विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 17 सितंबर 2026 विशेष। जानिए भारत में स्वास्थ्य सेवाओं की असलियत, ग्रामीण इलाकों की चुनौतियां, नकली दवाओं का साम्राज्य और मरीज सुरक्षा से जुड़े कड़े सवाल।

डॉ. प्रितम भि. गेडाम
अभी हाल ही में समाचारपत्रों में कोटा, राजस्थान की 15 वर्षीय तन्वी परियानी की हृदय विदारक खबर ने झकझोर कर रख दिया। गंभीर हृदय रोग से पीड़ित तन्वी वर्ष 2014 से लगातार 13 साल तक एम्स दिल्ली में ऑपरेशन की राह देखती रही, और अंततः 1 सितंबर को उसका देहांत हो गया। इन 13 सालों में परिवार के लाखों रुपये खर्च हुए, तारीखें मिलती रहीं, लेकिन ऑपरेशन नहीं हुआ। तन्वी के पिता का यह सवाल आज भी गूंज रहा है—"गरीब हूँ, लेकिन बेटी के न्याय के लिए लड़ता रहूँगा।" तन्वी की मौत के बाद एम्स ने जाँच समिति जरूर गठित की है, लेकिन यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था की लंबी कतारों और फाइलों में उलझी जिंदगियों की पोल खोलती है।
भारत गांवों में बसता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों से रोजाना आने वाली हृदय विदारक घटनाएं इंसानियत को शर्मसार कर देती हैं। अभी हाल ही में तेलंगाना के कोलमगुडा ग्रामीण भाग में एक सात महीने की गर्भवती महिला गंभीर रूप से बीमार पड़ गई। खराब सड़क और कोई वाहन सुविधा न होने के कारण गांव के लोगों ने उफनती हुई नदी पार कर कामचलाऊ स्ट्रेचर बनाकर उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया।
यह कोई इकलौती घटना नहीं है। देश के अनगिनत गांवों में आज भी पक्की सड़कें तक नहीं हैं। वक्त पर उपचार न मिलने के कारण हर साल बड़ी संख्या में लोग जान गंवाते हैं। ग्रामीण भागों के स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त कर्मचारियों की कमी आम बात है, और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं तो एक सपने जैसी हैं।
हर साल 17 सितंबर को दुनियाभर में 'विश्व रोगी सुरक्षा दिवस' मनाया जाता है ताकि मरीजों को बेहतर और सुरक्षित स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। इस साल (2026) की थीम "गैर-संचारी रोगों के लिए सुरक्षित देखभाल" है और इसका आधिकारिक नारा "जीवन के लिए सुरक्षित देखभाल" है।
लेकिन भारत में स्थिति इसके विपरीत है। स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे पर अत्यधिक बोझ, कर्मचारियों की भारी कमी और संसाधनों का अभाव मुख्य बाधाएं हैं। कुछ कड़वे आंकड़े .....
सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम रिपोर्ट (2024): देश में हुई कुल मौतों में से लगभग आधी मौतें (45.5%) किसी प्रशिक्षित पेशेवर की मेडिकल देखरेख के बिना हुईं।
ग्रामीण बनाम शहरी: 2024 में प्रशिक्षित चिकित्सा देखभाल के बिना होने वाली मौतें ग्रामीण क्षेत्रों में 48.9% थीं, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 36.1% दर्ज की गईं।
WHO के आंकड़े: वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य देखभाल के दौरान हर 10 में से लगभग 1 मरीज को नुकसान पहुंचता है और असुरक्षित देखभाल से हर साल 30 लाख से ज्यादा मौतें होती हैं।
मेड लीगल रिव्यू (2025): अकेले 2025 में भारत में मेडिकल लापरवाही के 65,000 मामले दर्ज किए गए, जो एक बड़ी प्रणालीगत समस्या को दर्शाते हैं।
आज हर क्षेत्र की तरह दवा बाजार भी नकली उत्पादों के साम्राज्य से अछूता नहीं है। नकली दवाओं को रोकने वाली पैकेजिंग का ग्लोबल मार्केट 2026 में 129 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया है। महाराष्ट्र के नागपुर मेडिकल कॉलेज जैसे सरकारी अस्पतालों में नकली दवाओं का जखीरा मिलने की पुष्टि यह साबित करती है कि यह रैकेट कितना मजबूत हो चुका है।
इसके अलावा, चिकित्सा अब सेवा कम और व्यापार ज्यादा बन गई है। एक दौर था जब डॉक्टर नब्ज और चेहरे के हाव-भाव से बीमारी भांप लेते थे, लेकिन आज अस्पताल की चौखट पर कदम रखते ही महंगे टेस्टों की लंबी सूची थमा दी जाती है। कई बार यह भी तय होता है कि टेस्ट कहां से कराना है और दवा कहां से खरीदनी है।
विकसित देशों में डॉक्टरों को कड़े कानूनों के तहत काम करना पड़ता है; थोड़ी सी लापरवाही पर उनका लाइसेंस तक रद्द कर दिया जाता है। लेकिन हमारे देश में इलाज के दौरान होने वाली लापरवाही पर वैसी सख्त और पारदर्शी जवाबदेही तय नहीं होती।
हालांकि सोशल मीडिया के इस दौर में इस क्षेत्र की अनैतिकताएं आएदिन वायरल होती हैं, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि चिकित्सा ही एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहां डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है।
हर मरीज को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा बेहद सहज ढंग से मिलनी चाहिए। केवल पैसों या संसाधनों की कमी के कारण किसी मासूम को अपनी जान न गवानी पड़े। दूर-दराज और पिछड़े इलाकों में भी स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत पकड़ होनी चाहिए, क्योंकि स्वास्थ्य केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
भारत एक धर्म प्रधान देश हैं। यहां साल के सभी दिनो का महत्व होता है तथा साल का हर दिन पवित्र माना जाता है। भारत में करवा चौथ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। यह भारत के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और पंजाब का पर्व है। यह कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है।
विजयादशमी का पर्व हमें सिखाता है कि सत्य के प्रति आस्था के साथ उसकी रक्षा का साहस भी आवश्यक है। न्याय की कामना तभी फलित होती है, जब समाज उसके लिए खड़ा होने का संकल्प लेता है।
हर साल 17 अक्टूबर को "अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस" गरीबी मिटाने के लिए जनजागृति हेतु पुरे विश्व में मनाया जाता हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा इस साल 2026 को “सभी के लिए सुरक्षित घर” यह थीम हैं।
एशियन गेम्स 2026 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश को 85 पदक दिलाए और पदक तालिका में चौथा स्थान हासिल किया। भारत के खाते में 21 स्वर्ण, 27 रजत और 37 कांस्य पदक आए। इस उपलब्धि की सबसे गौरवपूर्ण तस्वीर यह है कि महिला खिलाड़ियों ने 38 पदक अपने नाम किए, जो पुरुष खिलाड़ियों के बराबर हैं।
लाल बहादुर शास्त्री के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन, राजनीतिक सफर, प्रधानमंत्री कार्यकाल, ‘जय जवान जय किसान’ नारे और उनकी सादगी व राष्ट्रसेवा से जुड़ी प्रेरक कहानी पढ़ें।
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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का सार्वजनिक जीवन ऐसी ही असाधारण यात्रा का उदाहरण है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में लगभग 13 वर्षों तक उन्होंने शासन की एक ऐसी शैली विकसित की, जिसमें विकास, सुशासन और जनभागीदारी को केंद्र में रखा गया।
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