चित्रकूट के संत समाज ने गैर-नियोजित विकास, सीवर लाइन की लेटलतीफी, धार्मिक स्वरूप की अनदेखी और मादक पदार्थों की बिक्री पर नाराज़गी जताई। कामदगिरी पीठम में आयोजित बैठक में संतों ने चेतावनी दी कि विकास कार्यों में संत समाज की सहभागिता सुनिश्चित की जाए और धर्म नगरी की पवित्रता व पहचान को बरकरार रखा जाए।

हाइलाइट्स
चित्रकूट, स्टार समाचार वेब
सीवर लाइन की लेटलतीफी व गैर नियोजित निर्माण कार्यों के अलावा संत समाज की उपेक्षा समेत कई मुद्दों को लेकर संतों की नाराजगी सामने आई है। गुरुवार को प्रमुख प्रदक्षिणा द्वार स्थित कामदगिरी पीठम में भगवान कामतानाथ की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में महंतों व संतों की नाराजगी चित्रकूट के बेतरतीब विकास पर सामने आई। इस दौरान महामंडलेश्वर रामनरेश दास, संतोषी अखाड़ा के महंत रामजी दास, निर्वाणी अखाड़ा व पूर्वी मुखारबिंद के महंत सत्य प्रकाश, कामदगिरी पीठम के उत्तराधिकारी डॉ. मदनगोपाल दास, सनकादिक महाराज, रामायण कुटीर के महंत रामहृदय दास, भगवत आराधना के महंत गोविंद दास, राम प्यारे शरण महाराज, रामप्रिय दास, गोदावरी के महंत बालकदास समेत तकरीबन 250 महंत व संतों के अलावा चित्रकूट के वरिष्ठ समाजसेवी हेमराज चौबे नन्हें राजा, कार्तिकेय द्विवेदी, नगर परिषद के सीएमओ अंकित सोनी, तहसीलदार कमलेश सिंह भदौरिया समेत कई कर्मचारी व गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
बरकरार रखें धार्मिक व ऐतिहासिक स्वरूप
संत समाज ने चित्रकूट के विकास के चल रहे कामोें को लेकर भी चेताते हुए कहा कि विकास के दौरान इस बात का ध्यान रखा जाए कि चित्रकूट का ऐतिहासिक व धार्मिक स्वरूप प्रभावित न हो। ऐसे में यह भी आवश्यक है कि चित्रकूट विकास प्राधिकरण में होने वाले चित्रकूट विकास के निर्णयों में संत समाज के सुझाव व सहभागिता सुनिश्चित की जाए।
सीवर लाइन पर सबसे अधिक नाराजगी
मंदाकिनी के अस्तित्व को संकट में डालने वाले चित्रकूट के तकरीबन पांच हजार घरों के प्रदूषित पानी को उपचारित करने की तकरीबन 12 साल पुरानी योजना के अब तक परवान न चढ़ने पर संत समाज ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सीवर लाइन के पूरा होने मेें अब लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। संत समाज ने सीवर लाइन की तकनीकी खामियों की ओर भी ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा कि इसमें अमानक स्तर की छोटी पाइप लाइन डाली जा रही है जिससे आने वाले समय में सीवर लाइन से मंदाकिनी को प्रदूषित होने से बचाने की मंशा पर पानी फिर सकता है।
प्राचीन मुखारबिंद को अखाड़े से अलग करने पर चर्चा
इस दौरान प्राचीन मुखारबिंद को निर्वाणी अखाड़े से अलग करने को लेकर भी संत समाज के बीच चर्चा हुई। जिसमें संत समाज ने धार्मिक संस्थाओं में बढ़ते प्रशासनिक दखल को लेकर ऐतराज जताया। इस दौरान संत समाज ने कहा कि अखाड़ों की अति प्राचीन परम्परा रही है, जिसका पालन किया जाना चाहिए।
मादक पदार्थों की बिक्री पर लगे अंकुश
संत महात्माओं ने सरकार द्वारा चित्रकूट में हर प्रकार के मादक पदार्थों की बिक्री में लगाए गए प्रतिबंधों का स्वागत तो किया लेकिन इस प्रतिबंध का जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन न होने पर खीझ भी दिखाई। संतों ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद धर्म नगरी की गली-गली में शराब व गांजे जैसे मादक पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही है जिससे सरकार की धर्म स्थलों को मादक पदार्थों से मुक्त करने की मंशा पर पानी फिर रहा है और चित्रकूट का माहौल अराजक हो रहा है। धर्म नगरी में बढते अपराधों की बड़ी वजह मादक पदार्थों की बिक्री को बताया और इस पर अंकुश लगाने की मांग की।
चित्रकूट का हो शैक्षणिक उन्नयन
बैठक में मौजूद धर्म नगरी के वरिष्ठ समाजसेवी हेमराज चौबे नन्हेराजा ने चित्रकूट में शैक्षणिक संस्थाओं को और सशक्त बनाने की बात कहते हुए कहा कि चित्रकूट अत्रिमुनि के गुरुकुल के लिए विश्वविख्यात था। चित्रकूट की पहचान शिक्षा की रही है ऐसे में यहां गुरुकुल की तर्ज पर शैक्षणिक उन्नयन की आवश्यकता है। उनकी इस मांग का संत समाज ने भी स्वागत किया।
बिना बताए ही आ रहा ‘विकास’
समाजसेवी व भाजपा नेता कार्तिकेय द्विवेदी ने बैठक में गैर नियोजित विकास का मुद्दा उठाया। इस दौरान कार्तिकेय ने सवाल उठाया कि चित्रकूट का विकास क्या केवल ठेकेदारों के लिए हो रहा है? उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि चित्रकूट में होने वाले विकास कार्यों को लेकर जन सुझावों को आमंत्रित नहीं किया जाता है। जिसके चलते किसी को यह पता ही नहीं चलता कि चित्रकूट में किस प्रकार के विकास कार्य हो रहे हैं और उनकी वाकई धर्म नगरी के वासिंदों को जरूरत है या नहीं?

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