भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का 'शाखा संगम' और स्वयंसेवक एकत्रीकरण कार्यक्रम आयोजित हुआ। मुख्य वक्ता दत्तात्रेय होसबाले ने भारत की 5 हजार साल पुरानी सभ्यता और आपदा के समय समाज की सहभागिता पर विस्तार से अपने विचार रखे।

भोपाल। स्टार समाचार वेब
भोपाल में रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 'शाखा संगम' और विशाल स्वयंसेवक एकत्रीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें संघ के भोपाल विभाग में आने वाले 5 जिलों से लगभग 30 हजार स्वयंसेवकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने भारत की प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और विभिन्न प्राकृतिक या वैश्विक आपदाओं के समय समाज की बढ़ती हुई सहभागिता पर महत्वपूर्ण बातें रखीं।
कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित रहे सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत के गौरवशाली इतिहास से की। उन्होंने कहा कि भारत की पांच हजार वर्षों की लंबी सभ्यता और संस्कृति की यात्रा इस बात गवाह है कि देश ने हर बड़े संकट का डटकर सामना किया है। हर आपदा और संघर्ष के बाद भारत और अधिक मजबूती के साथ उठकर खड़ा हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि हमारी संस्कृति की इस अनवरत यात्रा को आगे बढ़ाने और अक्षुण्ण रखने के लिए देश के महानुभावों ने हमेशा से ही एक अविनाशी और मृत्युंजय समाज का निर्माण किया है, जो किसी भी परिस्थिति में टूटना नहीं जानता।
समाज सेवा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि आपदाओं के समय केवल संघ के स्वयंसेवकों तक ही राहत कार्य सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरा समाज आगे आता है। उन्होंने कोरोना महामारी के उस कठिन काल को याद किया जब हर तरफ संकट के बादल मंडरा रहे थे। होसबाले ने कहा कि कोविड संकट के दौरान संघ के स्वयंसेवक समाज के सहयोग से लगातार पीड़ितों की सेवा में जुटे रहे, लेकिन इस दौरान सबसे सुखद पहलू यह रहा कि पूरा समाज भी बढ़-चढ़कर आगे आया और मानवता की सेवा में अपना योगदान दिया।
अपने संबोधन के दौरान हाल ही में असम में आए बाढ़ संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने एक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वे हाल ही में असम गए थे और वहां के शिवसागर व अपर असम क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों की स्थिति देखी, तो उन्हें 'सेवा भारती' के माध्यम से राहत कार्यों में जुटे कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट मिली। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि इस बार बाढ़ राहत कार्यों में केवल पारंपरिक रूप से संघ के स्वयंसेवक या प्रशासनिक दल ही नहीं पहुंचे, बल्कि समाज के तमाम विभिन्न वर्ग, देश के ऊर्जावान नौजवान और कॉलेज के विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में सामने आए। संकट की इस घड़ी में आम जनता का इस प्रकार राहत कार्यों में जुटना इस बात का प्रमाण है कि आपदा के समय पूरा समाज एकजुट होकर खड़ा हो जाता है और यही एक सशक्त समाज की वास्तविक पहचान है।
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