जानिए आजादी के बाद देश की दशा और दिशा बदलने वाले 10 सबसे बड़े कानूनी और संवैधानिक बदलावों की पूरी विस्तार से जानकारी।

15 अगस्त विशेष...
फीचर डेस्क। स्टार समाचार वेब
15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिलने के बाद देश के सामने एक मजबूत और आत्मनिर्भर राष्ट्र के निर्माण की बड़ी चुनौती थी। समय के साथ समाज, अर्थव्यवस्था और तकनीक में बदलाव आए, जिसके अनुरूप देश के कानूनों में भी ऐतिहासिक संशोधन किए गए। भारतीय संसद द्वारा पारित किए गए प्रमुख कानून और संशोधन निम्नलिखित हैं:
देश में आपातकाल (इमरजेंसी) के दौरान लाया गया 42वां संविधान संशोधन भारतीय इतिहास के सबसे बड़े और व्यापक संशोधनों में गिना जाता है। इसके तहत संविधान की प्रस्तावना में तीन नए शब्द—'समाजवादी', 'धर्मनिरपेक्ष' और 'अखंडता' जोड़े गए। साथ ही, इसी संशोधन के माध्यम से देश के नागरिकों के लिए मौलिक कर्तव्यों को भी तय किया गया।
देश में जमीनी स्तर पर जमींदारी प्रथा को समाप्त करने और सड़क, रेल, पुल जैसे महत्वपूर्ण विकास कार्यों के लिए सरकार को भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता थी। इन जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार 44वां संशोधन लेकर आई, जिसके तहत 'संपत्ति के अधिकार' को मौलिक अधिकारों की सूची से हटाकर एक सामान्य कानूनी अधिकार बना दिया गया।
महात्मा गांधी के 'ग्राम स्वराज' के सपने को वास्तविक रूप देने के लिए सरकार 73वां संविधान संशोधन लेकर आई। इसके जरिए गांवों में पंचायती राज व्यवस्था को कानूनी रूप से लागू किया गया। इससे ग्रामीण विकास से जुड़े फैसले सीधे तौर पर स्थानीय ग्रामीणों और मुखिया के हाथ में आ गए, जिससे भारतीय लोकतंत्र जमीनी स्तर तक मजबूत हुआ।
इस ऐतिहासिक संशोधन के माध्यम से शिक्षा को बच्चों का कानूनी अधिकार बनाया गया। इसके तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के प्रत्येक बच्चे को मुफ्त और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा उपलब्ध कराना सरकार की सीधी जिम्मेदारी तय की गई।
आरटीआई कानून ने सरकारी तंत्र और दफ्तरों में बंद फाइलों की जानकारी को आम जनता के दायरे में ला दिया। इस कानून के तहत कोई भी आम नागरिक मामूली शुल्क (₹10) देकर सरकार के किसी भी विकास कार्य, योजना या खर्च से जुड़ी आधिकारिक जानकारी मांग सकता है। इस कानून ने देश में पारदर्शिता बढ़ाने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में अहम भूमिका निभाई है।
वर्ष 2016 के 101वें संविधान संशोधन के जरिए देश की पूरी कर (Tax) व्यवस्था को पूरी तरह बदल दिया गया। इस बदलाव से पहले व्यापारियों और आम जनता को वैट (VAT), सर्विस टैक्स, एक्साइज ड्यूटी जैसे दर्जनों अलग-अलग कर चुकाने पड़ते थे। जीएसटी लागू होने के बाद 'एक देश, एक टैक्स' (One Nation, One Tax) का सपना साकार हुआ।
सीएए (CAA) हाल के वर्षों के सबसे चर्चित कानूनों में से एक है। इसके माध्यम से पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में धार्मिक प्रताड़ना का शिकार होकर भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई शरणार्थियों को भारत की नागरिकता प्रदान करने का आसान कानूनी मार्ग प्रशस्त किया गया।
उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा के लिए 1986 के पुराने कानून में बदलाव करते हुए नया उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 लाया गया। इस नए कानून के दायरे में आधुनिक ई-कॉमर्स कंपनियों को भी शामिल किया गया। इसके तहत भ्रामक और झूठे विज्ञापन प्रसारित करने वाले सेलिब्रिटीज तथा घटिया या खराब सामान बेचने वाली कंपनियों पर भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी और प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा 106वां संविधान संशोधन पारित किया गया। इस ऐतिहासिक कानून के तहत देश की संसद (लोकसभा) और सभी राज्यों की विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटों के आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
इंटरनेट के दौर में नागरिकों की निजी और गोपनीय जानकारी पूरी तरह सुरक्षित रहे, इसके लिए सरकार डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन कानून लेकर आई। इस कड़े कानून के लागू होने के बाद अब कोई भी टेक कंपनी, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या संस्था यूजर की स्पष्ट अनुमति के बिना उसके व्यक्तिगत डेटा को न तो स्टोर कर सकती है और न ही comerciales उद्देश्यों के लिए बेच सकती है।

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