चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए चार-सूत्रीय शांति प्रस्ताव का अनावरण किया है। संप्रभुता, साझा सुरक्षा और आर्थिक विकास पर केंद्रित इस प्लान के मायने समझें।

बीजिंग । स्टार समाचार वेब
मध्य पूर्व (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बीच चीन ने खुद को एक वैश्विक शांतिदूत के रूप में स्थापित करने के लिए बड़ा दांव चला है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आधिकारिक तौर पर अपने 'चार-सूत्रीय शांति प्रस्ताव' का खुलासा किया है। जिनपिंग ने इसे खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता लाने का एकमात्र व्यवहारिक रास्ता बताया है।
यह घोषणा बीजिंग में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान हुई, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान समेत कई वैश्विक नेता मौजूद थे।
शी जिनपिंग का यह प्रस्ताव सीधे तौर पर पश्चिमी प्रभुत्व और अमेरिकी नीतियों को कूटनीतिक चुनौती देता नजर आता है। इसके चार मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
साझा और टिकाऊ सुरक्षा ढांचा
चीन का तर्क है कि सुरक्षा किसी एक देश के विशेषाधिकार का विषय नहीं होना चाहिए। जिनपिंग ने 'शीत युद्ध वाली मानसिकता' (Cold War Mentality) को त्यागने की अपील की है। उन्होंने एक ऐसे सुरक्षा ढांचे की वकालत की है जहाँ 'जीरो-सम गेम' (एक का लाभ, दूसरे की हानि) के बजाय सभी देशों की सामूहिक भागीदारी सुनिश्चित हो।
2. राष्ट्रीय संप्रभुता और अखंडता का सम्मान
प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि किसी भी देश की भौगोलिक सीमाओं और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। हालिया समय में दूतावासों और कूटनीतिक बुनियादी ढांचों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए शी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्थानों और उनके कर्मियों की सुरक्षा सर्वोपरि है।
अंतरराष्ट्रीय कानून का समान पालन
जिनपिंग ने पश्चिमी देशों के 'दोहरे मापदंडों' पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून का उपयोग अपनी सुविधा के अनुसार नहीं किया जा सकता। चीन ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करने और नियमों को सभी देशों पर समान रूप से लागू करने पर जोर दिया है।
विकास के जरिए शांति की स्थापना
चीन का मानना है कि बंदूकों के दम पर स्थायी शांति संभव नहीं है। उनके अनुसार, सुरक्षा और आर्थिक विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। अपनी 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के जरिए चीन इस क्षेत्र में ऐसा निवेश करना चाहता है जहाँ व्यापारिक हित युद्ध की संभावनाओं को स्वतः ही कम कर दें।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब अप्रैल 2026 की शुरुआत में पाकिस्तान और चीन की मध्यस्थता से अमेरिका-ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम पर सहमति बनी थी। इसी मंच से जिनपिंग ने एक बार फिर स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र की स्थापना की मांग दोहराई, जिसे वे क्षेत्रीय न्याय के लिए अनिवार्य मानते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से चीन न केवल अपनी ऊर्जा सुरक्षा (तेल आयात) सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि दुनिया को यह संदेश भी दे रहा है कि वैश्विक विवादों के समाधान के लिए अब वाशिंगटन के अलावा बीजिंग भी एक सशक्त विकल्प है।
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