Crude Oil Price Forecast 2026: अमेरिका-वेनेजुएला तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों को लेकर बड़ी भविष्यवाणी। जानें SBI रिसर्च और नुवामा की रिपोर्ट के अनुसार 2026 में पेट्रोल-डीजल कितना सस्ता हो सकता है।

बिजनेस डेस्क. स्टार समाचार वेब
अमेरिका और वेनेजुएला के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, इस भू-राजनीतिक अस्थिरता ने कुछ समय के लिए कच्चे तेल की कीमतों को सहारा दिया और भारतीय तेल कंपनियों के शेयरों में तेजी भी देखी गई, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति लंबी नहीं टिकेगी।
दुनिया भर में तेल की बढ़ती सप्लाई और बदलते समीकरणों के कारण 2026 में कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आने की संभावना है। आइए जानते हैं विभिन्न रिसर्च रिपोर्ट्स इस पर क्या कहती हैं:
एसबीआई रिसर्च की हालिया रिपोर्ट भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर लेकर आई है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
कीमतों में गिरावट: ओपेक प्लस (OPEC+) द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसलों के चलते कच्चे तेल की कीमतें दबाव में हैं।
2026 का अनुमान: साल 2026 की शुरुआत तक ब्रेंट क्रूड का औसत भाव 55 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रह सकता है।
इंडियन बास्केट: मार्च 2026 तक भारतीय बास्केट की कीमत 53 डॉलर और जून 2026 तक 52 डॉलर प्रति बैरल तक गिरने का अनुमान है।
आम आदमी को फायदा: यदि कच्चा तेल इस स्तर पर आता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी कटौती हो सकती है, जिससे महंगाई दर को कम करने में मदद मिलेगी।
नुवामा की रिपोर्ट भारतीय कॉर्पोरेट सेक्टर और तेल कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य पर केंद्रित है:
कमाई में बढ़ोत्तरी: FY26 की तीसरी तिमाही में तेल और गैस सेक्टर की कुल आय में 17% की सालाना वृद्धि का अनुमान है।
RIL और OMCs को लाभ: रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) को अपने रिफाइनिंग और डिजिटल बिजनेस से मजबूती मिलेगी। वहीं, बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन के कारण तेल विपणन कंपनियों (HPCL, BPCL, IOCL) की आय सुधर सकती है।
ONGC और GAIL के लिए चुनौती: कच्चे तेल के दाम गिरने और उत्पादन में कमी आने से ONGC के मुनाफे पर असर पड़ सकता है। साथ ही गैस वितरण कंपनियों के लिए भी आगामी समय चुनौतीपूर्ण रहने के आसार हैं।
सप्लाई का दबाव: वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की अधिक उपलब्धता कीमतों को नीचे धकेलेगी।
महंगाई से राहत: तेल सस्ता होने से भारत की आर्थिक गति तेज होगी और आम जनता को सस्ते ईंधन का लाभ मिल सकता है।
रुपये की मजबूती: कच्चे तेल का आयात बिल कम होने से भारतीय रुपये की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।
| कंपनी / सेक्टर | अपेक्षित प्रभाव (Outlook) | मुख्य कारण |
| Reliance Industries (RIL) | सकारात्मक (Positive) | रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार और डिजिटल बिजनेस (Jio) से मिलने वाला सपोर्ट। |
| Oil Marketing Companies (HPCL, BPCL, IOCL) | सकारात्मक (Positive) | कच्चा तेल सस्ता होने से रिफाइनिंग मार्जिन बेहतर होगा और मार्केटिंग घाटा कम होगा। |
| ONGC / Oil Producers | नकारात्मक (Negative) | कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ($52-55) से सीधे तौर पर मुनाफे में कमी आएगी। |
| GAIL / Gas Companies | चुनौतीपूर्ण (Neutral to Weak) | गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मांग के अस्थिर समीकरण। |
| आम उपभोक्ता (Petrol-Diesel) | बड़ी राहत (Very Positive) | एसबीआई के मुताबिक कीमतों में भारी कटौती और महंगाई में कमी की संभावना। |
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए "बूस्टर डोज" की तरह काम कर सकती है:
राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit): तेल आयात बिल कम होने से सरकार के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम होगा।
रुपये की स्थिति: डॉलर की मांग घटने से भारतीय रुपया अन्य मुद्राओं की तुलना में मजबूत हो सकता है।
कॉर्पोरेट अर्निंग्स: ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों के मुनाफे में सुधार होगा।
जानकारों का मानना है कि जहाँ एक तरफ OMCs (Oil Marketing Companies) के शेयरों में खरीदारी के अवसर बन सकते हैं, वहीं Upstream कंपनियों (जैसे ONGC) पर सतर्क रहने की जरूरत है क्योंकि उनकी आय सीधे तौर पर क्रूड की ऊँची कीमतों पर निर्भर करती है।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

