भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) की सप्लाई को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मध्य-पूर्व (Middle-East) में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब एक आपातकालीन योजना पर काम कर रही हैं।
By: Ajay Tiwari
Mar 23, 20266:29 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) की सप्लाई को लेकर एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मध्य-पूर्व (Middle-East) में बढ़ते तनाव और युद्ध की स्थिति को देखते हुए सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब एक आपातकालीन योजना पर काम कर रही हैं। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अब घरों में इस्तेमाल होने वाले मानक 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर में केवल 10 किलोग्राम गैस भरकर देने की तैयारी की जा रही है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य सीमित स्टॉक का प्रबंधन करना और यह सुनिश्चित करना है कि गैस की किल्लत के बावजूद अधिक से अधिक परिवारों तक ईंधन पहुँच सके।
भारत अपनी कुल LPG आवश्यकता का लगभग 60% हिस्सा आयात करता है, जिसमें से 90% आपूर्ति खाड़ी देशों से होती है। वर्तमान में अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने इस सप्लाई चेन को बुरी तरह प्रभावित किया है। ईरान के एनर्जी प्लांट्स पर हुए मिसाइल हमलों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से भारत आने वाले गैस जहाजों का रास्ता रुक गया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि भारत के 6 गैस टैंकर फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं, जिससे देश में स्टॉक की स्थिति 'चिंताजनक' बनी हुई है।
तेल कंपनियों के विश्लेषण के अनुसार, एक सामान्य परिवार में 14.2 किलो का सिलेंडर लगभग 35 से 40 दिन चलता है। यदि इसमें 10 किलो गैस भरी जाती है, तो एक परिवार का गुजारा लगभग एक महीने (30 दिन) तक हो सकेगा। इस कटौती से जो गैस बचेगी, उसे उन क्षेत्रों में डाइवर्ट किया जाएगा जहाँ भारी किल्लत है।
कीमतों में कमी: राहत की बात यह है कि गैस की मात्रा कम होने पर सिलेंडर के दाम भी उसी अनुपात में कम किए जाएंगे। वर्तमान में दिल्ली में सिलेंडर की कीमत ₹913 है, जो 10 किलो की पैकिंग में आने पर काफी कम हो जाएगी।
पहचान के लिए स्टिकर: ग्राहकों के बीच किसी भी भ्रम को दूर करने के लिए इन विशेष सिलेंडरों पर स्पष्ट वजन वाले स्टिकर लगाए जाएंगे।
इस योजना को धरातल पर उतारना काफी चुनौतीपूर्ण है। बॉटलिंग प्लांट्स में लगे ऑटोमैटिक फिलिंग और वेइंग सिस्टम को रीकैलिब्रेट (Recalibrate) करना होगा ताकि वे 10 किलो पर सटीक काम कर सकें। इसके अलावा, सरकार को इस संवेदनशील बदलाव के लिए कई रेगुलेटरी मंजूरियां भी लेनी होंगी। अधिकारियों को अंदेशा है कि चुनाव के समय में इस तरह का बदलाव जनता के बीच विरोध का कारण बन सकता है, इसलिए इसे बहुत ही सावधानी से लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
| विवरण | वर्तमान स्थिति | प्रस्तावित बदलाव |
| गैस की मात्रा | 14.2 किलोग्राम | 10 किलोग्राम |
| औसत खपत अवधि | 35-40 दिन | लगभग 30 दिन |
| कीमत (दिल्ली) | ₹913 | मात्रा के अनुसार कम होगी |
| सप्लाई स्रोत | 60% आयात (खाड़ी देश) | गंभीर किल्लत और मार्ग बाधित |