पटना हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि हिंदू विवाह को वैध साबित करने के लिए केवल मतदाता सूची या भरण-पोषण का आदेश पर्याप्त नहीं है। विवाह हिंदू रीति-रिवाज और आवश्यक रस्मों के साथ संपन्न हुआ हो, इसका प्रमाण देना जरूरी है।

पटना हाईकोर्ट ने कहा-सिर्फ कागजातों से नहीं मानी जाएगी शादी
अदालत की दो टूक-सप्तपदी जैसी रस्मों का संपन्न होना महत्वपूर्ण
पटना। स्टार समाचार वेब
पटना हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि हिंदू विवाह को वैध साबित करने के लिए केवल मतदाता सूची या भरण-पोषण का आदेश पर्याप्त नहीं है। विवाह हिंदू रीति-रिवाज और आवश्यक रस्मों के साथ संपन्न हुआ हो, इसका प्रमाण देना जरूरी है। जहां विवाह में सप्तपदी जैसी रस्म प्रचलित हो, वहां उसके संपन्न होने का प्रमाण भी महत्वपूर्ण है। न्यायाधीश बिबेक चौधरी और न्यायाधीश राणा विक्रम सिंह की खंडपीठ ने यह टिप्पणी दुरगावती देवी की ओर से दायर अपील को खारिज करते हुए की। अदालत ने सिवान फैमिली कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें महिला को प्रतिवादी सचिता चौधरी की कानूनी पत्नी मानने से इनकार किया गया था।
देवर से शादी का दावा, पति ने किया इनकार
मामले के अनुसार दुरगावती देवी की शादी 22 मई 1990 को सचिता चौधरी के बड़े भाई सुरेश चौधरी से हुई थी। सुरेश की 1997 में मौत हो गई। महिला का दावा था कि इसके बाद परिवार के दबाव और सहमति से उसने सुरेश के छोटे भाई सचिता चौधरी से दूसरी शादी की और दोनों पति-पत्नी के रूप में रहने लगे। बाद में उसने भरण-पोषण का मुकदमा भी किया, जिसमें उसे प्रतिमाह एक हजार रुपये का भरण-पोषण मंजूर हुआ था। सचिता चौधरी ने दूसरी शादी से पूरी तरह इनकार किया। फैमिली कोर्ट ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद 26 फरवरी 2020 को महिला को उनकी कानूनी पत्नी मानने से इनकार कर दिया।
न तारीख बता सकीं, न जगह और न रस्म
हाईकोर्ट ने साक्ष्यों की गहन समीक्षा करते हुए पाया कि महिला अपने कथित दूसरे विवाह की तारीख, स्थान और विवाह में हुई रस्मों का स्पष्ट विवरण नहीं दे सकीं। उनके गवाह भी यह नहीं बता सके कि विवाह कब और कहां हुआ तथा कौन-कौन सी धार्मिक रस्में निभाई गईं। किसी ने सप्तपदी या सिंदूरदान का भी स्पष्ट उल्लेख नहीं किया। अदालत ने यह भी पाया कि कथित विवाह में शामिल पुरोहित के नाम को लेकर गवाहों के बयान में विरोधाभास था।
वोटर लिस्ट विवाह का निर्णायक प्रमाण नहीं
पीठ ने स्पष्ट किया कि वोटर लिस्ट में किसी महिला को किसी व्यक्ति की पत्नी के रूप में दर्ज किया जाना अपने आप में वैध विवाह का निर्णायक प्रमाण नहीं है। इस मामले में 2004 की वोटर लिस्ट में दुरगावती को सचिता की पत्नी बताया गया था, जबकि 2009 की दूसरी वोटर लिस्ट में उन्हें उनके पहले पति सुरेश चौधरी की पत्नी बताया गया। इसी तरह भरण-पोषण के मामले में दिया गया आदेश भी विवाह की वैधता तय नहीं करता। हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 125 के तहत कार्यवाही में अदालत का मुख्य उद्देश्य भरण-पोषण तय करना होता है, विवाह की वैधता का अंतिम निर्णय करना नहीं।
रजिस्ट्रेशन भी रस्मों की कमी पूरी नहीं कर सकता
पीठ ने कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 7 के तहत आवश्यक रस्मों के बिना विवाह को वैध नहीं माना जा सकता। केवल विवाह का पंजीकरण भी ऐसी कमी को दूर नहीं कर सकता। पहले विवाह का विधिवत संपन्न होना जरूरी है। अदालत ने अंतत: कहा कि फैमिली कोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है।


जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
अहमदाबाद 2008 सीरियल ब्लास्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला लेते हुए मौत की सजा पाए दोषी अहमद बाव उर्फ अब्बू अबूबकर बरेलवी की फांसी पर रोक लगा दी है। गुजरात हाईकोर्ट ने इसके पहले इसकी सजा को बरकरार रखा था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों के पक्ष में अहम फैसला सुनाते हुए बच्चों को संपत्ति से बेदखल करने के नियम को वैध ठहराया है।
मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में कोर्ट ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को दोषी ठहराया है। नीले ड्रम में शव छिपाने के मामले में 14 अक्टूबर को सजा सुनाई जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पटाखों पर पूरा बैन नहीं लगेगा और न ही 24 घंटे आतिशबाजी की इजाजत होगी। कोर्ट ने ग्रीन क्रैकर्स के लिए समय तय करने और शर्तों के साथ छूट देने के संकेत दिए हैं।
मोदी कैबिनेट ने रबी फसलों के लिए MSP में बढ़ोतरी, PM DHARA योजना और दिल्ली ट्रैफिक सिस्टम समेत 2.79 लाख करोड़ रुपये के कुल तीन बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है।
मथुरा कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने बार-बार सुनवाई टलने पर नाराजगी जताई। कोर्ट ने मामले को जिंक्स्ड बताते हुए 6 नवंबर को अगली सुनवाई तय की है।
खड़गे ने कहा कि मोदी- शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने आयोग को कठपुतली बना दिया है। भाजपा चुनाव आयोग के साथ वोट चोरी कर रही है।
गुजरात के आनंद जिले में अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेसवे पर बुधवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हो गया। सूरत से राजस्थान जा रही एक लग्जरी बस और ट्रक के बीच जोरदार टक्कर हो गई। इस हादसे में 5 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 5 अन्य यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।
भारत चुनाव आयोग ने देशभर के मतदाताओं और नए आवेदकों को बड़ी राहत दी है। जिन राज्यों में एसआईआर का काम पूरा हो चुका है, वहां आनलाइन फॉर्म-6 से अतिरिक्त घोषणा-पत्र को हटा दिया गया है। देर रात आयोग के ईसीआईएनईटी पोर्टल पर यह बदलाव लागू कर दिया गया।
जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता हाथ लगी है। यूसमर्ग के कोराग इलाके में मंगलवार देर रात हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा के शीर्ष कमांडर हाशिम मूसा को मार गिराया गया। सुरक्षाबलों ने इस मुठभेड़ को ऑपरेशन कोराग नाम दिया है।