दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर राज्य सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को राहत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू या क्यूरेटिव पिटीशन दायर की जाए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है।
भोपाल। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह ने मध्यप्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर राज्य सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को राहत देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू या क्यूरेटिव पिटीशन दायर की जाए। दिग्विजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में पहले से ही व्यवसायिक परीक्षा मंडल के माध्यम से मेरिट के आधार पर शिक्षकों की भर्ती होती रही है। ऐसे में वर्तमान में कार्यरत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त किया जाना चाहिए, खासकर उन शिक्षकों को जो 25 साल से सेवा दे रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आरटीई कानून को प्रदेश में लागू होने की तिथि से ही प्रभावी माना जाना चाहिए और उसी आधार पर निर्णय लिया जाना चाहिए।

सरकार को आना चाहिए आगे
दिग्विजय सिंह ने कहा कि शिक्षक द्वारा व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने से उन्हें सीनियर वकीलों की सेवाएं लेनी पड़ेंगी, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। ऐसे में राज्य सरकार को आगे आकर शिक्षकों के हित में पहल करनी चाहिए।
मध्यप्रदेश का पक्ष नहीं सुना गया
कांग्रेस सांसद ने सीएम को लिखे अपने पत्र में उल्लेख किया कि सिविल अपील क्रमांक 1385-1386 (2025) महाराष्ट्र से संबंधित मामला था, जिसमें मध्यप्रदेश पक्षकार नहीं था। इसलिए राज्य सरकार को अपना पक्ष सुप्रीम कोर्ट में रखने का अवसर मिलना चाहिए।
अंतिम निर्णय तक राहत मिले
कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि जब तक सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक मध्यप्रदेश में कार्यरत शिक्षकों से टीईटी परीक्षा न ली जाए। साथ ही प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से टीईटी की बाध्यता से राहत दी जाए, ताकि उनकी नौकरी पर कोई संकट न आए।
उम्रदराज पर दबाव उचित नहीं
दिग्विजय सिंह ने सवाल उठाया कि 40 से 50 वर्ष की आयु पार कर चुके शिक्षकों से दोबारा परीक्षा लेना क्या उचित है। उन्होंने कहा कि इससे शिक्षकों पर मानसिक और आर्थिक दबाव बढ़ेगा। उन्होंने बताया कि शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने उनसे मुलाकात कर अपनी मांगें रखी हैं, जिसके आधार पर उन्होंने सरकार से हस्तक्षेप कर शिक्षकों के हित में कदम उठाने की अपील की है।


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