भारत के पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भीषण और भयानक प्राकृतिक आपदा ने चारों तरफ तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस दिल दहला देने वाली घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1127 हो गई है। आपदा के एक हफ्ते बाद भी सुरक्षा बल और बचाव टीमें मलबे में फंसे लोगों और लापता हुए हजारों लोगों की तलाश में दिन-रात जुटी हुई हैं।

सुरक्षा बलों ने 6541 लोगों को सुरक्षित बचाया
राहत और बचाव कर्मियों का संघर्ष अभी जारी

काठमांडू। स्टार समाचार वेब
भारत के पड़ोसी देश नेपाल में हाल ही में आई भीषण और भयानक प्राकृतिक आपदा ने चारों तरफ तबाही का मंजर खड़ा कर दिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इस दिल दहला देने वाली घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1127 हो गई है। आपदा के एक हफ्ते बाद भी सुरक्षा बल और बचाव टीमें मलबे में फंसे लोगों और लापता हुए हजारों लोगों की तलाश में दिन-रात जुटी हुई हैं। इस भारी संकट से निपटने के लिए नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियां पूरी ताकत से काम कर रही हैं। अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6541 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। दूसरी ओर अभी भी 4858 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है। इतना ही नहीं, प्रभावित क्षेत्रों में खोज, बचाव, राहत सामग्री बांटने और शवों के प्रबंधन के लिए कुल 7912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है।

जान लें कहां कितना हुआ नुकसान
नेपाल पुलिस की तरफ से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस आपदा ने कई जिलों को बुरी तरह अपनी चपेट में लिया है। चितवन- सबसे ज्यादा 348 शव यहां से बरामद किए गए हैं।
पहचान और अंतिम संस्कार की प्रक्रिया
राहत और बचाव कार्य में जुटी पुलिस ने बताया कि अब तक कुल 1113 शवों का पीएम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है, जिनमें से 95 शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। जिन 911 शवों की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, उनके विवरण और तस्वीरें नेपाल पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी गई हैं ताकि परिवार के लोग अपने बिछड़े हुए अपनों को ढूंढ सकें।
इस तरह आई थी तबाही
नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने या ढहने के कारण अचानक भयंकर बाढ़ आ गई थी। कुदरती आफत ने 26 अगस्त को उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों को पल भर में मलबे के ढेर में बदल दिया। नेपाल के इतिहास की इस सबसे बड़ी प्राकृतिक आपदाओं में से एक ने जहां पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। वहीं राहत और बचाव कर्मियों का संघर्ष अभी भी जारी है ताकि ज्यादा से ज्यादा जिंदगियों को बचाया जा सके।
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