MP College Admission 2026: ई-प्रवेश दूसरे चरण की अलॉटमेंट लिस्ट जारी, 13 जून तक जमा करें फीस

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
टाटा संस के प्रस्तावित पुनर्गठन को लेकर टाटा ट्रस्ट्स में दरार आ गई है। सीनियर ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने बिना सलाह के फैसले लेने पर आपत्ति जताई है।
भारतीय शेयर बाजार में गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को भी भारी गिरावट दर्ज की गई। सुबह प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 97.96 अंक के नुकसान के साथ 72,382.33 पर कारोबार करता दिखा। वहीं, निफ्टी 53.71 अंक लुढ़ककर 22,566.75 के स्तर पर आ गया।
अक्टूबर 2026 में सिलेंडर, हवाई ईंधन, बैंकिंग, डिजिटल पेमेंट और सरकारी योजनाओं से जुड़े बदलाव हो रहे हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़ने से रेस्टोरेंट मालिकों का खर्च मामूली बढ़ेगा। ऐसे में वे चाय, नाश्ता महंगा कर सकते हैं। शादियों की कैटरिंग भी महंगी हो सकती है।
सोने-चांदी की कीमतों में आज लगातार दो दिन की गिरावट के बाद तेजी है। 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 712 रुपए बढ़कर 1,48,379 रुपए पर आ गया। इससे पहले 29 सितंबर को यह 1,47,667 रुपए पर था। वहीं, एक किलो चांदी 673 रुपए बढ़कर 2,22,273 रुपए पर आ गई है, जो मंगलवार को 2,21,600 रुपए पर थी।
एपल ने भारत में अपनी डिजिटल पेमेंट सर्विस 'एपल पे' को लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही आईफोन और एपल वॉच यूजर्स के लिए कार्डलेस और कॉन्टैक्टलेस पेमेंट का नया ऑप्शन भी अवेलेबल हो गया है। एपल की इस सर्विस के लिए एक्सिस बैंक पहला पार्टनर बना है।
आज भारतीय शेयर बाजार में मिलाजुला रुख देखने को मिला। सेंसेक्स में मामूली वृद्धि दर्ज हुई, जबकि निफ्टी गिरावट के साथ 22,700 के नीचे बंद हुआ। दो दिन की बिकवाली के बाद कुछ क्षेत्रों में सुधार दिखा, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार को प्रभावित किया।
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह की शुरुआत कमजोर रही। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 600 से अधिक अंक टूट गया। निफ्टी भी 22,600 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे फिसल गया। सुबह 10:02 बजे सेंसेक्स 616.08 अंक यानी 0.84 फीसदी गिरकर 72,155.64 अंक पर कारोबार कर रहा था।
देशभर के बैंक उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। इस सप्ताह सभी बैंक आम दिनों की तरह खुले रहेंगे और कामकाज सुचारू रूप से चलेगा। यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस ने 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल को टालने का फैसला किया है।
सोमवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी बुरी तरह गिरे। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बाजार पर हावी रहीं। एशियाई बाजारों में कमजोर रुख ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया।
गर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो तुरंत सतर्क हो जाइए। आज रविवार को भले ही बैंक की शाखाएं खुली हुई हैं और कामकाज चल रहा है, लेकिन आने वाले हफ्ते में बैंकिंग सेवाएं बुरी तरह प्रभावित रहने वाली हैं। आम ग्राहकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और करोड़ों रुपए का वित्तीय लेनदेन अटकने की संभावना है।