आर्टेमिस-2 ने 4,06,773 किमी की दूरी तय कर इतिहास रच दिया है। जानें 7 अप्रैल 2026 को होने वाले इस लूनर फ्लाईबाई और स्पेसएक्स के स्टारशिप लैंडर के बारे में पूरी जानकारी।

स्टार समाचार वेब।
मानवता एक बार फिर गहरे अंतरिक्ष में अपने कदम बढ़ा रही है। नासा का आर्टेमिस-2 मिशन न केवल चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में प्रवेश कर चुका है, बल्कि इसने मानव अंतरिक्ष उड़ान के इतिहास में सबसे अधिक दूरी तय करने का नया कीर्तिमान भी स्थापित कर दिया है।
आर्टेमिस-2 के दल ने पृथ्वी से 4,06,773 किलोमीटर की दूरी तय की है। यह दूरी 1970 में अपोलो-13 द्वारा बनाए गए 4,00,171 किलोमीटर के रिकॉर्ड से लगभग 2,500 किलोमीटर अधिक है। पिछले पांच दशकों से अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी के नजदीकी ऑर्बिट (LEO) तक ही सीमित थे, लेकिन आर्टेमिस-2 ने इस सीमा को तोड़ दिया है।
चार अंतरिक्ष यात्रियों वाला यह दल 7 अप्रैल, 2026 को भारतीय समयानुसार रात 12:15 बजे चंद्रमा के सबसे करीब से गुजरेगा। यह यान चंद्रमा के उस 'दूरस्थ हिस्से' (Far Side) का चक्कर लगाएगा, जहाँ अपोलो मिशन के बाद से आज तक कोई इंसान नहीं पहुँचा है।
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS): पृथ्वी से मात्र 400 किमी ऊपर।
चंद्रमा की औसत दूरी: पृथ्वी से लगभग 3,84,633 किमी।
आर्टेमिस-2 की अधिकतम दूरी: पृथ्वी से 4,06,773 किमी।
कई लोगों के मन में सवाल है कि मानव मिशन होने के बावजूद यह दल चांद की सतह पर कदम क्यों नहीं रखेगा। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
ओरायन यान की सीमाएं: इस मिशन में उपयोग किया जा रहा ओरायन अंतरिक्ष यान केवल यात्रा के लिए है, इसमें चंद्रमा पर उतरने के लिए आवश्यक 'लूनर लैंडर' तकनीक नहीं है।
विकास के अधीन लैंडर: चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए विशेष लैंडर (स्टारशिप HLS) का निर्माण एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स कर रही है, जो अभी परीक्षण के दौर में है।
मिशन का उद्देश्य: आर्टेमिस-2 का प्राथमिक लक्ष्य गहरे अंतरिक्ष में जीवन रक्षक प्रणालियों और अंतरिक्ष यान की क्षमताओं की जांच करना है। ठीक इसी तरह अपोलो-8 के दौरान भी लैंडर तैयार न होने के कारण लैंडिंग नहीं की गई थी।
चंद्रमा की सतह पर इंसानों की वास्तविक लैंडिंग आर्टेमिस-3 मिशन के दौरान की जाएगी।
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