हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों के खातों से जुड़े 590 करोड़ के महाघोटाले और चंडीगढ़ नगर निगम व क्रेस्ट से जुड़े 190 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं के केस में मुख्य सरगना चंडीगढ़ के कारोबारी विक्रम वाधवा को चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शनिवार को खरड़ से गिरफ्तार कर लिया।

खरड़ स्थित एक ठिकाने से उसे गिरफ्तार किया।
चंडीगढ़। स्टार समाचार वेब
हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों के खातों से जुड़े 590 करोड़ के महाघोटाले और चंडीगढ़ नगर निगम व क्रेस्ट से जुड़े 190 करोड़ की वित्तीय अनियमितताओं के केस में मुख्य सरगना चंडीगढ़ के कारोबारी विक्रम वाधवा को चंडीगढ़ पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शनिवार को खरड़ से गिरफ्तार कर लिया। वाधवा लंबे समय से जांच एजेंसियों से बचता फिर रहा था। क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सतविंदर सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने उसकी गतिविधियों पर नजर रखते हुए खरड़ स्थित एक ठिकाने से उसे गिरफ्तार किया। चंडीगढ़ में यह घोटाला दो अलग-अलग वित्तीय अनियमितताओं के रूप में सामने आया था, जो नगर निगम चंडीगढ़ और चंडीगढ़ रिन्यूएबल एनर्जी एंड साइंस एंड टेक्नोलॉजी प्रमोशन सोसायटी (क्रेस्ट ) के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े खातों में पाई गईं। पहला मामला तब सामने आया जब 2026 की शुरुआत में चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड परियोजना बंद होने के बाद उसके फंड नगर निगम को ट्रांसफर किए जा रहे थे। इस दौरान जांच में पाया गया कि रिकॉर्ड में दर्ज करीब 116.84 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद बैंक के सिस्टम में मौजूद ही नहीं हैं।
11 एफडीआर फर्जी
जांच में सामने आया कि करीब 11 एफडीआर फर्जी बनाकर निवेश के प्रमाण के रूप में जमा किए गए थे। नगर निगम द्वारा बैंक से एफडीआर भुनाने की प्रक्रिया के दौरान जब सत्यापन कराया गया तो वे फर्जी निकले। इसके बाद चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज किया।
क्रेस्ट के खातों में भी गड़बड़ी
इसी दौरान क्रेस्ट के खातों में भी गड़बड़ी सामने आई। वित्तीय रिकॉर्ड के मिलान के दौरान अधिकारियों को 303 अनधिकृत जमा और निकासी की प्रविष्टियां मिलीं, जिससे लगभग 75 करोड़ रुपए की कमी पाई गई। इसके बाद बैंक कर्मचारियों ऋषव ऋषि और अभय कुमार समेत अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
शेल कंपनियों के जरिए फंड खपाया
जांच एजेंसियों के अनुसार वाधवा ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में जमा सरकारी फंड को कथित तौर पर शेल कंपनियों, ज्वेलर्स और अन्य कारोबारी संस्थाओं के जरिए डायवर्ट करने में अहम भूमिका निभाई। यह धन मूल रूप से सरकारी विभागों द्वारा फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में रखा जाना था, लेकिन इसे बिना अनुमति के कई वित्तीय लेनदेन के जरिए दूसरी जगहों पर ट्रांसफर कर दिया गया।
100 करोड़ ज्वेलरी कारोबारियों को दिया
जांच में सामने आया है कि स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी का इस्तेमाल बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए किया गया। इसके बाद यह रकम कई खातों में घुमाकर ज्वेलर्स को कथित फर्जी बिलों के जरिए भेजी गई। जांच एजेंसियों का अनुमान है कि 100 करोड़ ज्वेलरी कारोबारियों को ट्रांसफर किए गए।
रियल एस्टेट कंपनियों में लगाया पैसा
जांच में यह भी सामने आया है कि घोटाले की रकम का बड़ा हिस्सा विक्रम वाधवा से जुड़े बैंक खातों तक पहुंचा। बाद में इस पैसे को उसकी रियल एस्टेट कंपनियों प्रिज्मा रेजीडेंसी एलएलपी, किनस्पायर रियल्टी एलएलपी और मार्टेल बिल्डवेल एलएलपी में निवेश के रूप में लगाया गया, ताकि अवैध कमाई को छिपाया जा सके।


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