रीवा में शांति रॉयल स्टेट द्वारा बीहर नदी पर बनाई गई अवैध दीवार आखिरकार नदी की धार के सामने टिक नहीं पाई। प्रशासन और कॉलोनाइजरों की मिलीभगत ने शहर को बाढ़ के खतरे में डाल दिया। नदी की धारा रोकने से शहर जलमग्न हो गया, ईको पार्क, बोदाबाग और सैनिक स्कूल तक पानी पहुंचा। सवाल उठता है—क्या अब भी कार्रवाई होगी या फिर अगली आपदा का इंतजार किया जाएगा?

प्रशासन और कॉलोनाइजरों के गठजोड़ ने रीवा शहर को खतरे में डाला था
रीवा, स्टार समाचार वेब
कालोनाइजरों से प्रशासन के गठजोड़ ने रीवा को फिर बाढ़ की चपेट में खड़ा कर दिया था। शहर की कालोनियां बीहर नदी की बाढ़ के कारण जलमग्न हो गई थीं। इस बाढ़ की वजह शांति रॉयल स्टेट की नदी में खड़ी की गई दीवार थी। इसी दीवार के कारण बीहर का पानी बैक मारने लगा था जो रीवा की तरफ बढ़ चला था। इस दीवार को प्रशासन ने तो नहीं तोड़ा लेकिन बीहर की धार ने उसे तहस नहस कर डाला। कालोनी की दीवार भी जमींदोज कर दी। अब यह आधी गिरी दीवार लोगों के लिए खतरा बन गई है।
रीवा 2016 के बाद फिर जुलाई 2016 में बाढ़ की चपेट में आया। बाढ़ का कारण इस बार भी प्रशासनिक लापरवाही सामने आई। इस बार प्रशासन का अवैध कालोनाजरों को खुला संरक्षण देना है। करहिया में बीहर नदी के किनारे बसी कई एकड़ भूमि में शांति रॉयल स्टेट फैला हुआ है। पहले इसका दायरा सीमित था लेकिन बाद में इसने आसपास की छोटी छोटी प्लाटिंग को भी अपने कब्जे में ले लिया। इस कॉलोनाइजर ने अपनी सीमाएं यहीं पर सीमित नहीं की। प्राइवेट जमीनों को कब्जे मे लेने के बाद बीहर नदी पर भी अवैध अतिक्रमण किया गया।
नदी पर मोटी दीवार खड़ी कर दी गई। इस दीवार ने बीहर नदी की धार को रोकने का काम किया। वहीं नदी के पाट सकरे हो गए। इस दीवार के कारण ही शुक्रवार को हुई बारिश का असर शनिवार को दिखा। शनिवार को नदी में इतना पानी आया कि वह रफ्तार पकड़ ही नहीं पाई। करहिया में खड़ी की गई नदी पर कालोनाइजर की दीवार ने पानी को दूसरी दिशा देना शुरू कर दिया था। इसके कारण ईको पार्क तो डूबा ही साथ ही नदी का पानी बोदाबाग की तरफ बढ़ गया। करहिया से बोदाबाग जाने वाली सड़क पर करीब 6 फीट पानी चढ़ गया। सैनिक स्कूल की बाउण्ड्री वाल तक डूब गई। गनीमत रही कि अगले दिन बारिश नहीं हुई वर्ना पूरा रीवा ही डूब जाता। इस बाढ़ के पीछे प्रशासन की उदासीनता और कालोनाइजर से गठजोड़ सबसे बड़ा कारण बनी।
एडीएम ने निर्माण पर लगाई थी रोक, कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं मिले थे
शांति रॉयल स्टेट , शांति विला, शांति अपार्टमेंट जहां बना है। वहां पर कुछ महीनों पहले रीवा हुजूर की एसडीएम आईएएस वैशाली जैन ने रेड मारी थी। मौके पर सारा काम रुकवा दिया था। कालोनाइजर के पास कोई वैध दस्तावेज भी नहीं मिले थे। सरपंच और सचिव को कालोनी बसाने और प्लाटिंग की अनुमति देने पर एफआईआर के भी निर्देश दिए थे। इंट्री गेट पर जेसीबी से तोड़फोड़ भी कराई गई थी। सारा काम रोक दिया गया था। इस कार्रवाई से उम्मीद थी कि अवैध कालोनी पर रोक लग जाएगी। हालांकि इसके बाद सारा मामला ही ठंडा पड़ गया। फिर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यदि उसी समय यह कार्रवाई की जाती तो रीवा में बाढ़ नहीं आती।
प्लॉट और विला लेने वालों की जान को भी खतरे में डाला
शांति रॉयल स्टेट में करोड़ों के मकान और विला बेचा जाता है। यहां कई लोगों ने आवास का निर्माण भी कराया है। नदी को पाटकर दीवार खड़ी की गई और पाट पर ही पार्क बना दिया गया। रिवर व्यू के लिए बनाया गया यही स्पाट अब लोगों के लिए खतरा बन गया था। कालोनाजर ने नदी किनारे जो निर्माण किया था वह एक ही बारिश और बाढ़ में बह गया। गनीमत रही कि मौके पर कोई नदी का नजारा लेने के लिए नहीं गया था, वर्ना बड़ी जनहानि भी संभव थी। इतना ही नहीं नदी के किनारे प्लाट की बुकिंग कराने वाले भी अब दहशत में आ गए हैं। लगातार इन कालोनियों का किनारा बारिश में डूब रहा है। पूंजी फंसने का डर सताने लगा है।
दो मीटर मोटी दीवार का मिट गया नामोनिशान
बीहर नदी पर शांति रॉयल स्टेट ने दो मीटर पत्थर की दीवार बनाई थी। बाढ़ में इस दीवार का नामोंनिशान मिट गया। दीवार टुकड़े टुकड़े हो गई है। अब इससे स्थिति और हालात का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसके अलवा कालोनी की सरहद पर जो दीवार बनाई गई थी। वह भी गिर गई है, जो बची है वह टेड़ी हो गई है। यह कभी भी किसी पर धरासाई हो सकती है।
शाही रिव्हर व्यू कालोनी ने भी बढ़ाया खतरा
एक तरफ शांति रॉयल स्टेट ने नदी पर कब्जा किया हुआ है तो दूसरी तरफ नदी के किनारे ही शाही रिव्हर व्यू बसा दी गई है। इसके खिलाफ कार्रवाई और एनजीटी के नियमों का उल्लंघन करने की शिकायत प्रशासन से की गई थी। इस पर प्रशासन ने एक्शन भी लिया था। नदी पर कालोनाइजर ने मिट्टी डाल कर पाटने की कोशिश की थी। दीवार खड़ी की जा रही थी। इस पर रोक लगा दी गई थी। हालांकि यह सिर्फ खानापूर्ति ही थी। अब भी कालोनी मौके पर यथावत है। लगातार निर्माण कार्य जारी है। नदी के किनारे तक कंस्ट्रक्शन किया जा रहा है। इससे रीवा शहर पर खतरा मंडराने लगा है।
शांति रॉयल स्टेट और शाही रिवर व्यू ने एनजीटी के नियमों का पालन नहीं किया है। नदी को पाट कर प्लाटिंग कर दी गई थी। इसकी शिकायत कई जगह की गई। प्रशासन ने सिर्फ एक बार खानापूर्ति की लेकिन सख्त कार्रवाई नहीं की। इसके कारण ही शहर में बाढ़ जैसी आपदा का खतरा बढ़ गया है।
बीके माला, सामाजिक कार्यकर्ता रीवा


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