इजराइल में बिना बहुमत के चुनाव नतीजों के बाद विपक्ष के नेता गादी आइजनकोट ने नई सरकार के गठन के लिए 4 प्रमुख शर्तें रखी हैं। जानें हरेदी सैन्य सेवा, गाजा में हमास के अंत और इजराइली राजनीति के नए समीकरण।

इजराइल में 27 अक्टूबर को संपन्न हुए आम चुनावों के बाद राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। किसी भी राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत न मिलने के बीच विपक्ष के सबसे बड़े चेहरे और 'याशार' पार्टी के नेता गादी आइजनकोट ने नई गठबंधन सरकार के गठन के लिए 4 कड़ी शर्तें रखी हैं। इजराइली मीडिया संस्थान 'वायनेट' की रिपोर्ट के अनुसार, आइजनकोट की शर्तों में अति-रूढ़िवादी हरेदी समुदाय के लिए अनिवार्य सैन्य सेवा लागू करना और गाजा से हमास के शासन का पूर्ण खात्मा शामिल है।
आइजनकोट ने स्पष्ट किया है कि जो भी राजनीतिक दल इन सिद्धांतों और शर्तों पर सहमत होंगे, उनके लिए गठबंधन सरकार में शामिल होने का रास्ता पूरी तरह से खुला है।
इजराइल की 120 सदस्यों वाली संसद (नेसेट) में बहुमत का आंकड़ा 61 है, लेकिन चुनाव नतीजों में किसी भी दल या गठबंधन को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ। गादी आइजनकोट की नेतृत्व वाली 'याशार' पार्टी ने चुनाव में 21 सीटों पर जीत दर्ज की है, जिसके साथ वह संसद में विपक्ष का सबसे बड़ा दल बनकर उभरी है।वर्तमान प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से बाहर करने के उद्देश्य से आइजनकोट इस समय विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ वार्ता और रणनीतिक बैठकें कर रहे हैं।
आइजनकोट की पहली प्राथमिक शर्त यह है कि इजराइल को एक यहूदी और लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में अपनी मूल पहचान बनाए रखनी चाहिए। नई सरकार को देश के सभी नागरिकों को बिना किसी धर्म या समुदाय के भेदभाव के समान अधिकार देने होंगे और हर नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता एवं मानवाधिकारों की रक्षा करनी होगी।
आइजनकोट ने मांग रखी है कि देश के हर नागरिक के लिए सेना, राष्ट्रीय सेवा या नागरिक सेवा अनिवार्य की जाए। वर्तमान में इजराइल में आम यहूदी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा देना कानूनन अनिवार्य है, लेकिन अति-रूढ़िवादी हरेदी समुदाय (जिसकी आबादी लगभग 10 लाख है और जो कुल जनसंख्या का करीब 13% है) को धार्मिक अध्ययन के आधार पर इससे छूट मिलती रही है। आइजनकोट की पार्टी का कहना है कि गंभीर राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के दौर में देश की रक्षा का दायित्व किसी एक वर्ग पर न होकर सभी नागरिकों पर समान रूप से होना चाहिए।
तीसरी शर्त के तहत नई सरकार को 1948 में इजराइल की स्थापना के समय तय किए गए लोकतांत्रिक मूल्यों, स्वतंत्रता, न्याय और नागरिक समानता के सिद्धांतों के तहत कार्य करना होगा। नेतन्याहू सरकार द्वारा न्यायपालिका के ढांचे में किए गए विवादित बदलावों के कारण यह शर्त अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। आइजनकोट का तर्क है कि इन विवादित कानूनों से देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर हुई हैं, इसलिए इन्हें तुरंत रद्द किया जाना चाहिए।
चौथी और अंतिम शर्त में गाजा पट्टी से हमास के शासन को पूरी तरह समाप्त करने और उसकी सैन्य क्षमताओं को ध्वस्त करने का संकल्प शामिल है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए आतंकी हमले (जिसमें नोआ अर्गमानी सहित कई नागरिकों का अपहरण और नरसंहार हुआ था) के बाद इजराइल ने व्यापक सैन्य अभियान शुरू किया था। आइजनकोट का मानना है कि इजराइल की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए हमास को दोबारा सत्ता में आने से रोकना अनिवार्य है।
इजराइल की संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार, चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद राष्ट्रपति (वर्तमान में इसाक हर्जोग) संसद के सभी दलों से परामर्श करते हैं और सरकार बनाने की सबसे अधिक संभावना वाले नेता को आमंत्रित करते हैं:
प्रारंभिक समय: सरकार बनाने के लिए नामित नेता को शुरुआत में 28 दिन की समय-सीमा दी जाती है।
अतिरिक्त विस्तार: यदि इस अवधि में गठबंधन तैयार नहीं होता, तो राष्ट्रपति इसे 14 दिन के लिए और बढ़ा सकते हैं।
कुल उपलब्ध समय: इस प्रकार किसी भी नेता के पास पूर्ण बहुमत जुटाने के लिए अधिकतम 42 दिन का समय होता है।
इस समय-सीमा के भीतर नेता को अन्य दलों के साथ नीतिगत समझौतों और मंत्रालयों के बंटवारे पर सहमति बनाकर संसद में बहुमत साबित करना होता है। चुनाव परिणामों के तुरंत बाद से ही आइजनकोट राष्ट्रपति हर्जोग के समक्ष सरकार बनाने का ठोस दावा पेश करने के उद्देश्य से ज्यादा से ज्यादा सांसदों का समर्थन जुटाने में लगे हैं।
इजराइल में बिना बहुमत के चुनाव नतीजों के बाद विपक्ष के नेता गादी आइजनकोट ने नई सरकार के गठन के लिए 4 प्रमुख शर्तें रखी हैं। जानें हरेदी सैन्य सेवा, गाजा में हमास के अंत और इजराइली राजनीति के नए समीकरण।
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