जबलपुर बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच तेज। चश्मदीद ने जस्टिस संजय द्विवेदी को सौंपे वीडियो साक्ष्य। एम्बुलेंस में मेडिकल स्टाफ न होने और SDRF की देरी पर उठे सवाल।

जबलपुर: स्टार समाचार वेब
मध्य प्रदेश के बहुचर्चित बरगी बांध क्रूज हादसे की न्यायिक जांच की रफ्तार तेज हो गई है। जांच आयोग ने इस मामले में पर्यटन विभाग के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इसी बीच, हादसे के प्रत्यक्षदर्शी और रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा रहे स्थानीय निवासी नीरज मिश्रा ने जांच आयोग के सामने कई सनसनीखेज आरोप लगाते हुए साक्ष्य सौंपे हैं। उनका दावा है कि प्रशासनिक लापरवाही और मेडिकल इमरजेंसी की विफलता के कारण कई जानें गईं।
जांच आयोग के सामने यह बेहद गंभीर वित्तीय और कानूनी लापरवाही का मामला आया है। शिकायतकर्ता नीरज मिश्रा के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के नियमों को ताक पर रखकर क्रूज का संचालन किया जा रहा था। प्रत्येक यात्री से ₹200 का टिकट शुल्क तो वसूला गया, लेकिन न तो उस क्रूज का बीमा था और न ही उसमें सवार पर्यटकों का। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि पीड़ित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा नहीं मिला, तो वे उच्च न्यायालय (High Court) और सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके अलावा, हादसे के बाद सबूत मिटाने के उद्देश्य से क्रूज को आनन-फानन में डिस्मेंटल (नष्ट) किए जाने पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
नीरज मिश्रा ने न्यायिक जांच आयोग के अध्यक्ष जस्टिस संजय द्विवेदी को 14 बिंदुओं की लिखित शिकायत के साथ एक पेनड्राइव सौंपी है। इस पेनड्राइव में एक वीडियो है, जिसमें 108 एम्बुलेंस का ड्राइवर खुद यह स्वीकार कर रहा है कि वह मौके पर अकेला आया था। शिकायत के अनुसार, जब स्थानीय लोगों ने डूबते क्रूज से यात्रियों को बाहर निकाला, तब कुछ पर्यटकों की सांसें चल रही थीं। अगर एम्बुलेंस में प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ होता और समय पर ऑक्सीजन या सीपीआर (CPR) मिल जाता, तो कुछ और जिंदगियों को सुरक्षित बचाया जा सकता था।
शिकायत में रेस्क्यू ऑपरेशन के टाइमलाइन पर भी गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। चश्मदीद के मुताबिक, यह हादसा 30 अप्रैल की शाम करीब 5:30 से 6:15 बजे के बीच हुआ था। प्रशासन को तुरंत सूचना दी गई थी, लेकिन आपदा राहत दल (SDRF) रात 8:00 बजे मौके पर पहुंची और उन्हें तैयारी करने में ही 30 से 45 मिनट लग गए। दावा किया गया है कि रात 8:15 बजे तक डूबते क्रूज से लोगों के चीखने-पुकारने की आवाजें आ रही थीं। अगर मोटर बोट, पेशेवर गोताखोर और लाइफ जैकेट जैसी बुनियादी सुरक्षा प्रणालियां समय पर सक्रिय हो जातीं, तो जनहानि को बहुत कम किया जा सकता था।
इस दर्दनाक हादसे में मैकल रिसॉर्ट से महज 4 किलोमीटर दूर 41 यात्रियों से भरा क्रूज बैकवॉटर में समा गया था, जिसमें 13 लोगों की असमय मौत हो गई थी और 28 लोगों को बचाया गया था। राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायिक समिति अब तक पर्यटन विभाग के तत्कालीन महाप्रबंधक, रिसॉर्ट प्रबंधन और क्रूज चालक के बयान दर्ज कर चुकी है। आयोग को 60 दिनों के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपनी है। अब इन नए तकनीकी साक्ष्यों और 14 बिंदुओं की शिकायत के बाद जांच का दायरा और कड़ा हो गया है।

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