जीएसटी काउंसिल सात अक्टूबर को होने वाली अपनी बैठक में देश के इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़े सुधारों को मंजूरी दे सकती है। सितंबर 2025 में हुए रेट रेशनलाइजेशन (जीएसटी दरों में बदलाव) के बाद सरकार अब नेक्स्ट-जनरेशन जीएसटी के तहत टैक्स प्रशासन को आसान बनाने और कारोबारियों को राहत देने पर काम कर रही है।

7 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल की होगी बैठक,आपराधिक केसों का बढ़ेगा समय
इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में नेक्स्ट-जनरेशन जीएसटी के तहत बड़े सुधारों की तैयारी
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
जीएसटी काउंसिल सात अक्टूबर को होने वाली अपनी बैठक में देश के इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़े सुधारों को मंजूरी दे सकती है। सितंबर 2025 में हुए रेट रेशनलाइजेशन (जीएसटी दरों में बदलाव) के बाद सरकार अब नेक्स्ट-जनरेशन जीएसटी के तहत टैक्स प्रशासन को आसान बनाने और कारोबारियों को राहत देने पर काम कर रही है। नए प्रस्ताव के तहत टैक्स अधिकारियों से सीधे गिरफ्तार करने का अधिकार वापस लेने और फर्जीवाड़े के आपराधिक केसों की सीमा बढ़ाने की तैयारी है। दावा किया जा रहा है कि प्रस्ताव के तहत सीजीएसटी एक्ट की धारा 69 में संशोधन किया जाएगा। अब तक कमिश्नर लेवल की मंजूरी मिलने पर जीएसटी अधिकारी किसी व्यक्ति को सीधे गिरफ्तार कर सकते थे, लेकिन नए बदलाव के बाद अधिकारियों से यह पावर वापस ले ली जाएगी। किसी भी गिरफ्तारी के लिए कोर्ट की न्यायिक मंजूरी अनिवार्य होगी।
सरकार का दावा-अब सिस्टम मजबूत
जब 1 जुलाई 2017 को जीएसटी लागू हुआ था, तब फेक इनवॉइस और टैक्स चोरी पकड़ने के लिए आटोमेटेड सिस्टम मजबूत नहीं था, इसलिए गिरफ्तारी का डर जरूरी था। अब डेटा-ड्रिवन और आटोमेटेड इनवॉइस-मैचिंग सिस्टम मजबूत हो चुका है, जो शुरुआत में ही फर्जी क्रेडिट पकड़ लेता है। इसके अलावा, अरेस्ट किए गए अधिकतर लोगों को कोर्ट से आसानी से जमानत मिल जाती थी और कारोबारी इसे अधिकारियों द्वारा परेशान करने का जरिया मानते थे।
आपराधिक कार्रवाई की सीमा होगी 5 करोड़
वर्तमान में 1 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी या फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम के मामलों में आपराधिक कार्रवाई और गिरफ्तारी की व्यवस्था है। नए प्रस्ताव में क्रिमिनल केस चलाने की इस लिमिट को 1 करोड़ से सीधे बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने की सिफारिश की गई है। यानी 5 करोड़ रुपए से कम के मामलों में आपराधिक केस दर्ज नहीं होगा।
टैक्स विवाद क्रिमिनल मामलों के दायरे से बाहर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि क्लासिफिकेशन, वैल्यूएशन या इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूटीन विवादों को क्रिमिनल प्रोसीडिंग्स के दायरे से बाहर रखा जाएगा। किसी एक ट्रांजैक्शन की परिभाषा को लेकर बिजनेस और टैक्स अधिकारियों के बीच अलग-अलग राय हो सकती है, जिन्हें अब क्रिमिनल आफेंस नहीं माना जाएगा।
पेनल्टी का नियम रहेगा बरकरार
अधिकारियों की गिरफ्तारी की पावर खत्म होने का मतलब टैक्स माफी नहीं है। सरकार की टैक्स वसूली, ब्याज और पेनल्टी लगाने की सिविल पावर्स पूरी तरह बरकरार रहेंगी। छोटे और रूटीन मामलों में टैक्सपेयर बकाया टैक्स, ब्याज और पेनल्टी चुकाकर मामले का निपटारा कर सकेंगे।
सजा के प्रावधान होंगे व्यावहारिक
जानबूझकर की गई बड़ी धोखाधड़ी और टैक्स चोरी के गंभीर मामलों में कोर्ट के जरिए मुकदमा चलाया जाएगा। हालांकि, सजा के प्रावधानों को व्यावहारिक बनाया जा रहा है। 24 में से 9 आपराधिक धाराओं को पूरी तरह खत्म करने और 11 को बरकरार रखने का प्रस्ताव है। न्यूनतम जेल की बाध्यता को हटाकर केवल जुमार्ना लगाने का विकल्प भी कोर्ट के पास रहेगा। मध्यम श्रेणी के अपराधों में अधिकतम सजा 3 साल से घटाकर 2 साल करने का प्रस्ताव है।
कारोबारियों को मिलने वाले प्रमुख फायदे
अधिकारियों की मनमानी पर रोक: किसी भी टैक्स विवाद के अंतिम निर्णय से पहले गिरफ्तारी का डर खत्म होगा।
ईज आफ डूइंग बिजनेस: छोटे और मध्यम कारोबारियों पर कानूनी मुकदमेबाजी का बोझ घटेगा।
भरोसा और राहत: सरकार और कारोबारियों के बीच विश्वास का माहौल बनेगा। छोटे करदाताओं के लिए लेट फीस माफ करने की तैयारी है।

