चित्रकूट की पवित्र मंदाकिनी नदी, जहाँ प्रभु श्रीराम ने वनवास काल बिताया, आज अतिक्रमण और प्रदूषण से कराह रही है। एनजीटी के निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक लापरवाही और अवैध निर्माण से मंदाकिनी का अस्तित्व खतरे में है। संत समाज नाराज है और संरक्षण की मांग उठा रहा है।
चित्रकूट में संत समाज ने नगर की उपेक्षा और अधूरे विकास कार्यों पर नाराजगी जताई। बैठक में संतों ने मंदाकिनी नदी को गंदगी से बचाने के लिए सीवर योजना शीघ्र पूर्ण कराने, दीपावली से पहले सड़क और नाली निर्माण पूरा करने, मल्टीलेवल पार्किंग बनाने और धार्मिक संस्थाओं में प्रशासनिक दखल पर रोक लगाने की मांग की। सांसद गणेश सिंह और विधायक सुरेंद्र गहरवार ने संतों को आश्वासन दिया कि समस्याओं का समाधान जल्द होगा।
चित्रकूट के संत समाज ने गैर-नियोजित विकास, सीवर लाइन की लेटलतीफी, धार्मिक स्वरूप की अनदेखी और मादक पदार्थों की बिक्री पर नाराज़गी जताई। कामदगिरी पीठम में आयोजित बैठक में संतों ने चेतावनी दी कि विकास कार्यों में संत समाज की सहभागिता सुनिश्चित की जाए और धर्म नगरी की पवित्रता व पहचान को बरकरार रखा जाए।















