सभी अपने मन से अलगाव और भेदभाव हटाएं। जो भी हिंदू हैं वो एक हैं। सभी मंदिर, जलस्त्रोत और श्मशान गृह सभी के लिए खुले रहें। किसी का मूल्यांकन उसकी जाति, संपत्ति या भाषा से न करें। सामाजिक समरसता हमारी मजबूती बने। हमें एक दूसरों के घर आना-जाना चाहिए। हमें संकटों पर चर्चा को विस्तार देने की बजाए उनके उपायों पर काम करना चाहिए।

रायपुर से 20 किमी दूर सोनपैरी गांव में आयोजित हिंदू सम्मेलन।
रायपुर। स्टार समाचार वेब
सभी अपने मन से अलगाव और भेदभाव हटाएं। जो भी हिंदू हैं वो एक हैं। सभी मंदिर, जलस्त्रोत और श्मशान गृह सभी के लिए खुले रहें। किसी का मूल्यांकन उसकी जाति, संपत्ति या भाषा से न करें। सामाजिक समरसता हमारी मजबूती बने। हमें एक दूसरों के घर आना-जाना चाहिए। हमें संकटों पर चर्चा को विस्तार देने की बजाए उनके उपायों पर काम करना चाहिए। सक्षम होकर केवल विचारों को आगे बढ़ाने की जगह कुछ करते हुए राह बनानी चाहिए। यह बात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने रायपुर से 20 किमी दूर सोनपैरी गांव में आयोजित हिंदू सम्मेलन के दौरान कही। भागवत ने अरावली पर्वतमाला का उदाहरण देते हुए विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश का मौजूदा विषय हो या परिवार की नई पीढ़ी से जुड़ी समस्या, सभी तरह के संकट केवल चर्चा से नहीं हल होंगे। उनके उपायों पर सामूहिक कार्य जरूरी है।
आदेश की बजाए सहमति बनाने का प्रयास करें
भागवत ने कहा कि अभी केवल हिंदू धर्म में ही ऐसे संत हैं, जिन्होंने ईश्वर को प्रत्यक्ष रूप से देखा है। उनके बताए मार्ग पर चलने से पाप धुल जाते हैं। जब आदमी अकेला पड़ता है तो व्यसनों में पड़ता है। इसे दूर करने के लिए हमें सबसे पहले अपने परिवार से बातचीत बढ़ानी चाहिए। इसे संघ ने मंगल संवाद और कुटुंब प्रबोधन का नाम दिया है। अपने परिवार के साथ सप्ताह में कम से कम एक शाम गुजारनी चाहिए।
गपशप करें, भजन करें
संघ प्रमुख ने कहा-गपशप करें, भजन करें। ऐसे प्रेरक व्यक्तित्वों पर चर्चा करें जिन्होंने हिंदुत्व के आदर्शों के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। किसी भी विषय पर आदेश देने की बजाए सहमति बनाने का प्रयास करें। सरसंघचालक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के उपाय घर से शुरू होने चाहिए। वर्षा जल संरक्षण, प्लास्टिक विरोधी जीवनशैली, पौधारोपण ऐसे उपाय हैं जिन्हें पारिवारिक स्तर पर शुरू करते ही बदलाव सामने आने लगता है। स्वावलंबन के लिए स्वबोध होना जरूरी है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के उत्पादों की जगह देश की कंपनियों को प्राथमिकता दें।
आज संघ का विस्तार देश भर में
संघ के सौ वर्ष पूरा होने के अवसर पर देशभर में आयोजित किए जा रहे हिंदू सम्मेलन पर भागवत ने कहा-नागपुर में 100 साल पहले छोटी सी शाखा से शुरू हुआ संघ का कार्य आज देश के कोने-कोने तक पहुंच गया है। चारों दिशाओं में संघ के कार्यकर्ता अपने खून पसीने से हिंदू राष्ट्र की उन्नति के प्रयास में लगे हुए हैं। संघ ने तय किया कि 100 साल पूरा होने पर हम समाज में जाएंगे। इसीलिए देश भर में हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं।
अरावली पहाड़ियां केवल पत्थरों का ढेर नहीं
भागवत ने कहा कि अरावली पहाड़ियां केवल पत्थरों का ढेर नहीं, बल्कि उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन की रीढ़ हैं। यदि विकास के नाम पर ऐसे प्राकृतिक ढांचों को नष्ट किया गया तो उसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। विकास जरूरी है, लेकिन वह प्रकृति को साथ लेकर ही टिकाऊ हो सकता है। युवाओं से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि रोजगार, करियर और आधुनिक सुविधाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इनके साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है।
भोपाल में कल से दो दिन करेंगे संवाद
इधर, संघ प्रमुख मोहन भागवत कल (शुक्रवार) मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल आएंगे। दो दिनों तक वे भोपाल में युवा, प्रमुख जन और महिलाओं से संवाद करेंगे। दरअसल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर देशभर में जारी प्रवास श्रृंखला के तहत भागवत 2 और 3 जनवरी को मध्यभारत प्रांत के भोपाल विभाग केंद्र पर दो दिवसीय प्रवास पर रहेंगे। इस दौरान वे समाज के विभिन्न वर्गों से सीधे संवाद करेंगे। सरसंघचालक के इस प्रवास के दौरान कुल चार प्रमुख कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें युवा, सामाजिक-धार्मिक नेतृत्व और मातृशक्ति को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है। सभी कार्यक्रम चयनित सहभागियों के साथ संवादात्मक स्वरूप में होंगे।


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