सतना के कुदरी कला गांव में 17 वर्षीय अजय कोल पर मगरमच्छ ने हमला किया। 20 मिनट तक संघर्ष कर उसने खुद को बचाया। गंभीर रूप से घायल अजय का अस्पताल में इलाज जारी है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
‘अगर हिम्मत टूट जाती, तो शायद मैं आज जिंदा नहीं होता’ यह कहना है अस्पताल में इलाजरत 17 साल के अजय कोल का। जिसने मगरमच्छ के जबड़े में फंसने के बाद भी हार नहीं मानी। गुरुवार की सुबह अमरपाटन वनपरिक्षेत्र के कुदरी कला गांव में हुए इस हमले में अजय ने करीब 20 मिनट तक मौत से सीधा मुकाबला किया और आखिरकार खुद को छुड़ा लिया।
जानकारी के मुताबिक रामनगर क्षेत्र के कुदरी खुर्द गांव निवासी अजय कोल रोज की तरह सुबह करीब 10 बजे बकरियां चराने जंगल की ओर गया था। आसपास के जंगल और जलाशय उसके लिए नए नहीं थे। बकरियां पानी पीने के लिए पास के जलाशय में पहुंचीं तो अजय भी उनके पास जाकर खड़ा हो गया। उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि पानी के भीतर एक मगरमच्छ घात लगाए बैठा है। जैसे ही वह कुछ देर के लिए किनारे पर रुका, अचानक पानी में हलचल हुई और पलक झपकते ही मगरमच्छ ने उसके दाएं पैर की पिंडली को अपने मजबूत जबड़ों में जकड़ लिया।
गिरा लेकिन नहीं टूटा हौसला
अचानक हुए हमले से अजय जमीन पर गिर पड़ा। दर्द और डर दोनों एक साथ हावी थे, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। मगरमच्छ उसे पानी की ओर खींचने की कोशिश कर रहा था, और अजय पूरी ताकत से खुद को बाहर की ओर खींच रहा था। इस दौरान उसने आसपास पड़े पत्थर, लकड़ियां और मिट्टी के ढेले उठाकर मगरमच्छ पर लगातार वार करना शुरू कर दिया। वह बिना रुके करीब 20 मिनट तक संघर्ष करता रहा। अजय ने बताया कि उसने अपना हाथ भी मगरमच्छ के मुंह की ओर बढ़ाकर किसी तरह पकड़ ढीली करने की कोशिश की। आखिरकार उसके लगातार वार और जोर लगाने से मगरमच्छ की पकड़ कमजोर हुई और उसने पैर छोड़ दिया।
शोर मचाया, मदद को दौड़े लोग
जैसे ही अजय का पैर छूटा, वह दर्द से कराहते हुए आगे भागा और जोर-जोर से चिल्लाने लगा। उसकी आवाज सुनकर आसपास बकरियां चरा रहे अन्य चरवाहे मौके पर पहुंचे। उन्होंने अजय को गंभीर हालत में देखा और बिना समय गंवाए उसे उठाकर सीधे रामनगर अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल के डॉक्टरों के अनुसार अजय के पैर में गहरे जख्म हैं। मगरमच्छ के जबड़ों के कारण मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा है, लेकिन समय पर इलाज मिलने से उसकी हालत फिलहाल स्थिर है। डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही है और संक्रमण से बचाने के लिए विशेष उपचार दिया जा रहा है।
पहले भी दिख चुके हैं मगर
घटना के बाद कुदरी कला और आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि बाणसागर जलाशय में मगरमच्छों की मौजूदगी पहले से है। कई बार उन्हें पानी के किनारे देखा गया है लेकिन इसके बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए। स्थानीय निवासी संतराम कोल का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब मगरमच्छ ने हमला किया हो, लेकिन इस बार मामला बेहद खतरनाक था। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में और भी बड़ी घटनाएं हो सकती हैं।

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