय बने हुए हैं। फिलहाल सतना से जिन चार नामों की चर्चा चल रही है उनमें नगर निगम सतना के पूर्व स्पीकर अनिल जायसवाल, भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य विनोद यादव, शासकीय स्वशासी महाविद्यालय की जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष व भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष इन्द्रराज सिंह यादव के बेटे विजय यादव एवं विनोद तिवारी का नाम शामिल है। चर्चाओं की मानें तो पिछले कई वर्षों से सतना से किसी न किसी को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का सदस्य व किसी न किसी निगम में शामिल किया जाता रहा है। ऐसे में संभाावनाएं जताई जा रही हैं कि किसी न किसी को पार्टी पर्दे के पीछे से सत्ता सुख दे सकती है। जिन नामों की चर्चा चल रही है उनके दावे की मजबूती व कमजोरी की बात करें तो नगर निगम के पूर्व स्पीकर अनिल जायसवाल को प्रदेश के ताकतवर मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का करीबी होने का लाभ मिल सकता है। सांसद से लेकर पार्टी के सभी विधायक इनके साथ खड़े नजर आ रहे हैं। दूसरे दावेदार विजय यादव की बात करें तो इन्हें अपने उच्च स्तरीय सम्पर्को व सीएम के करीबी होने का लाभ मिल सकता है। बताया जाता है कि विजय यादव का प्रदेश के मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव के साथ पारिवारिक संबंध हैं। यह संबंध विद्यार्थी परिषद के जमाने से है। इसके अलावा श्री यादव की बहन हरियाणा पीएससी बोर्ड की मेम्बर हैं और विद्यार्थी परिषद की राष्टÑीय पदाधिकारी भी हैं। विजय यादव के पक्ष में एक बात यह भी जा रही है कि उनके संबंध केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के साथ भी पारिवारिक हैं। ऐसे में पार्टी यदि आयोग व निगम मंडल में सतना से किसी को उपकृत करने की सोचती है तो विजय यादव मजबूत दावेदार नजर आ रहे हैं। इसी तरह पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य के लिए एक अन्य दावेदार विनोद यादव का नाम भी प्रमुखता से उभरकर सामने आया है। श्री यादव लम्बे समय से पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य हैं उन्हें संगठन के प्रति निष्ठा व समर्पण का लाभ मिल सकता है। ओबीसी वर्ग से इतर निगम मंडल के लिए जो एक अन्य नाम सामने आ रहा है वह नाम पूर्व पार्षद व पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य विनोद तिवारी का है। प्रदेश नेतृत्व के कई कद्दावर नेताओं के साथ करीबी संबंध वाले श्री तिवारी हर वर्ग में अपनी एक अलग पकड़ बनाए हुए हैं तभी तो वे मुस्लिम बाहुल्य इलाके से भाजपा के पार्षद निर्वाचित हो चुके हैं।
सबकी नजरें चित्रकूट विकास प्राधिकरण पर
सतना में निगम मंडल, आयोग अथवा प्राधिकरण में नियुक्ति की बात की जाए तो इस समय सबकी निगाहें भगवान राम की तपोभूमि पर टिकी हुई हैं। यहां गठित चित्रकूट विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनने का सपना सत्तारूढ़ दल भाजपा से जुड़े कई नेता पाले हुए हैं। माना जा रहा है कि डा. मोहन यादव सरकार प्राधिकरण के जरिए चित्रकूट का विकास भगवान राम की जन्मस्थली अयोध्या की तर्ज पर करने के लिए प्रयासरत हैं। लिहाजा अभी सरकार चित्रकूट विकास प्राधिकरण में राजनीतिक दखंलदाजी नहीं चाह रही है। ऐसे में फिलहाल अभी सरकार चित्रकूट विकास प्राधिकरण में कोई राजनीतिक नियुक्ति करने के मूड में नहीं है। सरकार की मंशा को भांपते हुए चित्रकूट विकास प्राधिकरण में सेट होने के जुगाड़ में लगे नेता व जनप्रतिनिधि अब दूसरे आयोग, निगम मंडलों में अपने लिए संभावनाएं तलाश रहे हैं।
रीवा में कमलेश्वर व केपी का दावा
रीवा जिले से किसी नेता को निगम, आयोग व किसी प्राधिकरण में स्थान देने की बात आती है तो यहां से दो नाम प्रमुखता से उभर कर सामने आ रहे हैं। एक नाम भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष कमलेश्वर सिंह का है तो दूसरा सेमरिया के पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी का। प्रदेश के डिप्टी सीएम व विंध्य के सर्वमान्य नेता राजेन्द्र शुक्ल के करीबी श्री त्रिपाठी की संभावनाएं इसलिए भी ज्यादा मानी जा रही हैं कि उन्हें निगम मंडल में अर्जेस्ट कर सेमरिया में कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा के वर्चस्व को तोड़ने का प्रयास किया जा सकता है, जबकि कमलेश्वर सिंह को संघ की पृष्ठिभूमि का लाभ मिल सकता है।
सिंगरौली में दो नाम चर्चा में
सिंगरौली जिले में सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष के लिए अभी तक दो नाम सामने आए हैं। इनमें पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष रामसुमिरन गुप्ता एवं पूर्व मंडी अध्यक्ष रामलल्लू वैश्य का नाम शामिल है। पूर्व में सिंगरौली विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष दिलीप शाह और गिरीश द्विवेदी रह चुके हैं।
अब तक इन्हें मिला मौका
सतना
रीवा
सीधी
सिंगरौली

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