भारतीय शेयर बाजार में आज लंबे समय के बाद अच्छी तेजी देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 355.14 अंक बढ़कर 72,264.84 के स्तर पर पहुंच गया। इसमें 0.49 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 101.00 अंक बढ़ा।
जीएसटी काउंसिल सात अक्टूबर को होने वाली अपनी बैठक में देश के इनडायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़े सुधारों को मंजूरी दे सकती है। सितंबर 2025 में हुए रेट रेशनलाइजेशन (जीएसटी दरों में बदलाव) के बाद सरकार अब नेक्स्ट-जनरेशन जीएसटी के तहत टैक्स प्रशासन को आसान बनाने और कारोबारियों को राहत देने पर काम कर रही है।
भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेल कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल और डीजल के दाम में बड़ी बढ़ोतरी कर दी है। तत्काल प्रभाव से पेट्रोल के दाम में 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल की कीमतों में 3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण किया गया है।
RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के फैसले से पहले जानें कि रेपो रेट बढ़ने, घटने या स्थिर रहने पर आपकी होम लोन की EMI और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर क्या असर पड़ेगा।
टाटा संस के प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर टाटा ट्रस्ट्स में दरार आ गई है। सीनियर ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने बिना सलाह के फैसले लेने पर आपत्ति जताई है।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी भारी गिरावट दर्ज की गई। सुबह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 97.96 अंक के नुकसान के साथ 72,382.33 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 53.71 अंक लुढ़ककर 22,566.75 के स्तर पर आ गया।
अक्टूबर 2026 में सिलेंडर, हवाई ईंधन, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं से जुड़े बदलाव हो रहे हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च मामूली बढ़ेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ता महंगा कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है।
सोने-चांदी की कीमतों में आज लगातार दो दिन की गिरावट के बाद तेजी है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 712 रुपए बढ़कर 1,48,379 रुपए पर आ गया। इससे पहले 29 सितंबर को यह 1,47,667 रुपए पर था। वहीं, एक किलो चांदी 673 रुपए बढ़कर 2,22,273 रुपए पर आ गई है, जो मंगलवार को 2,21,600 रुपए पर थी।
एपल ने भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस 'एपल पे' को लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही आईफोन और एपल वॉच यूजर्स के लिए कार्डलेस और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट का नया ऑप्शन भी अवेलेबल हो गया है। एपल की इस सर्विस के लिए एक्सिस बैंक पहला पार्टनर बना है।
आज भारतीय शेयर बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। सेंसेक्स में मामूली वृद्धि दर्ज हुई, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ 22,700 के नीचे बंद हुआ। दो दिन की बिकवाली के बाद कुछ क्षेत्रों में सुधार दिखा, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया।

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