भरहुत नगर में आवासीय मकानों के व्यावसायिक उपयोग पर हाउसिंग बोर्ड की कार्रवाई के बीच रहवासियों ने फ्री होल्ड प्रक्रिया में कथित असमानता पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर से निष्पक्ष जांच की मांग की।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
भरहुत नगर में आवासीय मकानों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर हाउसिंग बोर्ड की कार्रवाई अब केवल नोटिस और लीज निरस्तीकरण तक सीमित नहीं रह गई है। गुरुवार को बड़ी संख्या में रहवासी सामने आए और उन्होंने कार्रवाई की प्रक्रिया के साथ-साथ फ्री होल्ड को लेकर कथित तौर पर अपनाई गई दोहरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए। रहवासियों का कहना है कि यदि कॉलोनी के किसी एक आवास को फ्री होल्ड करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है तो दूसरे पात्र भवन मालिकों के लिए यही रास्ता क्यों नहीं खोला जा रहा? भरहुत नगर में करीब 50 एकड़ क्षेत्र में विभिन्न आय वर्गों के 858 आवासीय मकान विकसित किए गए हैं। हाउसिंग बोर्ड की ओर से व्यावसायिक उपयोग के मामलों में 24 भवन मालिकों को नोटिस दिए जाने और छह मकानों की लीज निरस्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। बोर्ड का तर्क है कि कई मकानों में मूल स्वरूप में बदलाव कर विद्यालय, प्रतिष्ठान, भोजनालय, चिकित्सालय और कार्यालय जैसी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। लेकिन कार्रवाई के बीच अब विवाद का दूसरा पहलू भी सामने आया है।
रहवासियों का दावा है कि एक आवास को कथित रूप से बिना व्यापक जानकारी के फ्री होल्ड किए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई, जिसकी जानकारी सामने आने के बाद लोगों में असंतोष बढ़ गया। उनका सवाल है कि जब फ्री होल्ड का रास्ता किसी एक संपत्ति के लिए उपलब्ध हो सकता है तो समान परिस्थितियों वाले अन्य भवन मालिकों के मामलों पर भी उसी नियम और प्रक्रिया को लागू किया जाना चाहिए। रहवासियों ने आरोप लगाया कि भरहुत नगर पूरी तरह व्यवसायिक क्षेत्र से जुड़ा है और यहां सालों से कई विद्यालय, होटल, कार्यालय समेत कई व्यवसायिक गतिविधियां संचालित हैं लेकिन हाउसिंग बोर्ड प्रबंधन अब तक आंखों में पट्टी बांधे रहा जबकि कई प्रतिष्ठान बकायदे अनुमति लेकरसंचालित किए जा रहे हैं।
कार्रवाई पर नहीं प्रक्रिया पर सवाल
रहवासियों का कहना है कि वे नियमों के पालन के विरोधी नहीं हैं। उनका मूल सवाल यह है कि दशकों पुरानी कॉलोनी में यदि व्यावसायिक उपयोग नियमों के अनुरूप नहीं है तो कार्रवाई का स्पष्ट और समान मापदंड तय किया जाए। सभी भवन मालिकों को समान अवसर दिया जाए और पात्रता के आधार पर फ्री होल्ड की प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक की जाए। यही वजह है कि मामला अब केवल कुछ दुकानों या व्यावसायिक गतिविधियों को बंद कराने का नहीं रह गया है। रहवासी पारदर्शिता, समानता और एक जैसी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि एक ही कॉलोनी में अलग-अलग संपत्तियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था होने की धारणा ही वर्तमान आक्रोश का प्रमुख कारण बनी है।
कलेक्टर से हस्तक्षेप की मांग
रहवासियों के साथ आक्रोश प्रदर्शन में शामिल रहे समाजसेवी शंभू चरण दुबे ने कलेक्टर से मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि हाउसिंग बोर्ड की कार्रवाई और फ्री होल्ड से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा पात्र भवन मालिकों के लिए स्पष्ट नीति सामने रखी जाए। रहवासियों ने भी मांग की है कि फ्री होल्ड किए गए आवास की प्रक्रिया और उसके आधार को सार्वजनिक किया जाए, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके।

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